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8th Pay Commission: अगर फिटमेंट फैक्टर 2.0 लागू हुआ... तो कितनी होगी नई बेसिक सैलरी, कितना बनेगा आपका नया HRA

सरकारी कर्मचारियों को 8वें वेतन आयोग का इंतजार है. फिटमेंट फैक्टर को लेकर वह काफी उत्साहित हैं, कि आखिर वह कितना रखा जाएगा. इसकी वजह है कि इसके आधार पर उनकी नई बेसिक वेतन तय होगा.

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8th Central Pay Commission 8th Central Pay Commission

केंद्रीय सरकारी कर्मचारी 8वें वेतन आयोग का इंतजार कर रहे हैं. कर्मचारियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि नए वेतन आयोग के लागू होने पर उनकी सैलरी कितनी बढ़ेगी. चर्चा है कि अगर फिटमेंट फैक्टर 2.0 तय होता है, तो बेसिक सैलरी दोगुनी हो सकती है. लेकिन क्या इससे ग्रॉस सैलरी भी डबल हो जाएगी? चलिए पूरा मामला आसान भाषा में समझाते हैं.

क्या होता है फिटमेंट फैक्टर?

फिटमेंट फैक्टर वह संख्या है, जिससे मौजूदा बेसिक सैलरी को मल्टिप्लाय करके नई बेसिक सैलरी निकाली जाती है. जैसे अगर किसी कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी 21,700 रुपये है और फिटमेंट फैक्टर 2.0 लागू होता है, तो नई बेसिक सैलरी 43,400 रुपये हो सकती है. वहीं, 18,000 रुपये की बेसिक सैलरी के बेसिस पर यह रकम 36,000 रुपये होगी. 

HRA और DA के साथ कैसे निकालें सैलरी?

मान लीजिए कि एक केंद्रीय कर्मचारी की बेसिक सैलरी 21,700 रुपये है. वह ऐसे शहर में काम करता है, जहां HRA की दर 30 फीसदी है. अगर महंगाई भत्ता यानी DA 60 फीसदी माना जाए, तो उसकी ग्रॉस सैलरी का हिसाब इस तरह होगा.

बेसिक सैलरी 21,700 रुपये, DA 13,020 रुपये और HRA 6,510 रुपये होगा. इन तीनों को जोड़ने पर कुल ग्रॉस सैलरी 41,230 रुपये बनती है. इसमें ट्रांसपोर्ट अलाउंस और दूसरे भत्ते शामिल नहीं हैं.

क्या बेसिक सैलरी डबल होने पर डबल होंगे सभी भत्ते?

नया वेतन आयोग लागू होने पर महंगाई भत्ते यानी DA को नई बेसिक सैलरी में शामिल करके इसकी गणना फिर से शुरू की जा सकती है. ऐसी स्थिति में DA शून्य से शुरू हो सकता है. इसलिए पुरानी बेसिक सैलरी के दोगुना होने का मतलब यह नहीं है कि पुरानी सैलरी के सभी भत्ते भी उसी तरह जुड़ेंगे.

HRA यानी मकान किराया भत्ता भी नई बेसिक सैलरी और सरकार की तय दरों के आधार पर निकाला जाएगा. ट्रांसपोर्ट अलाउंस में भी बदलाव हो सकता है. इसलिए कुल सैलरी में कितनी बढ़ोतरी होगी, यह नए नियमों पर निर्भर करेगा.

7वें वेतन आयोग में कैसे बदला था HRA?

7वें वेतन आयोग के बाद साल 2017 में HRA की दरें शहरों के हिसाब से तय की गई थीं. शुरुआत में X कैटेगरी के शहरों में 24 फीसदी, Y कैटेगरी में 16 फीसदी और Z कैटेगरी में 8 फीसदी HRA मिलता था. बाद में DA बढ़ने के साथ इन दरों को 30 फीसदी, 20 फीसदी और 10 फीसदी तक किया गया.

क्या सच में डबल हो जाएगी सैलरी?

फिलहाल 8वें वेतन आयोग के फिटमेंट फैक्टर और नए वेतन ढांचे पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है. इसलिए 2.0 फिटमेंट फैक्टर से जुड़ी गणनाओं को अनुमान के तौर पर ही देखना चाहिए. साथ ही, ग्रॉस सैलरी और इन-हैंड सैलरी अलग होती हैं. टैक्स, पेंशन योगदान और दूसरी कटौतियों के बाद मिलने वाली रकम ही कर्मचारी की इन-हैंड सैलरी होती है.