Rahu-ketu
Rahu-ketu
ज्योतिष और पौराणिक कथाओं में नौ ग्रह गिने जाते हैं, सूर्य, चंद्रमा, बुध, शुक्र, मंगल, गुरु, शनि, राहु और केतु. राहु तमस असुर है. राहु काल को अशुभ माना जाता है. राहु, राक्षसी सांप का मुखिया है. शास्त्रों के अनुसार राहु सूर्य या चंद्रमा को निगलते हुए ग्रहण को उत्पन्न करता है. आइए जानते हैं राहु का अन्य ग्रहों के साथ कैसा संबंध है और इसका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
1. राहु और सूर्य का संबंध: यह ग्रहण योग कहा जाता है. इससे स्वास्थ्य, विशेषतः आंखें कमजोर होती हैं. साथ ही अपयश की संभावना बन जाती है. इस सम्बन्ध के होने पर सूर्य को जल अवश्य अर्पित करें.
2. राहु और चंद्रमा का संबंध: यह भी ग्रहण योग कहा जाता है. इससे मानसिक कमजोरी पैदा होती है. मन की स्थितियों में बार-बार उतार-चढ़ाव होता रहता है. इस सम्बन्ध के होने पर शिव जी की उपासना अवश्य करें.
3. राहु और मंगल का संबंध: यह अंगारक योग कहा जाता है. इसके होने से विस्फोट और दुर्घटनाओं जैसी स्थितियां बन जाती हैं. यह व्यक्ति का स्वभाव भी खराब कर देता है. इस सम्बन्ध के होने पर हनुमान जी की उपासना करें.
4. राहु और बुध का संबंध: यह योग वाणी और बुद्धि की समस्या पैदा कर देता है. इसके कारण कभी-कभी त्वचा की समस्या भी हो जाती है. इस सम्बन्ध के होने पर तुलसी का प्रयोग करें. सूर्य को जल अर्पित करें.
5. राहु और बृहस्पति का संबंध: यह योग गुरु चांडाल योग कहा जाता है. इसके कारण जीवन में नकारात्मकता छा जाती है. इसके कारण वैवाहिक जीवन काफी ज्यादा खराब हो जाता है. इस सम्बन्ध के होने पर सन्मार्ग पर चलें. भगवदगीता का पाठ करें.
6. राहु और शुक्र का संबंध: यह योग चरित्र दोष पैदा करता है. कभी-कभी कम उम्र में ही भटकाव भी दे देता है. इस योग के कारण कभी-कभी लांछन भी लग जाता है. इस सम्बन्ध के होने पर शिव जी की उपासना करना लाभकारी होगा.
7. राहु और शनि का संबंध: इसको नंदी योग कहा जाता है. यह जीवन में उतार-चढ़ाव पैदा करता है. यह करियर में काफी समस्याएं दे देता है. इस योग के होने पर शनिदेव की पूजा करें. साथ ही एक लोहे का छल्ला धारण करें.
शनि और राहु का योग
शनि और राहु का योग शनि का सबसे नकारात्मक योग माना जाता है. यह कुंडली में तब बनता है, जब शनि का संबंध राहु से बन जाए. इसको नंदी योग और पिशाच योग कहा जाता है. पंडित शैलेंद्र पांडेय ने बताया कि यह योग शनि का नकारात्मक योग है, जो जीवन को बुरी तरह छिन्न-भिन्न कर देता है. यह जीवन के लगभग हर क्षेत्र पर बुरा असर डालता है. आम तौर पर यह कुंडली में पूर्व जन्म के संस्कारों के कारण उत्पन्न होता है.
शनि-राहु के योग का जीवन पर कैसा पड़ता है प्रभाव
व्यक्ति जीवन में अज्ञात बाधाओं से जूझता रहता है. व्यक्ति को नशे की खूब आदत होती है. व्यक्ति की वाणी कर्कश और स्वभाव रूखा होता है. व्यक्ति को जीवन में अक्सर अकेले रहना पड़ता है. व्यक्ति को विचित्र तरह की रहस्यमयी बीमारियां हो जाती हैं. व्यक्ति तंत्र मंत्र, जादू टोना और छुद्र विद्याओं की ओर झुक जाता जाता है.
शनि-राहु के योग के क्या हैं विशेष प्रभाव
ऐसा योग होने पर व्यक्ति के पास रहस्यमयी शक्तियां आ सकती हैं. ऐसे योग से व्यक्ति की अतीन्द्रीय क्षमता (इनट्यूटिव पॉवर) बढ़ जाती है. ये लोग तंत्र मन्त्र के माहिर हो सकते हैं. इनकी नकारात्मक वाणी अक्सर सत्य हो जाती है. इनके नकारात्मक कार्य सफल होते हैं.