Why does jealousy arise
Why does jealousy arise
ईर्ष्या मुख्य रूप से असुरक्षा, कम आत्मविश्वास, तुलना करने की आदत और किसी के पास वह चीज न होने पर पैदा होती है, जो दूसरों के पास है.यह दूसरों की सफलता या खुशी से जलन, डर और अपनी क्षमताओं पर संदेह के कारण विकसित होती है, जो रिश्तों और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकती है. डली में चंद्रमा और बुध की स्थिति ईर्ष्या के बारे में बताती है. इसके अलावा चतुर्थ और सप्तम भाव से भी ईर्ष्या का संबंध होता है. चंद्रमा दूषित हो तो ईर्ष्या का जन्म होता है. यह ईर्ष्या खुद को नुकसान पंहुचाती है. बुध की गड़बड़ी से ईर्ष्या के साथ खराब विचार का जन्म होता है. इस ईर्ष्या में व्यक्ति दूसरे को नुकसान पंहुचाता है. शनि ईर्ष्या को टिकाए रखता है और बृहस्पति ईर्ष्या को नष्ट कर देता है.
ईर्ष्या के प्रमुख कारण
असुरक्षा: जब व्यक्ति खुद को दूसरों से कमतर महसूस करता है.
तुलना: दूसरों की उपलब्धियों, भौतिक वस्तुओं या संबंधों से लगातार तुलना करना.
डर: महत्वपूर्ण रिश्तों या चीजों को खोने का डर.
असफलता की भावना: अपनी मेहनत या आकांक्षाओं के पूरे न होने पर दूसरों को सफल होते देखना.
जागरूकता में कमी: अपनी खुशी के लिए खुद पर ध्यान केंद्रित न करके दूसरों के जीवन में उलझना.
ईर्ष्या करने के क्या होते हैं परिणाम?
यदि आप अधिक ईर्ष्या पालते हैं तो कुंडली का चंद्रमा और खराब होता है. मानसिक समस्याएं परेशान करती हैं. बुध और भी ज्यादा कमजोर होता है . इससे व्यक्ति भ्रम का शिकार होकर गलतियां करता है. ईर्ष्या करने वाले लोग अपयश के भागी होते हैं और कुछ न कुछ स्वास्थ्य की समस्याएं लगी रहती हैं.
ईर्ष्या की प्रवृत्ति होने पर क्या उपाय करें?
रोज स्नान करें, हल्की सुगंध लगाएं. नित्य प्रातः और सायं शिव जी की उपासना करें. नमः शिवाय का यथाशक्ति जप करें. गले में एक तुलसी की माला अवश्य धारण करें. अग्नि तत्व के रत्न धारण न करें. मन में ईर्ष्या होने पर शिव-शिव कहें.