Symbolic Photo
Symbolic Photo
गांधीनगर के कुडासन स्थित विन विन ओवरसीज के वीजा एजेंट ने कनाडा का PR वीजा दिलाने का लालच देकर एक ही परिवार के भाई-बहन से 97.50 लाख रुपए ऐंठ लिए. एजेंट ने PR वीजा देने के बजाय केवल क्लोज्ड वर्क परमिट दिया. इसके कारण कनाडा पहुंचे भाई-बहन को अंततः भारत लौटना पड़ा. पीड़ित परिवार ने इस संबंध में इन्फोसिटी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है.
और तय की इतने लाख में डील
गांधीनगर के कुडासन में रहने वाले सुनीलभाई अपने बेटे और भतीजी को कनाडा भेजने के लिए वीजा एजेंट की तलाश कर रहे थे. इसी दौरान, दो साल पहले अमेरिका में रहने वाले एक परिचित के माध्यम से कुडासन के 'राधे स्क्वायर' में ऑफिस चलाने वाले रवि सोलंकी से संपर्क हुआ. मार्च 2025 में रवि सोलंकी ने दावा किया कि उसने अब तक 35 लोगों को विदेश भेजा है और 3 से 4 महीने में कनाडा का वीज़ा तथा उसके तुरंत बाद PR दिलाने का भरोसा दिलाते हुए 97.50 लाख रुपए में डील तय की.
कंपनी ने काम देने से कर दिया इंकार
वीजा प्रोसेसिंग के तहत बायोमेट्रिक और मेडिकल प्रक्रिया पूरी होने के बाद, एजेंट ने परिवार से 97.50 लाख रुपए नकद ले लिए और जुलाई 2025 में मैनिटोबा स्थित एक कंपनी का 'क्लोज़्ड वर्क परमिट' दे दिया. हालांकि, कनाडा पहुंचने पर सुनीलभाई के बेटे के पास हेल्थ कार्ड न होने के कारण कंपनी ने उसे काम देने से इंकार कर दिया, जिसके बाद रवि ने कहा कि हेल्थ कार्ड का काम चल रहा है. अगस्त 2025 में मेरी भतीजी भी वहां पहुंची. एजेंट ने PR फाइल चालू रखने के बहाने हर 15 दिन में 1,500 कैनेडियन डॉलर लेना जारी रखा. इसके बाद जब एजेंट से कनाडा के पीआर के बारे में बात कि तो उसने कहा कि काम चालू है ओर कुछ दिनों में हो जाएगा.
दर्ज कराई शिकायत
अप्रैल 2026 तक पीआर का कुछ नहीं हुआ और उसके बाद में भतीजी को भी नौकरी से निकाल दिया गया. उसके बाद दूसरी कंपनी में नौकरी के लिए संपर्क करने पर पता चला कि क्लोज वर्क परमिट के दो साल के वीजा मिले है. जिसके बाद बार-बार पूछने पर भी जब एजेंट ने मदद करने के बजाय गोल-मोल जवाब देना शुरू किया, तो परिवार को शक हुआ. जांच के दौरान पता चला कि एजेंट रवि सोलंकी खुद अपने परिवार के साथ कनाडा भागने की फिराक में था. ठगे जाने का ऐहसास होने पर सुनीलभाई ने इन्फोसिटी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई.