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UPI MDR: व्यापारी नहीं वसूल सकेंगे ग्राहकों से एमडीआर चार्ज, संगठनों के साथ जल्द होगी बैठक, किया जाएगा लोगों को जागरूक... वित्त मंत्रालय के MDR को लेकर खास कदम

यूपीआई पर एमडीआर को लेकर लोग काफी चिंतित हैं. खासतौर पर व्यापारी. वहीं कुछ ग्राहकों में ये डाउट है कि व्यापारी एमडीआर को वस्तु की कीमत बढ़ कर वसूलेंगे. इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्रालय में कुछ अहम फैसले लिए हैं.

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यूपीआई पेमेंट चार्जेज इन दिनों काफी चर्चा है. 15 अक्टूबर से कुछ चुनिंदा यूपीआई मर्चेंट पेमेंट पर एमडीआर (Merchant Discount Rate) लागू होने की बात सामने आई है. इसे लेकर दुकानदारों और आम लोगों के बीच कई सवाल हैं. अब वित्त मंत्रालय ने इस मामले में तीन बड़े कदम उठाने की जानकारी दी है. सरकार का कहना है कि यूपीआई पेमेंट का चार्ज सीधे ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा.

व्यापारियों की साथ की जाएगी बैठक

वित्त मंत्रालय जल्द ही देश के बड़े व्यापारिक संगठन (CAIT) के साथ बैठक करेगा. इस बैठक में यूपीआई और एमडीआर से जुड़े नियमों पर चर्चा होगी. सरकार का मकसद व्यापारियों के बीच इस सिस्टम को लेकर मौजूद डाउट को दूर करना है.

इसके साथ ही इंडियन बैंक्स एसोसिएशन को जागरूकता अभियान चलाने के लिए कहा जाएगा. जिसमें अलग-अलग भारतीय भाषाओं में लोगों और व्यापारियों को UPI-MDR के नियम समझाए जाएंगे.

ग्राहकों से बिल्कुल नहीं लिया जाएगा एमडीआर चार्ज

सरकार ने यह भी साफ किया है कि एमडीआर का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाना चाहिए. इसके लिए एक सिस्टम तैयार किया जाएगा जाएगी. बैंकों को भी इसको लेकर निर्देश दिए गए हैं.

यानी अगर किसी ग्राहक ने दुकान पर यूपीआई से भुगतान किया है, तो दुकानदार अलग से एमडीआर के नाम पर ग्राहक से पैसे नहीं ले सकता. सरकार के अनुसार, जैसे डेबिट कार्ड से भुगतान करने पर एमआरपी नहीं बदलता, वैसे ही यूपीआई भुगतान के मामले में भी ग्राहक पर बोझ नहीं होना चाहिए.

क्या एमडीआर कोई सरकारी टैक्स है?

एमडीआर को लेकर एक बड़ा डाउट यह है कि यह सरकार द्वारा लिया जाने वाला टैक्स है. सरकार के अनुसार ऐसा नहीं है. एमडीआर न तो टैक्स है, न सेस और न ही सरचार्ज. इससे मिलने वाला पैसा सरकारी खजाने में नहीं जाता, बल्कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम से जुड़े हिस्सेदारों के बीच रहता है.

अधिकांश यूपीआई मर्चेंट पेमेंट पर असर नहीं

सरकार के मुताबिक करीब 96 फीसदी यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन एमडीआर से प्रभावित नहीं होंगे. ₹2000 तक के सभी यूपीआई मर्चेंट पेमेंट पर एमडीआर जीरो रहेगा. व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P यूपीआई भुगतान भी किसी भी राशि पर मुफ्त रहेगा. छोटे व्यापारियों को यूपीआई क्यूआर के जरिए हर महीने ₹1 लाख तक मिलने वाली रकम पर भी एमडीआर नहीं लगेगा. 

₹2000 से ज्यादा भुगतान पर क्या होगा?

₹2000 से अधिक के कुछ तय P2M यानी Person-to-Merchant ट्रांजैक्शन पर 0.4% एमडीआर लागू होगा. ₹75000 या उससे अधिक के लेनदेन पर इसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन होगी.