PPAC petroleum demand data 2026
PPAC petroleum demand data 2026
PPAC petroleum demand data 2026 मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर पैदा हुई चिंताओं ने दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों की धड़कनें बढ़ा दी हैं. वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण केवल तेल ही महंगा नहीं हुआ, बल्कि रोजमर्रा के सामान के दामों में भी बढ़ोतरी आई है. इससे आम इंसान के पॉकेट पर खूब असर पड़ रहा है. हालांकि इसके बावजूद पेट्रोल और डिजल की खरीदारी जारी है. ऐसे में सवाल उठता है कि भारत हर दिन कितना पेट्रोल और डीजल इस्तेमाल करता है, और अगर अंतरराष्ट्रीय सप्लाई प्रभावित होती है तो देश कितने समय तक अपनी फ्यूल की जरूरतें पूरी कर सकता है.
हर दिन कितना पेट्रोल इस्तेमाल करता है भारत?
पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में रोजाना करीब 130 मिलियन लीटर पेट्रोल की खपत होती है. अगर इसे सालाना आधार पर देखें तो यह आंकड़ा लगभग 47.5 बिलियन लीटर तक पहुंच जाता है. अगर 1 दिन के पेट्रोल की खपत को 10 लीटर की बाल्टी से नापे तो 1.3 करोड़ बाल्टियां पेट्रोल से भर जाएगी. देश में निजी वाहनों की बढ़ती संख्या, शहरीकरण और लगातार बढ़ रही यात्रा जरूरतों की वजह से पेट्रोल की मांग साल-दर-साल बढ़ती जा रही है. दोपहिया और चारपहिया वाहनों का बड़ा हिस्सा अभी भी पेट्रोल पर निर्भर है, जिससे इसकी खपत लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई है.
डीजल की खपत पेट्रोल से कहीं ज्यादा
पेट्रोल के मुकाबले भारत में डीजल की खपत कहीं अधिक है. रिपोर्ट के मुताबिक देश रोजाना करीब 290 से 300 मिलियन लीटर डीजल इस्तेमाल करता है. इसे भी 10 लीटर की बाल्टी से नापे तो 2.9-3 करोड़ बाल्टियां केवल डीजल से भर जाएंगी. ट्रक, बसें, मालवाहक वाहन, कृषि उपकरण और कई औद्योगिक गतिविधियां मुख्य रूप से डीजल पर निर्भर करती हैं. यही वजह है कि डीजल की मांग पेट्रोल की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा बनी हुई है.
आयातित कच्चे तेल पर टिका है भारत
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल उपभोक्ता देशों में शामिल है, वहीं देश अपनी जरूरत के लिए अधिकांश कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है. देश अपनी कुल जरूरत का लगभग 80 से 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है. भारत को रोजाना करीब 5 से 5.5 मिलियन बैरल कच्चे तेल की आवश्यकता होती है. इस कच्चे तेल को रिफाइनरियों में प्रोसेस करने के बाद पेट्रोल, डीजल, विमानन ईंधन और अन्य पेट्रोलियम उत्पाद तैयार किए जाते हैं.
मांग की रफ्तार, उत्पादन से तेज
पिछले कुछ वर्षों में देश में ईंधन की मांग तेजी से बढ़ी है. आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि, वाहन बिक्री में उछाल और परिवहन क्षेत्र के विस्तार ने पेट्रोलियम उत्पादों की खपत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है. हालांकि घरेलू उत्पादन और रिफाइनिंग क्षमता में भी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन मांग की रफ्तार उससे कहीं अधिक तेज रही है. यही कारण है कि भारत को लगातार बड़े पैमाने पर कच्चा तेल आयात करना पड़ता है.
भारत के पास कितना ईंधन भंडार है?
वैश्विक संकट या सप्लाई में रुकावट जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए भारत रणनीतिक और वाणिज्यिक दोनों तरह के तेल भंडार रखता है. सरकार और तेल कंपनियों के अनुसार, फिलहाल देश के पास इतना पेट्रोल और डीजल स्टॉक मौजूद है कि लगभग 60 दिनों तक घरेलू मांग को पूरा किया जा सकता है. इसके अलावा भारत लगातार अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को मजबूत करने पर भी काम कर रहा है, ताकि किसी अंतरराष्ट्रीय संकट की स्थिति में ईंधन आपूर्ति प्रभावित न हो.
क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य?
दुनिया के कुल समुद्री कच्चे तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है. यदि इस मार्ग पर किसी तरह की बाधा आती है तो कमी के कारण वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं. भारत भले ही कई देशों से कच्चा तेल खरीदता हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर देश की ऊर्जा लागत और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है. यही वजह है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव पर भारत समेत पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है.
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