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Investment In SIP: एसआईपी में किया है इंवेस्ट, तो जानें कितना बनेगा फंड... 10-15-20 सालों में?

एसआईपी आज के समय में निवेश का एक अच्छा ऑप्शन है. लेकिन लोगों की सोच होती है कि जल्द से जल्द पैसा डबल हो जाए. पर एसआईपी में निवेश मार्केट में कितने समय रहता है. यह एक जरूरी फैक्टर है.

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अक्सर लोगों को लगता है कि निवेश करने के लिए बड़ी रकम की जरूरत होती है, लेकिन सच यह है कि छोटी-छोटी बचत भी समय के साथ बड़ी पूंजी में बदल सकती है. अगर आप हर महीने सिर्फ ₹5,000 की एसआईपी (Systematic Investment Plan) शुरू करते हैं और लंबे समय तक निवेश जारी रखते हैं, तो कंपाउंडिंग की ताकत आपके पैसे को कई गुना बढ़ा सकती है.

SIP में समय का सबसे बड़ा रोल

निवेश की दुनिया में सिर्फ पैसा ही नहीं, बल्कि समय भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है. जितना लंबा समय आपका पैसा बाजार में निवेशित रहता है, उतना ही अधिक फायदा कंपाउंडिंग का मिलता है. यही वजह है कि वित्तीय विशेषज्ञ जल्दी निवेश शुरू करने की सलाह देते हैं.

10 साल तक निवेश?

मान लीजिए आप हर महीने ₹5,000 की एसआईपी करते हैं और आपको औसतन 12% सालाना रिटर्न मिलता है. ऐसे में 10 साल के दौरान आपकी कुल निवेश राशि ₹6 लाख होगी. हालांकि कंपाउंडिंग के प्रभाव से यह रकम बढ़कर लगभग ₹11.20 लाख तक पहुंच सकती है. यानी आपके निवेश का मूल्य लगभग दोगुना हो सकता है.

15 साल में दिखेगा कंपाउंडिंग का असर

अगर आप निवेश की अवधि को बढ़ाकर 15 साल कर देते हैं, तो आपकी कुल जमा राशि ₹9 लाख होगी. लेकिन 12% के अनुमानित वार्षिक रिटर्न के साथ यह रकम लगभग ₹23.79 लाख तक पहुंच सकती है. इसका मतलब है कि आपकी पूंजी ढाई गुना से भी ज्यादा बढ़ सकती है.

20 साल में बन सकता है बड़ा फंड

लंबी अवधि के निवेश में कंपाउंडिंग का जादू सबसे ज्यादा दिखाई देता है. यदि आप लगातार 20 साल तक हर महीने ₹5,000 निवेश करते हैं, तो आपकी कुल निवेश राशि ₹12 लाख होगी. लेकिन 12% सालाना रिटर्न के आधार पर यह फंड बढ़कर करीब ₹45.99 लाख तक पहुंच सकता है. यानी आपके द्वारा लगाए गए पैसे का मूल्य लगभग चार गुना हो सकता है.

क्यों जरूरी है नियमित निवेश?

एसआईपी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें आपको एकमुश्त बड़ी रकम लगाने की जरूरत नहीं होती. आप अपनी आय के अनुसार छोटी राशि से शुरुआत कर सकते हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि निवेश को बीच में रोके बिना नियमित रूप से जारी रखा जाए.

नोट: निवेश पर मिलने वाला रिटर्न बाजार की स्थितियों पर निर्भर करता है. पिछले प्रदर्शन के आधार पर भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं दी जा सकती.