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Gen Z का ‘सेल्फ-केयर खर्च’ या फिजूलखर्ची? 22 साल की लड़की के बजट ने Millennials को कर दिया हैरान

आज के समय में Gen Z और Millennials के बीच सोच और लाइफस्टाइल को लेकर बहस आम हो गई है. हाल ही में बेंगलुरु की 22 साल की श्राधा सैनी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसने इस बहस को फिर से हवा दे दी है.

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आज के समय में Gen Z और Millennials के बीच सोच और लाइफस्टाइल को लेकर बहस आम हो गई है. हाल ही में बेंगलुरु की 22 साल की श्राधा सैनी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसने इस बहस को फिर से हवा दे दी है. इस वीडियो में श्राधा ने अपने महीने के खर्च के बारे में खुलकर बताया. जिसके बाल लोगों के तो होश ही उड़ गए. चलिए आपको बताते हैं कि आखिर मामला क्या है.

दरअसल, श्राधा जो अकेले रहती हैं, उन्होंने बताया कि वह अपनी जिंदगी में सेल्फ केयर और मेंटल हेल्थ को प्रायोरिटी देती हैं. उन्होंने अपने छोटे-छोटे शौकों से शुरुआत करते हुए बताया कि वह महीने में 2 से 3 बार अपने लिए फूल खरीदती हैं, जिस पर लगभग 2,000 रुपये खर्च होते हैं. श्राधा ने अपने खर्च का सबसे अहम हिस्सा थेरेपी को बताया. उन्होंने कहा कि मेंटल हेल्थ बेहद जरूरी है और इसके लिए वह हर महीने लगभग 10,000 रुपये खर्च करती हैं. उनका मानना है कि यह खर्च नहीं, बल्कि खुद में निवेश है.

वीकेंड और सेल्फ-केयर रूटीन
उन्होंने बताया कि वह हर रविवार को ब्रंच के लिए बाहर जाती हैं, जिस पर महीने में करीब 2,000 रुपये खर्च होते हैं. इसके अलावा, उनके वीकेंड का समय आराम और खुद को तरोताजा करने में बीतता है. ग्रूमिंग और रिलैक्सेशन के लिए वह मसाज, पेडीक्योर और नेल अपॉइंटमेंट्स पर भी हर महीने अच्छी-खासी रकम खर्च करती हैं.

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
इस वीडियो को एक मिलियन से ज्यादा बार देखा जा चुका है और इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. कुछ लोगों ने उनकी पारदर्शिता और सेल्फ केयर पर ध्यान देने की सराहना की, तो वहीं कई लोगों ने इसे फिजूलखर्ची बताया.

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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Millennials का नजरिया
कई Millennials ने इस पर अपनी राय रखते हुए कहा कि वे भी खुद पर खर्च करते हैं, लेकिन ज्यादा संतुलित तरीके से. उनका मानना है कि जिम्मेदारियों के चलते उन्हें खर्च और बचत के बीच संतुलन बनाकर चलना पड़ता है. यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि बदलते समय के साथ खर्च करने की सोच भी बदल रही है. जहां एक पीढ़ी इसे खुद में निवेश मानती है, वहीं दूसरी इसे जरूरत से ज्यादा खर्च समझती है.

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