World Population Day 2026: दुनिया के इन देशों की जनसंख्या जान हो जाएंगे हैरान... एक देश जहां की आबादी है करोड़ों में, पर दूसरी कंट्री की पॉपुलेशन पार नहीं करती 1000 का आंकड़ा भी

विश्व जनसंख्या दिवस पर अगर सबसे बड़ी जनसंख्या वाले देश की बात करें, तो भारत को कोई पीछे नहीं छोड़ सकता. लेकिन अगर सबसे कम जनसंख्या वाले 5 देशों की बात करें तो वह भारत के सामने बिल्कुल बौने साबित होते हैं.

World Population Day 2026 (AI)
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 10 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 7:24 PM IST

हर साल 11 जुलाई को World Population Day मनाया जाता है. इस दिन का मकसद उद्देश्य लोगों को बढ़ती आबादी, उसके प्रभाव और विकास के बारे लोगों को जागरूक करना है. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, दुनिया की आबादी लगातार बढ़ रही है. ऐसे में यह जानना बड़ा दिलचस्प है कि दुनिया में कुछ देश ऐसे भी हैं जहां करोड़ों लोग रहते हैं, जबकि कुछ देशों की आबादी एक छोटे गांव से भी कम है. चलिए आपको बताते हैं इन देशों के बारे में.

सबसे ज्यादा आबादी वाले 5 देश

दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाले देशों में भारत सबसे पहले आता है. भारत की आबादी लगभग 146 करोड़ है. इसके बाद चीन का स्थान आता है, जहां करीब 141 करोड़ लोग रहते हैं. तीसरे स्थान पर अमेरिका है, जिसकी आबादी लगभग 34 करोड़ है. चौथे स्थान पर इंडोनेशिया है, जहां करीब 28 करोड़ लोग रहते हैं. वहीं पाकिस्तान लगभग 25 करोड़ की आबादी के साथ दुनिया का पांचवां सबसे अधिक आबादी वाला देश है. इन देशों की बड़ी जनसंख्या उनकी अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी व्यवस्थाओं पर बड़ा असर डालती है.

यहां की आबादी है सबसे कम

दुनिया के सबसे कम आबादी वाले देशों की बात करें तो सबसे पहले वेटिकन सिटी आता है. यह दुनिया का सबसे कम आबादी वाला देश है. यहां केवल 764 लोग रहते हैं. यह दुनिया का सबसे छोटा देश भी है और कैथोलिक चर्च का मुख्य केंद्र माना जाता है. दूसरे स्थान पर टोकेलाऊ है, जिसकी आबादी करीब 1,915 है. यहां के लोग मुख्य रूप से मछली पकड़ने और खेती पर निर्भर हैं.

तीसरे स्थान पर नियू है, जहां लगभग 1,935 लोग रहते हैं. यह प्रशांत महासागर में स्थित एक छोटा द्वीप है. चौथे स्थान पर फॉकलैंड द्वीप है, जिसकी आबादी करीब 3,803 है. यहां की अर्थव्यवस्था भी मछली पकड़ने और पर्यटन पर आधारित है. पांचवें स्थान पर मोंटसेराट है, जहां लगभग 4,372 लोग रहते हैं. वर्ष 1995 में हुए ज्वालामुखी विस्फोट के बाद यहां की आबादी में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी.

 

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