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Chandrama and Rajyog: चन्द्रमा से बनने वाले राजयोग! मिलता है धन-दौलत और मान-सम्मान

चंद्रमा से कई तरह के राजयोग बनते हैं. जब चन्द्रमा से पिछले भाव में कोई ग्रह हो तो अनफा योग बनता है. जब चन्द्रमा से दूसरे भाव में कोई ग्रह हो तो सुनफा योग बनता है. चन्द्रमा से दूसरे और द्वादश भाव में ग्रह हों तो दुरधरा योग बनता है. ये राजयोग बनने से व्यक्ति के जीवन में खूब धन-दौलत मिलता है.

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चंद्रमा से कई तरह के राजयोग बनते हैं. इसमें अनफा योग, सुनफा योग और दुरधरा योग शामिल हैं. ये योग ग्रहों की स्थिति के आधार पर बनते हैं. ये योग बनने से व्यक्ति के जीवन में खूबर धन-दौलत, सफलता और मान-सम्मान मिलता है. चलिए आपको चंद्रमा से बनने वाल राजयोग के बारे में बताते हैं.

अनफा योग और इसका प्रभाव-
जब चन्द्रमा से पिछले भाव में कोई ग्रह हो तो अनफा योग बनता है. लेकिन यह ग्रह सूर्य, राहु या केतु नहीं होना चाहिये. इस योग के होने से व्यक्ति को जीवन में खूब सारी सुख सुविधा मिलती है. व्यक्ति खूब सारी यात्राएँ करता है और अत्यंत व्यवहार कुशल होता है. अनफा योग के होने से व्यक्ति राजनीति में भी सफलता पा जाता है. इस योग के होने पर एक चांदी का कड़ा जरूर धारण करें. घर को ख़ास तौर से शयन कक्ष को साफ सुथरा रखें. घर में फूल और फूलों की सुगंध का प्रयोग करें. 

सुनफा योग और इसका प्रभाव?
जब चन्द्रमा से दूसरे भाव में कोई ग्रह हो तो सुनफा योग बनता है. लेकिन ये ग्रह सूर्य, राहु या केतु नहीं होने चाहिये. सुनफा योग होने से व्यक्ति को शिक्षा में खूब सफलता मिलती है. व्यक्ति अत्यंत धनवान होता है और वाणी से सफलता प्राप्त करता है. सुनफा योग होने से व्यक्ति को प्रशासन के क्षेत्र में खूब सफलता मिलती है. इस योग के होने पर नशे, झूठ बोलने और कर्ज लेने से बचना चाहिए. प्रातः काल सौंफ और मिसरी का सेवन करना चाहिए. नियमित रूप से भगवद्गीता या रामचरितमानस का पाठ करें.

दुरधरा योग और इसका प्रभाव ?
चन्द्रमा से दूसरे और द्वादश भाव में ग्रह हों तो दुरधरा योग बनता है. लेकिन इन ग्रहों में सूर्य, राहु या केतु नहीं होने चाहिए. दुरधरा योग होने पर व्यक्ति जन्म से ही संपन्न और समृद्ध होता है. जीवन में किसी भी प्रकार की समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता. ऐसा योग कभी कभी व्यक्ति को वैराग्य की ओर भी ले जाता है और व्यक्ति धर्मात्मा होता है. इस योग के होने पर धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए और आचरण शुद्ध रखना चाहिए. नियमित रूप से हल्की सुगंध का प्रयोग करना चाहिए. चांदी के पात्र से दूध और जल का सेवन करना चाहिए.

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