Rahu Graha
Rahu Graha
हिंदू शास्त्रों के अनुसार राहु सूर्य या चंद्रमा को निगलते हुए ग्रहण को उत्पन्न करता है. राहु तमस असुर है. राहु काल को अशुभ माना जाता है. राहु राक्षसी सांप का मुखिया है. ज्योतिष के अनुसार हर ग्रह का हमारे जीवन पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है. यहां आप जान सकते हैं राहु् ग्रह का हमारे जीवन पर क्या पड़ता है शुभ और अशुभ प्रभाव?
राहु का प्रभाव व्यक्ति के स्वभाव पर कैसे पड़ता है?
राहु के प्रभाव वाले व्यक्ति आम तौर पर चालाक होते हैं. जूठ बोलने में तेज होते हैं, जरा से स्वार्थ के लिए असत्य का रास्ता पकड़ लेते हैं. इनकी युवावस्था संघर्ष में बीतती है. कुछ भी खाते-पीते हैं, आहार का ख्याल नहीं रखते. इनको आम तौर पर विचित्र तरह की बीमारियां हो जाती हैं.
राहु का प्रभाव व्यक्ति के काम और रोजगार पर कैसा पड़ता है?
ये आम तौर पर चमड़े, शराब, नशीले पदार्थ और कभी-कभी इलेक्ट्रोनिक्स का व्यवसाय करते हैं. इनका झुकाव अचानक धन कमाने की तरफ होता है. ये आम तौर पर शेयर बाजार, सट्टा-लाटरी और राजनीति में भी दिख जाते हैं. काम और रोजगार कितना भी अच्छा क्यों न हो, इनको जीवन में लगातार उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है.
राहु का प्रभाव पारिवारिक जीवन पर किस प्रकार पड़ता है?
पारिवारिक जीवन अच्छा नहीं होता. अक्सर विवाह तनाव का कारण बनता है. एक से ज्यादा विवाह होने की सम्भावना होती है. विवाहेत्तर सम्बन्ध भी हो जाते हैं. पारिवारिक संपत्ति या तो नहीं मिलती या मुकदमों में फंस जाती है. संतान उत्पत्ति में देरी होती है. एक संतान समस्या का कारण बनती है.
राहु के प्रभाव से किस तरह की होती हैं बीमारियां
त्वचा और मुंह के गंभीर रोग होने की सम्भावना होती है. कोई भी ऐसी बीमारी जो पकड़ में न आ रही हो. मूत्र रोग और कल्पना की बीमारियां हो जाती हैं.
राहु का शुभ प्रभाव जीवन पर कैसे असर डालता है?
व्यक्ति को नाम और यश खूब मिलता है. व्यक्ति घर से दूर जाकर उन्नति करता है. मध्यायु के बाद व्यक्ति को राजनैतिक सफलता मिलती है. अगर चन्द्रमा कमजोर हो तो व्यक्ति के मन में वैराग्य पैदा होता है. व्यक्ति ईश्वर की उपलब्धि की ओर जाता है और मुक्ति मोक्ष के लिए प्रयास करता है. व्यक्ति को समस्या कितनी भी क्यों न आए, कोई भी उसका कुछ बिगाड़ नहीं पाता. अगर इनको सही रास्ता मिले तो ऐसे लोग समाज को नयी दिशा देते हैं.
राहु के अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय
नशीले पदार्थ और उलटी सीधी चीजें खाना छोड़ दें. प्रातः काल खाली पेट तुलसी के पत्ते खाएं. सोना और चांदी मिश्रित अंगूठी जरूर पहन लें. गायत्री मंत्र या ईष्ट मन्त्र का नियमित जाप करें. मस्तक पर चन्दन जरूर लगाएं.