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Shani Sade Sati and Dhaiya: क्या होती है शनि की साढ़ेसाती और ढैया, जानें कैसे होगा इसका प्रभाव कम?

हिंदू धर्म में शनि देव को कर्मफलदाता और न्याय का देवता माना जाता है. आज हम आपको बता रहे हैं कि शनि की साढ़ेसाती और ढैया क्या होती है और इसका दुष्प्रभाव क्या होता है. हम आपको यह भी बताएंगे कि साढ़ेसाती और ढैया के दुष्प्रभाव को कैसे कम कर सकते हैं?

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Shani Dev Shani Dev

शनि हर राशि पर भ्रमण के दौरान एक विशेष तरह का प्रभाव डालता है. जब यह प्रभाव किसी राशि के ऊपर शनि की विशेष स्थितियों के कारण पड़ता है तो इसको साढ़ेसाती कहते हैं. शनि जब भी किसी राशि से बारहवें भाव में रहता है, उसी राशि में रहता है या उस राशि से दूसरे रहता है तो उस राशि पर साढ़ेसाती चलने लगती है. शनि एक राशि पर ढाई वर्ष रहता है और एक साथ तीन बार किसी राशि को प्रभावित करता है. ढाई ढाई वर्षों का तीन चरण साढ़ेसात साल तक साढ़ेसाती के रूप में चलता है. 

क्या है शनि की ढैया? 
राशियों पर भ्रमण के दौरान जब शनि किसी राशि से चतुर्थ भाव या अष्टम भाव में आता है तो इसको शनि की ढैया कहा जाता है. यह शनि के एक राशि पर भ्रमण के दौरान ही रहता है यानी कि ढाई साल तक, इसीलिए इसको ढैया कहा जाता है. राशि से सप्तम भाव में शनि के आने पर भी ढैया जैसी स्थिति बन जाती है. 

साढ़ेसाती का सामान्य रूप से क्या प्रभाव पड़ता है? 
लोगों का मानना है कि साढ़ेसाती हमेशा बुरा फल देती है लेकिन ऐसा बिल्कुल भी आवश्यक नहीं है. सबसे पहले देखना होगा कि आपकी व्यक्तिगत दशा क्या है. इसके बाद कुंडली में शनि की स्थिति देखनी होगी. तब जाकर यह समझा जा सकता है कि साढ़ेसाती या ढैया का फल बुरा होगा या अच्छा. आम तौर पर अगर शनि अच्छा है तो साढ़ेसाती अच्छे परिणाम देती है. अगर शनि प्रतिकूल है तो साढ़ेसाती या ढैया में समस्या होती है. वैसे साढ़ेसाती या ढैया शुरू हो तो लाभकारी होती है और खत्म हो तो समस्या होती है.

शनि की साढ़ेसाती और ढैया के विशेष प्रभाव क्या है? 
शनि की साढ़ेसाती और ढैया चलने के दौरान अलग फल देती है और उतरने के दौरान अलग. इस समय कुंभ, मीन और मेष राशि पर साढ़ेसाती चल रही है. इसमें भी कुंभ राशि पर से साढ़ेसाती उतर रही है. इस समय सिंह और धनु राशि पर ढैया है. साढ़ेसाती के दौरान रिश्तों की समस्या जरूर होती है. उसमें भी वैवाहिक जीवन में सबसे ज्यादा समस्या होती है. इस समय में माता या पिता के निधन के योग भी होते हैं. खास तौर से साढ़ेसाती के उतरने के समय. 

साढ़ेसाती या ढैया का परिणाम अशुभ हो तो क्या उपाय करें? 
शनिवार को पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं. नित्य सायं शनि मंत्र ॐ शं शनैश्चराय नमः का जाप करें. यदि कष्ट ज्यादा हो तो शनिवार को छाया दान भी करें.