Surya and Chandra Dev
Surya and Chandra Dev
सूर्य पूर्ण रूप से अग्नि तत्व का ग्रह है. इसका एक राशि सिंह के साथ संबंध है. सिंह राशि पूर्ण रूप से अग्नि की राशि है. यह राशि मंगल को भी काफी प्रिय मानी जाती है. इस राशि का प्रभाव जीवन में सूर्य की शक्तियां बढ़ा देता है.
सूर्य की राशि है सिंह: इस राशि को अग्नि तत्व की प्रमुख राशि माना जाता है. इस राशि को नेतृत्व, साहस, संघर्ष और राजनीति की राशि माना जाता है. इस राशि के लोग अक्सर समाज नेतृत्व करते हैं. शरीर की हड्डियों और विद्या के मामले में यह राशि महत्वपूर्ण होती है. इस राशि की सबसे बड़ी कमजोरी अतिविश्वास है. इनको सलाह लेकर एक मूंगा धारण करना चाहिए. इस राशि के लोगों को गायत्री मंत्र का जप करना चाहिए.
क्या है चंद्रमा की राशि की विशेषता: चंद्रमा मुख्य रूप से जल तत्व का ग्रह है. इसका एक राशि कर्क के साथ पूर्ण संबंध है. कर्क राशि शत प्रतिशत जल की राशि है. यह राशि बृहस्पति को अत्यंत प्रिय है. इस राशि का मजबूत प्रभाव चन्द्रमा और बृहस्पति को मजबूत कर देता है.
चंद्रमा की राशि है कर्क: यह बहुत सुन्दर और चंचल राशि है. इस राशि में कल्पना, सौंदर्य, दया और ज्ञान पाया जाता है. यह ह्रदय और भावनाओं की सबसे बड़ी राशि है. इस राशि की सबसे बड़ी समस्या भावुक होना है. इस राशि में वैवाहिक और प्रेम का जीवन अक्सर अच्छा नहीं होता. इनके लिए सलाह लेकर एक ओपल या मोती धारण करना अच्छा रहता है. इनको यथाशक्ति शिव जी की उपासना करनी चाहिए.
सूर्य से बनने वाले शुभ योग: कुंडली में सूर्य के अगले घर में किसी ग्रह के स्थित होने से वेशि योग बनता है लेकिन ये ग्रह चन्द्रमा, राहु या केतु नहीं होने चाहिए. साथ ही सूर्य भी कमजोर न हो और पाप ग्रहों से युक्त न हो तभी जाकर वेशि योग का लाभ मिलता है. इस योग के होने पर व्यक्ति अच्छा वक्ता और धनवान होता है. ऐसे लोगों का शुरुआती समय काफी कठिनाई में व्यतित होता है लेकिन आगे चलकर ये लोग खूब धन-संपत्ति और यश अर्जित करते हैं. ऐसे लोगों को अपने खान-पान का ध्यान रखना चाहिए.
सूर्य का दूसरा शुभ योग: सूर्य के पिछले घर में किसी ग्रह के होने पर वाशि योग बन जाता है लेकिन ये ग्रह चन्द्र राहु या केतु नहीं होने चाहिए. सूर्य को भी पापक्रान्त नहीं होना चाहिए तभी जाकर यह योग शुभ फल दे पाएगा. यह योग व्यक्ति को बुद्धिमान, ज्ञानी और धनवान बनाता है. इसके कारण व्यक्ति बहुत शान से रहता है. इस योग के कारण व्यक्ति बहुत सारी विदेश यात्राएं करता है. इस योग के कारण व्यक्ति घर से दूर जाकर खूब सफलता पाता है. इस योग के होने पर सूर्य को जल जरूर चढ़ाएं.
सूर्य का तीसरा शुभ योग: सूर्य के पहले और पिछले, दोनों भाव में ग्रह हों तो उभयचारी योग बनता है लेकिन ये ग्रह चन्द्र, राहु या केतु नहीं होने चाहिए. तब यह शुभ योग फलीभूत होता है. इस योग के होने पर व्यक्ति बहुत छोटी जगह से बहुत ऊंचाई तक पंहुचता है. इसके कारण व्यक्ति अपने क्षेत्र में बहुत प्रसिद्धि प्राप्त करता है. इस योग के कारण व्यक्ति हर समस्या से बाहर निकल जाता है. इसके कारण व्यक्ति को राजनीति और प्रशासन में बड़े पद मिल जाते हैं. इस योग के होने पर रविवार का उपवास जरूर रखें.