चंद्रमा और उसके योग
चंद्रमा और उसके योग
ज्योतिष में चंद्रमा को मन, सोच और भावनाओं से जोड़कर देखा जाता है. माना जाता है कि चंद्रमा का असर व्यक्ति के स्वभाव और उसके जीवन के कई फैसलों पर पड़ता है. यही वजह है कि कुंडली में चंद्रमा की स्थिति को काफी खास माना जाता है. चंद्रमा से बनने वाले कुछ योग व्यक्ति के जीवन में सुख, धन, सफलता और मान-सम्मान से जुड़े माने जाते हैं.
ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा से अनफा योग, सुनफा योग और दुरधरा योग बनते हैं. मान्यता है कि कुंडली में इनमें से कोई एक योग भी हो तो व्यक्ति को कई क्षेत्रों में अच्छे परिणाम मिल सकते हैं. वहीं, तीनों योग एक साथ होने पर इसे विशेष स्थिति माना जाता है.
जब कुंडली में चंद्रमा से पिछले भाव यानी 12वें भाव में सूर्य के अलावा कोई ग्रह मौजूद हो, तो अनफा योग बनने की मान्यता है. अगर वहां सूर्य हो तो यह योग नहीं माना जाता.
ज्योतिष में अनफा योग को सुख-सुविधा और अच्छे व्यक्तित्व से जोड़कर देखा जाता है. माना जाता है कि इस योग वाला व्यक्ति व्यवहार कुशल होता है और उसे घूमने-फिरने के कई अवसर मिल सकते हैं. ऐसे लोगों को राजनीति और सामाजिक क्षेत्र में भी सफलता मिलने की संभावना बताई जाती है.
जब चंद्रमा से दूसरे भाव में सूर्य को छोड़कर कोई ग्रह मौजूद हो, तो सुनफा योग बनता है. दूसरे भाव का संबंध धन, वाणी और परिवार से माना जाता है. इसलिए इस योग को आर्थिक स्थिति और बोलने की कला से जोड़कर देखा जाता है.
मान्यता है कि सुनफा योग वाला व्यक्ति पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन कर सकता है. उसकी वाणी प्रभावशाली हो सकती है और उसे धन कमाने के अच्छे अवसर मिल सकते हैं. प्रशासन और जिम्मेदारी वाले कामों में भी सफलता मिलने की संभावना बताई जाती है.
जब चंद्रमा से 12वें और दूसरे दोनों भावों में सूर्य के अलावा ग्रह मौजूद हों, तो दुरधरा योग बनने की मान्यता है. इसे चंद्रमा से बनने वाले खास शुभ योगों में गिना जाता है.
ज्योतिष के अनुसार इस योग से व्यक्ति को जीवन में सुख, सुविधा और धन की प्राप्ति हो सकती है. ऐसे व्यक्ति को कई तरह के अच्छे अवसर मिल सकते हैं. कुछ मामलों में यह योग व्यक्ति को धर्म, आध्यात्म और वैराग्य की ओर भी आकर्षित कर सकता है.