connection of planets with concerns regarding children
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ज्योतिष में बृहस्पति को संतान कारक माना जाता है. इसके बाद सूर्य से भी संतान का सम्बन्ध होता है. इन दोनों में से किसी भी ग्रह के कमजोर होने से संतान को लेकर चिंताएं होती हैं. इसके अलावा कुंडली में कुछ अन्य स्थितियां भी इसका कारण बनती हैं. ज्योतिषी शैलेंद्र पांडेय ने बताया कि पंचम भाव के कमजोर होने से भी संतान की चिंता ज्यादा हो जाती है. राहु का प्रभाव ज्यादा होने से भी संतान को लेकर अकारण चिंताएं होती हैं. कर्क, वृश्चिक, मीन, वृष, कन्या और मकर राशि के बच्चों के माता-पिता को संतान की चिंता ज्यादा होती है.
संतान के स्वभाव और व्यवहार को लेकर समस्या हो तो क्या करें
घर में एक पीले रंग के गणेश जी की स्थापना करें. नित्य प्रातः गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें. इसके बाद "ॐ विघ्नहर्त्रे नमः" का 108 बार जाप करें. इसके बाद इसी दूर्वा को अपनी संतान के कमरे में ले जाकर रख दें. इस दूर्वा को हर दिन बदल दें.
यदि संतान के शिक्षा या करियर की चिंता हो तो क्या करें
नित्य प्रातः सूर्य को रोली मिलाकर जल अर्पित करें. "ॐ रवये नमः" का 108 बार जाप करें. लोटे के किनारों पर लगी हुई रोली का तिलक संतान को लगाएं. शनिवार को निर्धनों को हलवा, पूरी और चना बांटें.
संतान के विवाह की समस्या हो तो क्या करें
घर में शिव पार्वती की स्थापना करें. नित्य प्रातः उन्हें गुलाबी पुष्प अर्पित करें. इसके बाद ॐ गौरीशंकराय नमः का तीन माला जप करें. शुक्रवार के दिन उन्हें खीर का भोग लगाएं. इस खीर को अपनी संतान को ग्रहण कराएं.
यदि संतान के वैवाहिक जीवन में समस्या हो तो क्या करें
हर मंगलवार और शनिवार को शाम को हनुमान जी के सामने चमेली के तेल दीपक जलाएं. उन्हें बताशे का भोग लगाएं. इसके बाद उनके सामने सुंदरकांड का पाठ करें. बताशों का प्रसाद बांट दें. मंगलवार और शनिवार को घर में सात्विक भोजन ही बनाएं.
बच्चे को कैसे सही रास्ते पर ले चलें
बच्चे को सुबह सूर्य को जल अर्पित करवाएं. बच्चे को गायत्री मंत्र का जप करवाएं. बच्चे को रोज सुबह तुलसी का पत्ता खिलाएं. सलाह लेकर बच्चे को पीला पुखराज या पन्ना धारण करवाएं. बच्चे को कास्मेटिक्स और सुगंध का प्रयोग कम करवाएं. बच्चे को सप्ताह में एक बार धर्मस्थान पर जरूर ले जाएं. यदि आपके बच्चे का मानसिक विकास ठीक से न हो पा रहा हो तो बच्चे की माता, बच्चे के लिए गायत्री मंत्र का जप करें. बच्चे को अधिक से अधिक पीले और लाल फल खिलाएं. बच्चे के गले में एक पेरिडॉट धारण करवा दें.