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Personal Loan Bank Rule: हो गई लोन लेने वाले की मौत! आखिर अब कौन चुकाएगा बैंक का पैसा.. यहां जानें इसको लेकर रूल

पर्सनल लोन लेना एक आम बात है, लेकिन किसी की मौत बता कर नहीं आती. ऐसे में अगर किसी की मौत हो जाती है तो बैंक पैसो की वसूली कैसे करेगा.

Personal Loan Rules Personal Loan Rules

पैसों की कई बार अचानक जरूरत पड़ने पर लोग अक्सर पर्सनल लोन का सहारा लेते हैं. यह लोन काफी जल्दी मिल जाता है, लेकिन इसकी ब्याज दर ज्यादा होती हैं. ऐसे में एक ऐसा सवाल पैदा होता, जो शायद ही कोई सोचे. यह सवाल है कि अगर लोन लेने वाले व्यक्ति की मौत हो जाए तो लोन की बकाया राशि चुकाने की जिम्मेदारी किसकी होती है और बैंक ऐसे स्थिति में क्या कदम उठाता है.

एग्रीमेंट बताता है रास्ता
किसी भी लोन का निपटारा पूरी तरह उसके एग्रीमेंट की शर्तों के हिसाब से किया जाता है. जब लोन लेने वाले व्यक्ति का निधन हो जाता है, तो बैंक या एनबीएफसी सबसे पहले यह समझने की कोशिश करते हैं कि बकाया रकम की वसूली कैसे की जा सकती है. ऐसा करना इसलिए जरूरी होता है, क्योंकि हर मामले में दस्तावेज और शर्तें अलग तरह से तय होती हैं. साथ ही किस परिस्थिति में मौत हुई है, यह बात भी मायने रखती है.

क्या परिवार चुकाता है लोन?
पर्सनल लोन आमतौर पर अनसिक्योर्ड होता है, यानी इसके बदले कोई संपत्ति गिरवी नहीं रखी जाती. ऐसे में यदि उधार लेने वाले व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार के सदस्यों पर सीधे तौर पर लोन चुकाने की जिम्मेदारी नहीं डाली जाती जा सकती. लेकिन यह तभी लागू होता है जब परिवार का कोई सदस्य लोन से कानूनी रूप से जुड़ा न हो.

को-बॉरोअर की जिम्मेदारी
अगर लोन में को-बॉरोअर शामिल है, तो वह शुरू से ही लोन की जिम्मेदारी शेयर करता है. ऐसे में मेन बॉरोअरकी मौत हो जाने के बाद पूरी ईएमआई चुकाने की जिम्मेदारी को-बॉरोअर पर आ जाती है. बैंक इस स्थिति में को-बॉरोअर से ही लोन का निपटारा करने की उम्मीद करता है.

गारंटर पर भी आ सकता है दबाव
जब किसी लोन में कोई गारंटर शामिल होता है, तो वह एक तरह से कवच की तरह काम करता है. यानी वह गारंटी लेना है कि यह लोन चुकाया जाएगा. यदि मेन लेंडर या को-बॉरोअर लोन चुका नहीं पाते हैं, तो बैंक गारंटर से रकम वसूल सकता है. इसलिए गारंटर बनना एक बड़ी जिम्मेदारी होती है.

गिरवी संपत्ति से हो सकती है वसूली
अगर लोन के बदले कोई संपत्ति गिरवी रखी गई है, तो बैंक उस संपत्ति को बेचकर बकाया राशि वसूल सकता है. इसमें घर, जमीन या सोना जैसी संपत्तियां शामिल हो सकती हैं. ऐसी स्थिति में बैंक कानूनी प्रोसेस के जरिए अपना पैसा निकालता है.