World Population Day 2026: हर साल 11 जुलाई को ही क्यों मनाया जाता है विश्व जनसंख्या दिवस? जानें इस दिन का इतिहास, थीम, महत्व और भारत में पॉपुलेशन बढ़ने की बड़ी वजह

Vishwa Jansankhya Diwas: हर साल 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है. इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य बढ़ती जनसंख्या और लैंगिक असमानता जैसे मुद्दों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना है. इस दिन बताया जाता है कि बढ़ती आबादी पर्यावरण को कैसे प्रभावित कर रही है और बढ़ती जनसंख्या पर कैसे नियंत्रण लगाया जा सकता है. 

World Population Day 2026
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 10 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:53 AM IST

Population Day History: विश्व जनसंख्या दिवस यानी वर्ल्ड पॉपुलेशन डे (World Population Day) हर साल 11 जुलाई को मनाया जाता है. इस दिन को मनाने का उद्देश्य दुनिया भर में तेजी से बढ़ती आबादी व उससे जुड़ी चुनौतियों से लोगों को अवगत कराना है. बढ़ती जनसंख्या और लैंगिक असमानता जैसे मुद्दों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना है. 

वर्तमान समय में दुनिया की जनसंख्या 8 अरब से ज्यादा हो गई है. बढ़ती जनसंख्या का नकारात्मक प्रभाव पर्यावरण पर पड़ रहा है. वर्ल्ड पॉपुलेशन डे को मनाने का उद्देश्य पर्यावरण में हो रहे बदलाव रोकने और लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है. वर्ल्ड पॉपुलेशन डे के दिन परिवार नियोजन, महिलाओं के स्वास्थ्य, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने जैसे विषयों पर भी ध्यान केंद्रित किया जाता है. विश्व जनसंख्या दिवस के दिन स्कूलों-कॉलेजों व अन्य जगहों पर तरह-तरह के कार्यक्रम कर लोगों को बताया जाता है कि तेजी से बढ़ती आबादी पर्यावरण को कैसे प्रभावित कर रही है और बढ़ती जनसंख्या पर कैसे नियंत्रण लगाया जा सकता है. विश्व जनसंख्या दिवस के दिन दुनिया भर में जागरूकता कार्यक्रम, सेमिनार और जनसंख्या से जुड़े मुद्दों पर चर्चा आयोजित की जाती है.

क्या है विश्व जनसंख्या दिवस का इतिहास 
विश्व जनसंख्या दिवस को मनाने की शुरुआत साल 1989 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की पहल पर हुई थी. आपको मालूम हो कि उस समय पूरी दुनिया की आबादी बहुत तेजी से बढ़ रही थी. ऐसे में यह महसूस किया गया कि तेज गति से बढ़ती जनसंख्या पर वैश्विक स्तर पर चर्चा और जागरूकता जरूरी है. विश्व जनसंख्या दिवस मनाने की प्रेरणा 11 जुलाई 1987 को दुनिया की आबादी के 5 अरब तक पहुंचने की घटना से मिली. इसे फाइव बिलियन डे के रूप में भी याद किया जाता है. इसके बाद यूनाइटेड नेशंस ऑर्गेनाइजेशन की ओर से 11 जुलाई 1989 को वर्ल्ड पॉपुलेशन डे घोषित किया गया था. उसके बाद से हर साल 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाने लगा. विश्व जनसंख्या दिवस परिवार नियोजन, महिलाओं के अधिकार, मातृ स्वास्थ्य, किशोर स्वास्थ्य और सतत विकास जैसे विषयों पर वैश्विक ध्यान आकर्षित करता है.

क्या है विश्व जनसंख्या दिवस की थीम 
विश्व जनसंख्या दिवस हर साल एक थीम के साथ सेलिब्रेट किया जाता है. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक इस साल यानी 2026 के लिए थीम - Realizing the hopes and aspirations of young people-today and for the future यानी युवाओं की उम्मीदों और आकांक्षाओं को साकार करना-आज और भविष्य के लिए है. 

हमारे देश में जनसंख्या बढ़ने की बड़ी वजहें
विश्व की सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले देशों में चीन पहले और भारत दूसरे स्थान पर है. अमेरिका तीसरे, इंडोनेशिया चौथे और पाकिस्तान पांचवें स्थान पर है. 1901 की जनगणना के मुताबिक हमारे देश की उस समय आबादी 23.8 करोड़ थी, जो 2011 की जनगणना के मुताबिक बढ़कर 1.21 अरब हो गई है. हमारे देश भारत में आज जनसंख्या विस्फोट के कारण कई सारी समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं. आपको मालूम हो कि जनसंख्या विस्फोट के कारण प्रति व्यक्ति आय में गिरावट आती है. 

1. हमारे देश में जनसंख्या बढ़ने की वैसे तो कई कारण हैं. हम आपको कुछ बड़ी वजहों के बारे में बता रहे हैं. हमारे देश में पिछले सालों में जन्म-दर की अपेक्षा मृत्यु दर कम हुई है. वर्तमान में मृत्यु दर एक तिहाई आंकी गई है.
2. भारत में विवाह एक आवश्यक प्रक्रिया मानी जाती है. विवाह की इस अनिवार्यता के कारण भी तेजी से जनसंख्या बढ़ती है.
3. अन्य देशों की जगह हमारे यहां विवाह की उम्र कम है. इस वजह से संतान उत्पत्ति की अवधि भी लंबी होती है. कम उम्र में विवाह होने से परिपक्वता के अभाव में दंपती समझदारी भरा फैसला नहीं ले पाते.
4. हिंदू धर्म में जहां पुत्र प्राप्ति को मोक्ष का मार्ग माना जाता है, वहीं मुस्लिम धर्म में संतानोत्पति ईश्वर की कृपा मानी जाती है.
5. हमारे देश की जलवायु गर्म है. इस कारण विशेषकर लड़कियां शीघ्र ही तरुणावस्था को प्राप्त कर लेती हैं.
6. हमारे देश में शिक्षा का प्रसार कम है. अधिकांश लोग भाग्यवादी हैं. 
7. अधिकांश लोग संतान को भगवान की देन समझते हैं. वे संतान निरोध के उपयोग में विश्वास नहीं रखते हैं.


 

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