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Brihaspati Graha: बृहस्पति दे रहा है विवाह में बाधा... तो जानें क्या करें उपाय?

Brihaspati Graha's Relation with Marriage: ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक बृहस्पति ग्रह को विवाह और वैवाहिक सुख का कारक माना जाता है. यदि कुंडली में गुरु कमजोर या पीड़ित हो तो विवाह में देरी और रिश्ते टूटने जैसी बाधाएं आती हैं. महिलाओं की कुंडली में तो गुरु विवाह का मुख्य ग्रह होता है.

Brihaspati Graha Brihaspati Graha

बृहस्पति को ही गुरु ग्रह कहा जाता है. बृहस्पति किसी महिला के विवाह का सबसे महत्वपूर्ण ग्रह है. बिना बृहस्पति के किसी महिला का विवाह हो ही नहीं सकता. बृहस्पति किसी पुरुष के जीवन में उसके जीवनसाथी के बारे में बताता है. बृहस्पति ही पुरुष के वैवाहिक जीवन को संतुलित करता है. अगर बृहस्पति विवाह में बाधा दे तो विवाह का होना और निभना दोनों चुनौती हो जाता है. बृहस्पति की कुछ स्थितियां व्यक्ति के विवाह के लिए काफी समस्याएं पैदा करती हैं. 

बृहस्पति की पहली स्थिति कौन सी है जो विवाह में करती है बाधा पैदा 
बृहस्पति की पहली स्थिति है-नीच का बृहस्पति. अगर बृहस्पति मकर राशि में हो तो नीच का हो जाता है. ऐसी स्थिति में जिम्मेदारियां बढ़ जाती है और विवाह में विलम्ब होता है. कभी-कभी व्यक्ति के अंदर असंतोष का भाव भी आ जाता है. विवाह के बाद शुरू में वैवाहिक तालमेल में भी दिक्कत आती है. 

उपाय: नित्य प्रातः स्नान और उपासना जरूर करें. चन्दन की सुगंध का नियमित प्रयोग करें. तर्जनी अंगुली में सोने या पीतल का छल्ला धारण करें. एक हल्दी की गांठ पीले धागे बांधकर गले में धारण करें. नीलम या शनि का रत्न बिलकुल धारण न करें. 

बृहस्पति की दूसरी स्थिति कौन सी है जो विवाह में करती है बाधा पैदा 
बृहस्पति की दूसरी स्थिति है- गुरु चांडाल योग. अगर कुंडली में राहु बृहस्पति का योग हो तो इसे गुरु चांडाल योग होता है. यह व्यक्ति को उत्श्रृंखल बना देता है. व्यक्ति गंभीर नहीं होता. विवाह का समय बीतता चला जाता है. विवाह के बाद भी वैवाहिक जीवन में ईमानदारी नहीं रहती. 

उपाय: नित्य प्रातः सूर्य को हल्दी मिलाकर जल अर्पित करें. गायत्री मंत्र का जप अवश्य करें. मांस-मदिरा आदि का सेवन न करें. सलाह लेकर एक पन्ना या मोती धारण करें. दाढ़ी और बाल बड़े न रखें, 

बृहस्पति की तीसरी स्थिति कौन सी है जो विवाह में करती है बाधा 
बृहस्पति की तीसरी स्थिति है- सप्तम भाव में बृहस्पति. बृहस्पति जिस भाव में रहता है, उसका नाश कर देता है. सप्तम स्थान का बृहस्पति विवाह के लिए काफी खराब होता है. विवाह होने में अति विलम्ब होता है. कभी-कभी तो विवाह ही नहीं होता. वैवाहिक जीवन में अहंकार के कारण समस्या पैदा हो जाती है.

उपाय: देर रात तक जगने से बचें. माथे पर या कंठ पर तिलक जरूर लगाएं. गीता के ग्यारहवें अध्याय का पाठ जरूर करें. भूलकर भी पीला पुखराज न पहनें. एक ओपल अवश्य धारण कर लें.