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Brihaspati Grah: क्या है बृहस्पति की राशियों की विशेषता, जानें इनका हमारे जीवन पर क्या पड़ता है प्रभाव?  

बृहस्पति आकाश तत्व का ग्रह माना जाता है. यह दो राशियों धनु और मीन का स्वामी है.  धनु  राशि के पास साहस, ज्ञान, गणना और नेतृत्व का गुण होता है. मीन राशि के पास ज्ञान-ग्लैमर, कला और शिक्षा का गुण होता है.

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Brihaspati Grah Brihaspati Grah

बृहस्पति आकाश तत्व का ग्रह माना जाता है. यह दो राशियों धनु और मीन का स्वामी है. धनु राशि अग्नि तत्व की और मान राशि जल तत्व की है. वैसे तो दोनों ही राशियां बृहस्पति की हैं लेकिन बृहस्पति धनु राशि में ज्यादा मजबूत होता है. शक्ति के लिहाज से धनु ऊर्जावान राशि है जबकि मीन सौम्य राशि मानी जाती है. 

बृहस्पति की पहली राशि धनु: इस राशि का स्वामी बृहस्पति है. यहां सूर्य व्यक्ति को भाग्यवान बनाता है. इस राशि के पास साहस, ज्ञान, गणना और नेतृत्व का गुण होता है. इस राशि के लोग अक्सर सेना या पुलिस में देखे जाते हैं. इनकी सबसे बड़ी कमजोरी है वाणी पर नियंत्रण न रखना. इस राशि के लोगों को सलाह लेकर माणिक्य धारण करना चाहिए. इस राशि के लोगों को भगवान सूर्य की उपासना अवश्य करनी चाहिए. 

बृहस्पति की दूसरी राशि मीन: इस राशि का स्वामी बृहस्पति है. चन्द्रमा यहां बिलकुल संतुलित होता है. इस राशि के पास ज्ञान-ग्लैमर, कला और शिक्षा का गुण होता है. इस राशि के लोग बड़े अच्छे होते हैं. ये अक्सर युवावस्था में भटक जाते हैं पर बाद में सही दिशा पाकर खूब तरक्की करते हैं. इनकी सबसे बड़ी समस्या है हर चीज को परफेक्ट करना. इनको सलाह लेकर एक मोती या पन्ना पहनना चाहिए. भगवान शिव की उपासना जरूर करनी चाहिए. 

आपकी राशि धनु है और जीवन में समस्या आ रही है तो क्या उपाय करें: धनु वालों को हमेशा उतार-चढ़ाव और दुर्घटनाओं से बचना चाहिए. यह आकस्मिकता वाली राशि मानी जाती है. इनको नित्य प्रातः सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए. चांदी धारण कर लेनी चाहिए. अधिक से अधिक शिव जी की उपासना करनी चाहिए. 

आपकी राशि मीन है और जीवन में समस्या आ रही है तो क्या उपाय करें: मीन राशि वालों को भावनात्मक समस्याओं से बचाव करना चाहिए. अक्सर मन के कारण कई बीमारियों के शिकार हो जाते हैं. इनको नियमित रूप से बृहस्पति मन्त्र का जप करना चाहिए. सलाह लेकर एक पीला पुखराज धारण कर लेना चाहिए. अधिक से अधिक सात्विक रहने का प्रयास करें. 

कौन सा है बृहस्पति का पहला राजयोग: बृहस्पति का पहला और सबसे सशक्त राजयोग है हंस है. यह बृहस्पति का पंचमहापुरुष योग है. बृहस्पति जब कर्क, धनु या मीन राशी में हो तो हंस नामक योग बनता है. इससे व्यक्ति तपस्वी, विद्वान और ज्ञानी होता है. ऐसे लोगों को बिना प्रयास के नाम यश और सम्मान मिलता है. ऐसे लोग राजनीति, कानून और शिक्षा क्षेत्र में खूब सफल होते हैं. इनके ऊपर ईश्वर की विशेष कृपा भी देखी गई है. इन्हे हमेशा अहंकार से बचाव करना चाहिए. ऐसे लोगों को हमेशा खाने की आदत पर भी ध्यान देना चाहिए. 

कौन सा है बृहस्पति का दूसरा राजयोग: बृहस्पति का दूसरा राजयोग गजकेसरी योग है. अगर बृहस्पति और चन्द्रमा एक दूसरे से केंद्र में हों तो गजकेसरी योग बनता है. यह योग सामान्य व्यक्ति को भी विशेष बना देता है. यह योग कर्क, वृश्चिक और मीन लग्न में विशेष प्रभावशाली होता है. इस योग वाले लोग शासन और राजनीति में विशेष सफल होते हैं. ऐसे लोग जीवन में जिस भी क्षेत्र में जाते हैं, खूब सफल होते हैं. इस योग के होने पर व्यक्ति को शिव जी की उपासना करनी चाहिए. साथ ही अगर संभव हो पीला पुखराज धारण करना चाहिए. 

कौन सा है बृहस्पति का तीसरा राजयोग: बृहस्पति का तीसरा राजयोग केन्द्रस्थ बृहस्पति है. बृहस्पति केंद्र में काफी मजबूत माना जाता है. उसमे भी अगर लग्न में हो तो अत्यधिक शक्तिशाली हो जाता है. यह अकेला कुंडली के तमाम दोषों को नष्ट कर देता है. व्यक्ति की आयु लम्बी कर देता है और ज्ञानी बना देता है. ऐसा बृहस्पति होने पर धर्मस्थानों पर जरूर जाएं. साथ ही अगर नियमित रूप से तिलक लगा सकें तो और भी उत्तम होगा.