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Shinawatra Farmily: पुलिस की नौकरी छोड़ शुरू किया राजनीति का सफर... पहले खुद, फिर बहन और अब बेटी है देश की प्रधानमंत्री... कहानी थाईलैंड के शिनावात्रा परिवार की

पैतोंगतार्न शिनावात्रा अपने परिवार की तीसरी सदस्य हैं जो देश की प्रधानमंत्री बनी हैं. उनसे पहले उनके पिता और बुआ यह कमान संभाल चुके हैं.

PM Paetongtarn Shinawatra (Photo: X/@ingshin)
gnttv.com
  • नई दिल्ली ,
  • 04 अप्रैल 2025,
  • अपडेटेड 12:57 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थाईलैंड की दो-दिवसीय यात्रा पर हैं. वह BIMSTEC समिट में हिस्सा लेने पहुंचे हैं. उन्होंने थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनावात्रा से मुलाकात की. दोनों के बीच द्विपक्षीय बैठक भी हुई. इस सबके बीच शिनावात्रा परिवार की चर्चा हर तरफ हो रही है. आपको बता दें कि शिनावात्रा परिवार थाईलैंड का सबसे पुराना और ताकतवर सियासी परिवार है. पैतोंगतार्न शिनावात्रा अपने परिवार की तीसरी सदस्य हैं जो देश की प्रधानमंत्री बनी हैं. उनसे पहले उनके पिता और बुआ यह कमान संभाल चुके हैं. 

कौन हैं पैतोंगतार्न शिनावात्रा 
थाईलैंड की पीएम पैतोंगतार्न शिनावात्रा देश की सबसे युवा प्रधानमंत्री है. वह महज 38 साल की हैं और देश की सत्ता संभाल रही हैं. 70 मिलियन की आबादी वाले देश को संभाल रही पैतोंगतार्न लगभग चार साल पहले ही राजनीति में शामिल हुई हैं. यूनाइटेड किंगडम में होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई करने के बाद, वह थाकसिन के रेंडे ग्रुप का मैनेजमेंट संभाल रही थीं. कुछ साल पहले वह राजनीति में शामिल हुईं और साल 2024 में वह प्रधानमंत्री बनीं. 

बिजनेस के साथ-साथ राजनीति भी 
पैतोंगतार्न के पिता थाकसिन का जन्म 1949 में हुआ था. उनके दादा चियांग साएखु मे 'शिनावात्रा सिल्क्स' की स्थापना करके रेशम का बिजनेस करते थे. दादा के बाद थाकसिन के पिता, लोएट शिनावात्रा ने बिजनेस को आगे बढ़ाया. हालांकि, बाद में उनकी राजनीति में दिलचस्पी होने लगी और उन्होंने राजनीति में एंट्री ली. लोएट 1968 से 1976 तक सांसद रहे और उनकी राजनीति का फायदा थाकसिन को मिला.

थाकसिन ने रॉयल थाई पुलिस में 1973 से 1987 तक सेवाएं दीं. उन्होंने अमेरिका से क्रिमिनल जस्टिस में मास्टर्स और डॉक्टरेट की डिग्री भी ली. थाईलैंड के पुलिस विभाग में वह लेफ्टिनेंट कर्नल बने. उनकी शादी पोटजमान नावादमरोंग से शादी की. लेकिन 1987 में उन्होंने पुलिस की नौकरी छोड़कर टेलीकम्युनिकेशन बिजनेस से जुड़ गए. उनकी कंपनी शिन कॉर्पोरेशन देश की सबसे बड़ी टेलिकॉम ऑपरेटर कंपनी बन गई. 

साल 1994 में उन्होंने पलंग धम्मा पार्टी (पीडीपी) जॉइन की और देश के विदेश मंत्री बने लेकिन गठबंधन की सरकार में उन्होंने सिर्फ तीन महीने यह पद संभाला. साल 1998 में उन्होंने थाई राक थाई (टीआरटी) पार्टी शुरू की. साल 2001 के चुनावों में उनकी पार्टी को बहुमत मिली और वे थाईलैंड के 23वें प्रधानमंत्री बन गए. 

बहन बनी पहली महिला प्रधानमंत्री 
थाकसिन की कल्याणकारी नीतियों के कारण गरीब और ग्रामीण थाई लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता बढ़ी. खासर उन्हें बौद्ध बहुल जनता का समर्थन मिला. इसके कारण, साल 2005 के आम चुनावों में उन्हें जीत मिली. वह एक बार फिर देश के पीएम बने. लेकिन साल 2006 में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगने लगे और विरोध प्रदर्शन होने लगा. इस सबके बीच वह जैसे-तैसे सरकार चला रहे था. हालांकि, 19 सितंबर 2006 को सेना ने देश में तख्तापलट कर दिया. यह उनकी गैर-मौजूदगी में हुआ. 

उनकी पार्टी को भी भंग कर दिया गया. वह 15 साल विदेश में रहे क्योंकि उन्हें डर था कि थाईलैंड में उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा. उनके पीछे से उनकी बहन, यिंगलक शिवानात्रा राजनीति में दाखिल हुईं और फ्यू थाई पार्टी को संभाला. यिंगलक देश की पहली महिला प्रधानमंत्री भी बनीं. लेकिन 2014 में उनके खिलाफ भी विरोध प्रदर्शन होने लगे और एक बार फिर सेना ने मौके का फायदा उठाकर तख्तापलट कर दिया. यिंगलक भी इसके बाद विदेश जाकर रहने लगीं. 

एक बार फिर सत्ता में वापसी  
थाकसिन साल 2023 में थाईलैंड लौटे. उनपर मुकदमा चला और उन्हें 8 साल कैद की सजा सुनाई गई लेकिन पिछली साल देश के राजा महा वजीरलोंगकोर्न ने उन्हें शाही माफी दे दी और उनका सजा सिर्फ एक साल की हो गई. साल 2023 में फ्यू थाई पार्टी ने गठबंधन में सरकार बनाई और देश के पीएम का पद थाकसिन के करीबी स्नेथा थाविसिन ने संभाला. 

हालांकि, थाविसिन को एक साल बाद पीएम पद से हटा दिया गया क्योंकि उनपर क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले वकील को कैबिनेट में शामिल करने का आरोप था. इस घटना के बाद थाकसिन की बेटी पैतोंगतार्न को देश की प्रधानमंत्री बनाया गया. वह थाइलैंड के इतिहास की सबसे युवा प्रधानमंत्री हैं. 

 

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