जूते-चप्पल का ज्योतिष में काफी महत्व होता है. माना जाता है कि पैरों का सम्बन्ध मीन राशि से होता है. साथ ही इनका संबंध शनि और राहु से भी होता है. ऐसे में अगर पैर में गलत जूता या चप्पल पहन ली जाएं, तो नुकसान उठाना पड़ सकता है. कहते हैं कि जैसे ही आप जूते चप्पलों का प्रयोग करते हैं वैसे ही शनि और राहु सक्रिय हो जाते हैं. इसलिए कभी भी गलत तरीके से जूते चप्पलों का प्रयोग न करें. अन्यथा आपके लिए स्वास्थ्य, यश और धन तीनों की समस्या खड़ी हो सकती है.
जूतों का रंग कितना महत्वपूर्ण होता है?
फैशन में लोग तमाम रंगों रंगों के जूते पहनते हैं. अलग-अलग रंग के जूते अलग-अलग ग्रहो से सम्बन्ध रखते हैं और जूते व चप्पल का शनि और राहु, दोनों का सम्बन्ध है. इसलिए पैरों में काले, भूरे या नीले रंग के जूते ज्यादा अच्छे माने हैं. अगर किसी अन्य रंग का जूता पहनें, तो ये देख लें कि कहीं उस रंग का ग्रह आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण तो नहीं है. भूलकर भी पैरों में पीले रंग के जूते चप्पल न पहनें. इससे अपयश, दरिद्रता और बाधा पैदा होगी.
जूते चप्पल के प्रयोग में किन बातों का रखें ध्यान?
जूते चप्पल जब भी पहनें, हमेशा झाड़कर ही पहनें, अन्यथा व्यर्थ की दौड़ भाग बढ़ेगी. जूते चप्पलों को इधर उधर न फेंके, इससे आप धन की बचत नहीं कर पाएंगे. अगर रोजगार की समस्या हो या करियर में बदलाव चाहते हों तो जूते या चप्पलों का दान करें.
जूते चप्पल के प्रयोग से कैसे दूर होगी दरिद्रता?
शनिवार को एक पुराना जूता या चप्पल ले लें. इसको रात्रि में पहनकर पैदल घर से चौराहे तक जाएं. उसके बाद चौराहे पर जूता या चप्पल निकालकर छोड़ दें. इसके बाद प्रार्थना करें कि आपकी दरिद्रता दूर हो. वहां से सीधे मुड़कर घर वापस आएं, ध्यान रहे कि पीछे मुड़कर बिलकुल न देखें.