ज्योतिष और धोखा
ज्योतिष और धोखा
रिश्ते, दोस्ती, प्यार और कारोबार में भरोसा जरूरी होता है. जब कोई व्यक्ति हमारे भरोसे के खिलाफ काम करता है या हमारी उम्मीदों को तोड़ देता है, तो इसे आम भाषा में धोखा कहा जाता है. ज्योतिष में कुछ ग्रहों और कुंडली के भावों को धोखे की संभावना से जोड़कर देखा जाता है.
ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा, बुध, शनि और राहु का संबंध भरोसे और धोखे से जोड़ा जाता है. कई बार दूसरे ग्रह भी इसमें भूमिका निभा सकते हैं. मान्यता है कि जल तत्व की राशियों वाले लोग अधिक भावुक होने के कारण धोखे को ज्यादा महसूस कर सकते हैं, जबकि पृथ्वी तत्व की राशियों को कई बार धोखा देने की प्रवृत्ति से जोड़ा जाता है.
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार कुंडली का सप्तम भाव कमजोर होने पर कारोबार में परेशानी आ सकती है. अष्टम भाव में पाप ग्रहों की स्थिति भी धोखे की संभावना से जोड़ी जाती है. राहु का सूर्य या चंद्रमा पर प्रभाव हो या बुध कमजोर हो, तो कारोबार में सतर्क रहने की सलाह दी जाती है. साझेदारी में काम करते समय विशेष सावधानी रखें. मान्यता के अनुसार मंगलवार और बुधवार को बड़े लेन-देन से बचने की सलाह दी जाती है. रोज सुबह गणेश जी को दूर्वा चढ़ाना भी एक उपाय माना जाता है.
ज्योतिष में शुक्र को प्रेम और दांपत्य जीवन से जोड़ा जाता है. शुक्र के साथ सूर्य या मंगल का संबंध होने पर रिश्तों में तनाव या धोखे की स्थिति बताई जाती है. सप्तम भाव में चंद्रमा या बृहस्पति की स्थिति और कमजोर बृहस्पति को भी कुछ ज्योतिषीय मत विवाह संबंधी परेशानियों से जोड़ते हैं. पति-पत्नी की कुंडली में ग्रहों की शत्रुता होने पर भी सावधानी की सलाह दी जाती है. रिश्ते में जरूरत से ज्यादा उम्मीदें न रखें. कुछ मान्यताओं में काले और भूरे रंग का कम उपयोग, राधा-कृष्ण को गुलाबी फूल अर्पित करना और धोखे के योग प्रबल होने पर हीरा न पहनने की सलाह दी जाती है.
चंद्रमा, शुक्र या बुध के कमजोर होने को ज्योतिष में दोस्ती में सावधानी से जोड़ा जाता है. ऐसे में कुछ दोस्त केवल अपने फायदे के लिए संबंध बना सकते हैं. मजबूत बृहस्पति वाले लोगों को कभी-कभी जरूरत से ज्यादा भरोसा करने वाला भी माना जाता है. रोज सूर्य देव को जल अर्पित करना, भगवान कृष्ण को पीले फूल चढ़ाना, लोहे का छल्ला पहनना और गार्नेट धारण करना कुछ ज्योतिषीय उपाय माने जाते हैं.