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BRICS Summit 2026: क्या है ब्रिक्स, कैसे हुआ इसका गठन, भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह संगठन?

BRICS: ब्रिक्स के 18वें शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता भारत कर रहा है. BRICS समिट 2026 का आयोजन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाला है. आइए जानते हैं आखिर क्या है ब्रिक्स, कैसे हुआ इसका गठन और भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण यह संगठन है? 

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भारत ब्रिक्स (BRICS) के 18वें शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करने के लिए तैयार है. BRICS समिट 2026 का आयोजन 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाला है. इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की एक बार फिर मुलाकात होने की संभावना है. आइए जानते हैं आखिर क्या है ब्रिक्स, कैसे हुआ इसका गठन और भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण यह संगठन है? 

क्या है ब्रिक्स
दुनिया की 5 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के एक संगठन का नाम ब्रिक्स है. साल में 2001 अर्थशास्त्री जिम ओ नील ने ब्रिक की अवधरणा रखी थी. शुरू में इस संगठन में 4 देश ब्राजील, रूस, भारत और चीन शामिल थे और उस समय इस संगठन का नाम ब्रिक (BRIC) था. साल 2010 में इस संगठन में साउथ अफ्रीका भी शामिल हो गया, जिसके बाद यह संगठन ब्रिक्स (BRICS) के नाम से जाना जाने लगा.

साल 2010 के बाद 2024 और 2025 में भी ब्रिक्स का विस्तार हुआ. साल में सऊदी अरब, ईरान, मिस्त्र, इथोपिया और UAE ब्रिक्स के पूर्ण सदस्य बनाए गए. इसके बाद साल 2025 में इंडोनेशिया भी ब्रिक्स का पूर्ण सदस्य बन गया. इस तरह से अभी ब्रिक्स में कुल 11 पूर्ण सदस्य देश हैं. इसके साथ सदस्य देशों की संख्या भी बढ़ी है. थाईलैंड, मलेशिया, नाइजीरिया, बेलारूस, बोलिविया, कजाखस्तान, क्यूबा, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम सदस्य देश के तौर ब्रिक्स के साथ जुड़े हैं. 

पहली बार कब हुआ था ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और इस साल क्या है थीम  
आपको मालूम हो कि ब्रिक्स शिखर सम्मलेन की अध्यक्षता हर साल इसके सदस्य राष्ट्रों की ओर से की जाती है. पांचों सदस्य देश हर साल बदल-बदलकर इस सम्मेलन की मेजबानी करते हैं. साल 2009 में पहला ब्रिक्स शिखर सम्मेलन रूस के येकाटिनबर्ग में आयोजित किया गया था.

अभी तक कुल 17 ब्रिक्स शिखर सम्मेलन हो चुका है. अब इसका 18वां शिखर सम्मेलन भारत में होने जा रहा है. आपको मालूम हो कि भारत ने साल 2012, 2016 और 2021 में भी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता की थी. अब भारत चौथी बार ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करने जा रहा है. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हर साल एक थीम होती है. इस साल ब्रिक्स सम्मेलन की आधिकारिक थीम 'बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी' है.

क्या है BRICS का उद्देश्य 

  • BRICS का पहला उद्देश्य राजनीतिक और सुरक्षा है. इसके तहत ब्रिक्स में शामिल देशों में वैश्विक, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक राजनीतिक क्षेत्रों में संवाद बढ़ाना है. 
  • BRICS का दूसरा उद्देश्य आर्थिक और वित्तिय है. इसके मुताबिक व्यापार, कृषि और बुनियादी ढांचे सहित अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना है.
  • BRICS का अन्य उद्देश्य सांस्कृतिक, शैक्षणिक, युवा और खेल क्षेत्र में ब्रिक्स में शामिल देश के लोगों के संपर्क को मजबूत करना है. 
  • भारत, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील का मकसद ब्रिक्स के जरिए विकसित देशों के मुकाबले विकासशील देशों को ज्यादा प्राथमिकता दिलाना है. 

ब्रिक्स सम्मेलन 2026 में क्या रहेंगे प्रमुख मुद्दे
1. अमेरिका-इजराइल की ओर से ईरान के खिलाफ छेड़ी गई जंग.
2. पश्चिम एशिया संघर्ष के चलते व्यापार और जलमार्ग बाधाएं.
3. विकासशील देशों को ऊर्जा आपूर्ति की समस्या.
4. रूस-यूक्रेन जंग, ट्रंप के मनमाने आयात शुल्कों का मुकाबला.
5. ब्रिक्स में एक-दूसरे की मुद्राओं में लेन-देन की का विस्तार.

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ब्रिक्स  
ब्रिक्स एक ऐसा समूह है जो दुनिया की 45 प्रतिशत आबादी, दुनिया के 33% भूभाग और दुनिया की 28% अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करता है. भारत ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है. ब्रिक्स भारत के लिए सिर्फ उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक आर्थिक मंच ही नहीं है बल्कि यह एक ऐसा मंच है, जहां भारत चीन और रूस के साथ एक ही मेज पर बैठता है. भारत ब्रिक्स की वजह से यूएस, यूरोप, जापान, ऑस्ट्रेलिया और दूसरे देशों के साथ अपनी पार्टनरशिप को छोड़े बिना चीन और रूस के साथ भी जुड़ सकता है.

भारत ब्रिक्स के जरिए विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज को मजबूत करने की कोशिश करता है. भारत ब्रिक्स के मंच से उन देशों की भी आवाज उठाता है, जिन्हें महाशक्तियों के बीच कम तवज्जो मिलती है या जो देश अमेरिका और रूस-चीन के ध्रुव से अलग रह कर गुट निरपेक्ष रहने को प्राथमिकता देते हैं. ब्रिक्स के देश लगातार संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक, आईएमएम में सुधार की मांग करते रहे हैं. भारत के लिए ब्रिक्स सीमा-पार आतंकवाद के मुद्दे को उठाने का भी एक मंच है.