Health Insurance
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आज के समय में कई लोगों के पास दो हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी होती हैं. कुछ लोगों को नौकरी के जरिए स्वास्थ्य बीमा मिलता है, जबकि वे अपने परिवार की सुरक्षा के लिए अलग से भी पॉलिसी खरीदते हैं. लेकिन क्या एक ही अस्पताल के बिल के लिए दोनों पॉलिसी से क्लेम किया जा सकता है? हां, ऐसा संभव है. इसका जबाव है हां है, लेकिन इसके लिए बीमा कंपनियों के नियमों का पालन करना जरूरी है. छोटी सी गलती से आपका क्लेम अटक सकता है या खारिज भी हो सकता है.
अगर आपके पास दो हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी हैं, तो आप एक ही बार अस्पताल में भर्ती होने के खर्च के लिए दोनों का इस्तेमाल कर सकते हैं. लेकिन दोनों कंपनियों से मिलाकर उतना ही पैसा मिलेगा, जितना आपका असली और मंजूर मेडिकल खर्च है. एक ही खर्च के लिए दो बार पैसा नहीं लिया जा सकता.
पहले बीमा की जानकारी देना जरूरी
अगर आपके पास कंपनी की पॉलिसी और अपनी खरीदी हुई पॉलिसी दोनों हैं, तो क्लेम करते समय दोनों बीमा कंपनियों को इसकी जानकारी दें. दूसरी पॉलिसी छिपाने से क्लेम की जांच में परेशानी हो सकती है. इसलिए अस्पताल में भर्ती होते समय ही दोनों कंपनियों को जानकारी देना बेहतर है.
मान लीजिए, अस्पताल का कुल बिल 8 लाख रुपए है. आपकी पहली पॉलिसी में 5 लाख रुपए का कवर है. पहली कंपनी 5 लाख रुपए का मंजूर खर्च देती है, तो बाकी 3 लाख रुपए के लिए आप दूसरी पॉलिसी में क्लेम कर सकते हैं. यह भुगतान दूसरी पॉलिसी की शर्तों और मंजूर खर्च पर निर्भर करेगा.
एक ही बिल पर दो बार क्लेम न करें
दो बीमा पॉलिसी होने का मतलब यह नहीं है कि आप एक ही अस्पताल के खर्च के लिए दोनों कंपनियों से पूरा पैसा ले सकते हैं. अगर आपने 8 लाख रुपए खर्च किए हैं, तो दोनों कंपनियों से मिलाकर 8 लाख रुपए से ज्यादा का भुगतान नहीं मिल सकता. गलत जानकारी देने से आपका क्लेम रुक सकता है.
जरूरी दस्तावेज भी संभालकर रखें
दूसरी कंपनी से पैसा लेने के लिए पहली कंपनी का क्लेम सेटलमेंट लेटर, अस्पताल का बिल, डिस्चार्ज समरी, डॉक्टर की पर्ची, जांच रिपोर्ट और दोनों पॉलिसी के दस्तावेज मांगे जा सकते हैं. पहली कंपनी ने जितना पैसा दिया है और कितना खर्च बाकी है, इसका साफ रिकॉर्ड रखें.
क्लेम की जानकारी देने में देरी न करें
अस्पताल में भर्ती होने के बाद बीमा कंपनी को तय समय के अंदर सूचना देना जरूरी है. अगर आप समय पर जानकारी नहीं देते हैं, तो क्लेम में परेशानी हो सकती है. इसलिए पॉलिसी में दिए गए नियमों को ध्यान से पढ़ें और दोनों कंपनियों को समय पर सूचित करें.
हर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के नियम एक जैसे नहीं होते. कुछ पॉलिसी में कमरे के किराये की सीमा होती है, तो कुछ में खास इलाज के लिए अलग नियम होते हैं. ऐसे में पहली कंपनी से पैसा मिलने के बाद भी दूसरी कंपनी पूरा बचा हुआ बिल देने से मना कर सकती है.