scorecardresearch

ईरान-इजरायल तनाव से ग्लोबल मार्केट में भारी गिरावट, गिफ्ट निफ्टी 2.3% टूटा, तेल 114 डॉलर के पार

ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर इंटरनेशनल शेयर मार्केट पर साफ दिखाई दे रही है. निफ्टी 2.3% गिरकर 23,761.50 पर आ गया है. प्री-मार्केट ट्रेड में निफ्टी 2.1% टूटकर 24,000 के नीचे आ गया, जबकि सेंसेक्स 1.7% यानी करीब 1,326 अंक गिरकर 77,592 पर पहुंच गया.

Advertisement
stock market crash stock market crash

मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर आज यानी 9 मार्च को भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिल रहा है. बाजार में जोरदार गिरावट दर्ज की गई है. सेंसेक्स करीब 2,300 अंक यानी लगभग 2.80% टूटकर 76,500 के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा है.

वहीं निफ्टी में भी करीब 700 अंकों यानी 2.80% की गिरावट है और यह 23,750 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है. बाजार में आज बैंकिंग, ऑटो, मेटल, एनर्जी और FMCG सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी जा रही है. पिछले सप्ताह भी भारतीय बाजारों में लगातार चौथे हफ्ते गिरावट दर्ज की गई थी.

पिछले सप्ताह भी सेंसेक्स और निफ्टी में दर्ज हुई थी गिरावट
बीते सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी दोनों करीब 2.8% टूटे थे. शुक्रवार को भी बाजार में बड़ी बिकवाली देखने को मिली थी, जिसमें सेंसेक्स 1,000 अंकों से ज्यादा गिर गया था और निफ्टी करीब 24,450 के आसपास बंद हुआ था.

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आया उछाल है. पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण सप्लाई बाधित होने की आशंका से तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड सोमवार को 23.99% उछलकर 114.93 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. वहीं अमेरिकी क्रूड भी 25.19% बढ़कर 113.80 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया.

एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट
एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट देखने को मिली. जापान का निक्केई करीब 6.98% गिरकर 51,740.46 पर आ गया, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी भी लगभग इतनी ही गिरावट के साथ 5,195.15 पर पहुंच गया. ताइवान का बाजार 5.42% टूटकर 31,777.48 पर बंद हुआ. ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 इंडेक्स 3.87% गिरकर 8,508.4 पर रहा. इसके अलावा हांगकांग का हैंगसेंग 2.51% गिरा, जबकि चीन के शंघाई और शेनझेन इंडेक्स में भी क्रमश: 1.07% और 2.42% की गिरावट दर्ज की गई.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़े
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर भारतीय रुपये पर भी पड़ सकता है. भारत अपनी जरूरत का करीब 80-85% कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने पर डॉलर की मांग बढ़ती है. ऐसे में रुपया कमजोर होकर 92 प्रति डॉलर के नीचे जा सकता है. रविवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई है. इससे पहले 2022 में कच्चा तेल 100 डॉलर के पार निकला था.