Planets Causing Accidents
Planets Causing Accidents
दुर्घटनाओं का ग्रहों से संबंध होता है. ज्योतिषी शैलेंद्र पांडे के मुताबिक कोई भी बुरी घटना आकस्मिक रूप से घट जाय तो वह दुर्घटना है. उन्होंने विभिन्न प्रकार की दुर्घटनाओं के ज्योतिषीय कारणों और उनसे बचाव के उपायों के बारे में बताया. उन्होंने बताया कि दुर्घटना केवल चोट-चपेट या शारीरिक ही नहीं होती, कभी-कभी अन्य तरीके से भी दुर्घटना घट सकती है. दुर्घटना आर्थिक और मानसिक भी हो सकती है. सूर्य और चन्द्रमा दुर्घटना के सबसे बड़े जिम्मेदार होते हैं. इसके बाद राहु, मंगल और शनि ग्रह आते हैं. बृहस्पति, शुक्र और शुभ बुध चन्द्र दुर्घटनाओं से रक्षा करते हैं.
शारीरिक और वाहन दुर्घटनाओं के लिए कौन से ग्रह होते हैं जिम्मेदार: शनि-राहु या शनि-मंगल के कारण वाहन दुर्घटनाएं घटती हैं. साढ़े साती या ढैया में भी ऐसा हो जाता है. इसमें लग्न के स्वामी के कमजोर होने पर शारीरिक क्षति होती है. मारक दशा होने पर प्राणांत हो जाता है अन्यथा केवल वाहन की क्षति होती है.
उपाय: कुंडली में ऐसा योग हो तो राम रक्षा स्रोत का पाठ करें. साढ़े साती या ढैया का प्रकोप हो तो बजरंग बाण पढ़ें. मारक दशा हो तो शिव जी का रुद्राभिषेक करवाएं. यात्रा शुरू करने के पूर्व अपने गुरु या ईष्ट का ध्यान करें.
आर्थिक दुर्घटनाओं के ग्रह और योग कौन से हैं: बुध खराब हो तो आर्थिक दुर्घटनाओं के योग बनते हैं. मंगल के कारण व्यक्ति एकदम से कर्जों में डूब जाता है. राहु का प्रभाव होने से व्यक्ति राजा से रंक हो जाता है. बृहस्पति आर्थिक दुर्घटना घट जाने के बावजूद दोबारा से मजबूत कर देता है.
उपाय: बुध खराब हो तो पन्ना कभी न पहनें. साथ ही नियमित रूप से विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें. मंगल के कारण समस्या हो तो रोज हनुमान चालीसा पढ़े. मांस-मदिरा त्याग दें. राहु का प्रभाव हो तो दारिद्रय दहन स्रोत का पाठ करें. साथ ही नियमित रूप से धन का दान करें.
रिश्तों की दुर्घटनाओं के लिए कौन से ग्रह होते हैं जिम्मेदार: चन्द्र और शुक्र रिश्तों में आकस्मिक समस्याएं पैदा करते हैं. राहु इस समस्या में बढ़ोतरी कर देता है. मंगल के कारण रिश्तों में विस्फोटक दुर्घटना घट जाती है.
उपाय: कुंडली में जो ग्रह समस्या कारक है, उसकी शांति कराएं. नियमित रूप से सूर्य को जल अर्पित करें. भगवान शिव और मां पार्वती की संयुक्त उपासना करें. हीरा सोच समझकर ही धारण करें.