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New vs Old Tax Regime: नई और पुरानी कर व्यवस्था का क्या है पूरा माजरा, समझें आपके लिए कौन बेहतर

टैक्स को लेकर बजट में हुए लगभग सभी अहम और बड़े एलान नई कर व्यवस्था के लिए हैं, पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax Regime) में न के बराबर बदलाव हुआ है. बजट आने के बाद लोग नई और पुरानी कर व्यवस्था के झोल में फंस गए हैं. चलिए आपको समझाते हैं नए और पुराने का पूरा चक्कर.

Budget 2023 Budget 2023
हाइलाइट्स
  • नई कर व्यवस्था आकर्षक लग सकती हैं लेकिन इसमें बहुत से लाभ नहीं मिलते.

1 फरवरी 2023 को देश का बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एलान किया कि नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) अब डिफ़ॉल्ट कर व्यवस्था होगी. हालांकि टैक्सपेयर्स के पास अभी भी पुरानी कर व्यवस्था का विकल्प है. डिफ़ॉल्ट का मतलब है अगर आप टैक्स फाइल करते समय कोई विकल्प नहीं चुनेंगे तो आप ऑटोमेटिक नई कर व्यवस्था में आ जाएंगे. आपको बता दें, टैक्स को लेकर बजट में हुए लगभग सभी अहम और बड़े एलान नई कर व्यवस्था के लिए हैं, पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax Regime) में न के बराबर बदलाव हुआ है. बजट आने के बाद लोग नई और पुरानी कर व्यवस्था के झोल में फंस गए हैं. चलिए आपको समझाते हैं नए और पुराने का पूरा चक्कर.    


नई कर व्यवस्था कब आई और क्यों आई?
बताते चलें कि साल 2020 में सरकार एक टैक्स व्यवस्था लेकर आई जो पहले से मौजूद कर व्यवस्था से बहुत हद तक अलग थी.  2020 में कर व्यवस्था में हुए बदलावों को नई कर व्यवस्था का नाम दिया गया और 2020 से पहले की व्यवस्था को पुरानी कर व्यवस्था कहा गया. करदाता के सामने दोनों में से किसी को भी चुनने का विकल्प खुला रखा गया. यानि ये आप पर है कि आप किस कर व्यवस्था को चुनना चाहते हैं.

कर भुगतान की प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाने के लिए वित्त मंत्रालय ने बजट 2020 के दौरान नई आयकर व्यवस्था पेश की. 2020 की व्यवस्था को 'सिंपलीफाइड टैक्स रिजीम' कहा गया. नई कर व्यवस्था उन लोगों को ध्यान में रखकर लाई गई जो टैक्सपेयर्स निवेश करने और कटौती का दावा करने की स्थिति में नहीं हैं. नई व्यवस्था में पिछले वाले की तुलना में ज्यादा स्लैब रखीं गईं. इसके तहत सरकार ने कुछ कर कटौतियों (Tax Deductions) और कर छूट (Tax Exemption) को छोड़ने के विकल्प के साथ कम टैक्स रेट्स का विकल्प दिया.    


नई कर व्यवस्था और पुरानी कर व्यवस्था में अंतर (New Tax Regime vs Old Tax Regime):  
नई व्यवस्था में टैक्स रेट्स कम (Lower tax rates) रखे गए हैं. नई कर व्यवस्था में 0 फीसदी से 30 फीसदी तक के 7 टैक्स स्लैब हैं जिसमें 15 लाख रुपये से अधिक की आय पर उच्चतम टैक्स रेट है. नई व्यवस्था के विपरीत, पुरानी व्यवस्था में 0 फीसदी से 30 फीसदी तक के चार टैक्‍स स्‍लैब हैं, जिनकी अधिकतम दर 10 लाख रुपये से अधिक आय पर लागू होती है.

नई कर व्यवस्था के तहत  2.5 लाख रुपये तक की सालाना आय वालों को टैक्स से छूट है. 2.5 लाख रुपये से 5 लाख रुपये तक की आय वालों को 5 प्रतिशत टैक्स देना होगा. 5 से 7.5 लाख रुपये की आय पर 10 प्रतिशत और 7.5 से 10 लाख रुपये के बीच की आय पर 15 प्रतिशत कर लगाया जाता है. 10 से 12.5 लाख रुपये तक की आय वालों को 20 प्रतिशत की दर से कर देना होता है, जबकि 12.5 रुपये से 15 लाख रुपये के बीच वालों को 25 प्रतिशत की दर से कर देना होता है. 15 लाख रुपये से ऊपर की आय पर 30 फीसदी टैक्स लगता है. 
       
नई कर व्यवस्था में कम कर दरें आकर्षक लग सकती हैं लेकिन इसमें पुरानी व्यवस्था के तहत मिलने वाले कटौती (Tax Deductions) और छूट (Tax Exemption) का लाभ नहीं मिलता. इसलिए अगर आप नई व्यवस्था को चुनते हैं तो कम टैक्स रेट के बदले में कर कटौती और छूट के हिसाब किताब का मूल्यांकन जरूरी है. 


नई कर व्यवस्था में आपको निम्न तरह के कुछ अहम कटौती और छूट छोड़ने पड़ेंगे:             

यात्रा भत्ता (Leave travel allowance-LTA) 
मकान किराया भत्ता (House rent allowance-HRA)  
बच्चों की शिक्षा भत्ता (Children education allowance)
वेतन पर मानक कटौती (Standard deduction on salary)
आवास ऋण पर ब्याज (Interest on housing loan) 
धारा 80सी के तहत कटौती, आवास ऋण पर मूलधन की अदायगी, जीवन बीमा प्रीमियम
चिकित्सा बीमा प्रीमियम, शिक्षा ऋण पर ब्याज आदि के लिए अन्य कटौतियां


पुरानी कर व्यवस्था के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की कुल आय 2.5 लाख रुपये से अधिक नहीं है, तो उसे कोई टैक्स नहीं देना है. यदि आय 2.5 लाख रुपये से 5 लाख रुपये के ब्रैकेट में आती है, तो 5 प्रतिशत आयकर देना होता है. हालांकि, 5 लाख रुपये तक की कमाई करने वाले आयकर (आई-टी) अधिनियम की धारा 87ए के तहत 12,500 रुपये की छूट का दावा कर सकते हैं. 5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक की आय वाले व्यक्तियों के लिए 20 प्रतिशत की दर से टैक्स काटा जाता है. अगर किसी व्यक्ति की कुल आय 10 लाख रुपये से ज्यादा है तो 30 फीसदी टैक्स देना होता है. 


पुरानी कर व्यवस्था में आयकर की दरें अधिक लग सकती हैं लेकिन इसमें आपको 70 से ज्यादा छूट और कटौती का विकल्प मिलता है.  

 


 बजट 2023-24 में नई कर व्यवस्था में हुए बदलाव: New Default Tax Regime
आपको यहां पर पहले ये बताना जरूरी है कि बजट 2023-24 में टैक्स को लेकर हुए एलान नई टैक्स व्यवस्था को अपनाने वालों के लिए ही हैं. इसमें नई कर व्यवस्था के तहत सात लाख रुपये तक की आय पर अब कोई टैक्स नहीं लगेगा. यह लाभ केवल नई टैक्स रिजीम को चुनने वालों को मिलेगा. अभी तक 5 लाख तक सालाना आय वालों को टैक्स छूट का लाभ मिल रहा था जिसे अब बढ़ाकर 7 लाख कर दिया गया है. बजट 2023-24 में हुए एलान में नई कर व्यवस्था में टैक्स स्लैब की संख्या 7 से घटाकर 6 कर दी गई है. नए बदलावों के तहत टैक्स स्लैब में बदलाव करते हुए अब 3 लाख रुपये तक आय वाले सभी लोगों को इनकम टैक्स नहीं देना होगा.  


पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत टैक्सपेयर्स के लिए किसी टैक्स छूट की घोषणा नहीं की गई है. इसका मतलब है कि 80सी कटौती की सीमा में कोई वृद्धि नहीं, बुनियादी छूट की सीमा में कोई वृद्धि नहीं, और घर खरीदारों और निवेशकों के लिए लगभग कोई टैक्स छूट नहीं है.

Tax Regime Explained
        पुरानी व्यवस्था               नई व्यवस्था-2020         नई व्यवस्था-2023 (डिफ़ॉल्ट)
इनकम स्लैब इनकम टैक्स रेट इनकम स्लैब इनकम टैक्स रेट इनकम स्लैब इनकम टैक्स रेट
2.5 लाख रुपये तक 0% 2.5 लाख रुपये तक 0% 0 से 3 लाख 0%
2.5 से 5 लाख तक 5% 2.5 – 5 लाख 5% 3 लाख 1 रुपए से 6 लाख 5%
5 लाख से 10 लाख तक 20% 5 – 7.5 लाख 10% 6 लाख 1 रुपए से 9 लाख तक 10%
10 लाख से ज्यादा 30% 7.5 – 10 लाख 15% 9 लाख 1 रुपए से 12 लाख तक 15%

5 लाख रुपए तक की सालाना इनकम पर रीबेट यानी छूट

 

10-12.5 लाख 20% 12 लाख 1 रुपए से 15 लाख तक 20%
12.5-15 लाख 25% 15 लाख से ज्यादा 30%
15 लाख से ज्यादा 30 % 7 लाख रुपए तक की सालाना इनकम पर रीबेट यानी छूट

5 लाख रुपए तक की सालाना इनकम पर रीबेट यानी छूट