scorecardresearch

Brihaspati Grah: मोटापे के लिए बृहस्पति होता है जिम्मेदार, जानें कौन-कौन बीमारियां होती हैं इस ग्रह के कारण और क्या है बचने के उपाय? 

ज्योतिष में बृहस्पति को देवगुरु माना जाता है. बृहस्पति का प्रभाव यदि जीवन पर सकारात्मक हो तो व्यक्ति बहुत ज्ञानी हो जाता है. बृहस्पति के कमजोर होने से व्यक्ति के संस्कार कमजोर होते हैं. बृहस्पति के कारण ही शरीर में कई बीमारियां होती हैं.

Brihaspati Grah Brihaspati Grah

नवग्रहों में बृहस्पति को गुरु और मंत्रणा का कारक माना जाता है.  बृहस्पति पीला रंग, स्वर्ण, वित्त और कोष, कानून, धर्म, ज्ञान, मंत्र और संस्कारों को नियंत्रित करता है. यह शरीर में पाचन तंत्र, मेदा और आयु की अवधि को निर्धारित करता है. बृहस्पति के कारण ही व्यक्ति का मोटापा घटता और बढ़ता है. पांच तत्वों में आकाश तत्व का अधिपति होने के कारण इसका प्रभाव बहुत ही व्यापक और विराट होता है. महिलाओं के जीवन में विवाह की सम्पूर्ण जिम्मेदारी बृहस्पति से ही तय होती है. 

बृहस्पति का मोटापे से क्या है संबंध 
शरीर में वसा को संचित करने की क्षमता बृहस्पति के पास होती है. जब बृहस्पति लग्न या लग्न के स्वामी को प्रभावित करता है तो मोटापा बढ़ जाता है. बृहस्पति कमजोर हो तो खाने की गलत आदत से मोटापा बढ़ जाता है. बृहस्पति लग्न के आस पास हो तो अनुवांशिक कारणों से मोटापा बढ़ जाता है. बृहस्पति पर पाप ग्रहों का प्रभाव हो तो बीमारी से व्यक्ति मोटा हो जाता है. 

उपाय: एकादशी का उपवास रखें, खाने में नींबू और दही जरूर शामिल करें. नित्य प्रातः और सायं बृहस्पति के मन्त्र का जाप करें. मंत्र होगा ॐ बृं बृहस्पतये नमः. 

बृहस्पति का पाचन तंत्र से क्या है संबंध 
भोजन के पचने की प्रक्रिया बृहस्पति से संबंध रखती है. यदि बृहस्पति कमजोर हो तो व्यक्ति का पाचन तंत्र कमजोर होता है. व्यक्ति जल्दी-जल्दी भोजन निगलता है, जिससे भोजन पच नहीं पाता. इसके अलावा व्यक्ति का रूटीन सही नहीं होता, जो कमजोर पाचन का कारण बनता है. यहां पर बृहस्पति हाइपर एसिडिटी और कमजोर पाचन देता है. 

उपाय: भोजन में हरी सब्जियों का प्रयोग करें. जहां तक हो सके दाल और अनाज कम से कम खाएं. ताम्बे के पात्र से जल ग्रहण करें. एक सोने या पीतल का छल्ला दाहिने हाथ की तर्जनी में धारण करें. 

कैंसर जैसे असाध्य रोग के पीछे क्या होता है बृहस्पति 
बृहस्पति किसी भी चीज को बड़ा और विशाल कर देता है. अक्सर कुंडली में जिस भाव में रहता है, उसको खराब कर देता है. शरीर के जिस हिस्से में रहता है उसमें बड़ी और दीर्घकालिक बीमारियां दे देता है. कैंसर जैसे बड़े और असाध्य रोग भी देता है. हालांकि इसमें राहु का सहयोग होना भी जरूरी है. कभी-कभी इनका उपाय और निदान असंभव होता है. 

उपाय: हमेशा अपना आचरण और स्वभाव ठीक रखें. शिव जी या अपने गुरु की उपासना करें. नित्य प्रातः और सायं गजेन्द्र मोक्ष का पाठ करें. रोग हो जाने पर हर माह एक बार गन्ने के रस से रुद्राभिषेक करवाएं. भूलकर भी पीला पुखराज धारण न करें. 

वृष राशि में क्या है पीला पुखराज और क्या है इसकी विशेषता 
बृहस्पति का मुख्य रत्न पुखराज है. यह बृहस्पति को मजबूत करने के लिए धारण किया जाता है. इसका प्रभाव काफी तेज होता है और लम्बे समय तक बना रहता है. यह सोने में, तर्जनी अंगुली में, बृहस्पतिवार को धारण किया जाता है. बिना सलाह के पुखराज कदापि धारण न करें अन्यथा यह गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है. 

पुखराज लाभ दे तो क्या-क्या फायदे होते हैं 
पुखराज मन को निश्चिन्त और पवित्र कर देता है. यह मन में आने वाले बुरे विचारों को दूर करता है. इसको धारण करने से वाणी और मन्त्र शक्ति की प्राप्ति होती है. आमतौर पर इससे आर्थिक स्थिति मजबूत हो जाती है. इससे व्यक्तित्व तेजस्वी और प्रभावशाली हो जाता है. यह अध्यात्मिक मामलों में खूब लाभ देता है. 

किनके लिए पीला पुखराज धारण करना होगा शुभ 
मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु और मीन लग्न में पुखराज शुभ होता है. वृष, तुला, मकर और कुम्भ लग्न में पुखराज बेहद अशुभ होता है.  मिथुन और कन्या लग्न में विशेष दशाओं में पुखराज धारण कर सकते हैं. जो लोग धर्म, अध्यात्म, शिक्षा या वाणी के क्षेत्र में हैं, उनके लिए पुखराज सामान्यतः लाभकारी होता है. महिलाओं के विवाह और वैवाहिक जीवन में पीला पुखराज लाभकारी होता है.