N Chandrasekaran (Photo/PTI)
N Chandrasekaran (Photo/PTI)
देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने पद छोड़ने का ऐलान कर दिया है. इसके बाद इस पद के लिए नए नाम की तलाश हो रही है. इसमें कई नाम सामने आ रहे हैं. लेकिन इस बीच एक सवाल कई लोगों के जेहन में उठ रहा है कि आखिर चेयरमैन को कौन चुनता है? कैसा चुना जाता है टाटा संस का चेयरमैन? चलिए पूरा प्रोसेस बताते हैं.
कैसे होता है चेयरमैन का चुनाव?
टाटा संस के नियमों के मुताबिक चेयरमैन का चुनाव 5 सदस्यों वाली एक समिति करती है. इस समिति के सदस्यों को अलग-अलग कंपनियों की तरफ से नामित किया जाता है. इस समिति में 3 सदस्य संयुक्त तौर पर सर दोराबजी टाटा ट्र्स्ट और सर रतन टाटा ट्र्स्ट द्वारा नामित किए जाते हैं. जबकि समिति का एक सदस्य टाटा संस बोर्ड का होता है. इसके साथ ही एक सदस्य बोर्ड स्वतंत्र तौर पर चुनता है.
क्या है चेयरमैन चुने जाने का प्रोसेस?
टाटा संस का चेयरमैन चुने जाने के लिए सबसे पहले समिति का गठन किया जाता है. यह कमेटी आंतरिक और बाहरी दोनों तरह के संभावित उम्मीदवारों को नामों पर विचार करती है और एक नाम की सिफारिश बोर्ड के पास भेजती है. टाटा संस का बोर्ड सिफारिश किए गए नाम पर औपचारिक विचार कर नियुक्त प्रक्रिया पूरी करता है.
साल 2017 में चंद्रशेखरन ने संभाली थी कमान-
टाटा संस में लंबे समय तक चेयरमैन पद पर रहे नटराजन चंद्रशेखरन ने इस्तीफे का ऐलान कर दिया है. उनका कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म हो रहा है. इसके बाद वो एक्सटेंशन की मांग नहीं करेंगे. साल 2016 में साइरस मिस्त्री की अचानक से टाटा ग्रुप से विदाई कर दी गई थी. इसके बाद रतन टाटा को अंतरिम चेयरमैन बनाया गया था. साल 2017 में चंद्रशेखरन को टाटा संस का चेयरमैन बनाया गया था. उसके बाद से वो इस पद पर थे.
एक व्यक्ति, एक पद का नियम-
टाटा संस के नियमों के मुताबिक टाटा ट्रस्ट्स का चेयरमैन टाटा संस का चेयरमैन नहीं हो सकता है. इसका मतलब है कि इन दो पदों पर एक ही व्यक्ति नहीं रह सकता है. यह नियम साल 2022 में बनाया गया था. रतन टाटा आखिरी ऐसे शख्स थे, जो इन दोनों पदों को एक साथ संभाला था. रतन टाटा को साल 2016 में टाटा ट्रस्ट्स का चेयरमैन होने के बाद भी 78 साल की उम्र में उनको टाटा संस का अंतरिम चेयरमैन बनाया गया था.
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