India-UK Free Trade Agreement
India-UK Free Trade Agreement
भारत-यूके कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) को 24 जुलाई 2025 को साइन किया गया था, 14 दौर की बातचीत के बाद अब यह मुफ्त व्यापार समझौता 15 जुलाई 2026 से प्रभावी हो रहा है. इससे भारत-ब्रिटेन के बीच व्यापार में जबरदस्त बढ़ोतरी होने की संभावना है. भारत अब अपने करीब 99 फीसदी सामान को ब्रिटेन में बिना किसी इंपोर्ट टैक्स के भेज सकेगा. इनमें कपड़े, जूते और कुछ फूड प्रोडक्ट्स शामिल हैं.
इससे भारतीय कंपनियों यूके में कारोबार करना आसान और सस्ता होगा. भारतीय कारोबारियों और एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों को ब्रिटेन के बाजार में बड़ा मौका मिलेगा. उधर, आम आदमी के लिए खुशखबरी यह है कि इस मुफ्त व्यापार समझौते से कई ब्रिटिश प्रोडक्ट्स भारत में सस्ते मिलने लगेंगे. अब इन्हें खरीदने के लिए अधिक रुपए नहीं देने पड़ेंगे. आपको मालूम हो कि बीते साल जुलाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिटेन के तत्कालीन पीएम किएर स्टार्मर के साथ इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. मोदी सरकार के कार्यकाल में लागू होने वाला यह छठवां मुक्त व्यापार समझौता है. इससे पहले भारत ऐसा समझौता ऑस्ट्रेलिया, मॉरीशस, यूएई, ओमान और ईएफटीए (यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ) के साथ कर चुका है.
क्या होता है मुक्त व्यापार समझौता
मुक्त व्यापार समझौता दो या उससे अधिक देशों के बीच व्यापार को सुलभ बनाने और वस्तुओं पर टैरिफ के नियमों को तय करने के लिए किया जाता है. मुक्त व्यापार समझौता के तहत देश आपसी व्यापार को बढ़ावा देने के लिए अपनी जरूरत वाली वस्तुओं-सेवाओं पर या तो टैरिफ कम करते हैं या पूरी तरह हटा देते हैं. मुक्त व्यापार समझौते से न सिर्फ आयात करने वाले देश को सस्ती वस्तुएं मिलती हैं, बल्कि निर्यातक देशों को नया और कम टैरिफ वाला बाजार मिलता है. सीईटीए के तहत भारत और ब्रिटेन सैकड़ों उत्पादों पर आयात शुल्क कम या समाप्त करेंगे.
भारत के किन उद्योगों को होगा फायदा
ब्रिटेन से मुक्त व्यापार समझौता होने के बाद भारत के जिन उद्योगों को फायदा मिलेगा, उनमें कपड़ा (टेक्सटाइल), समुद्री उत्पाद (मरीन प्रोडक्ट्स), चमड़ा, खनिज, पेपर, फर्नीचर, फुटवियर, खेल की वस्तुएं-खिलौने, रत्न-आभूषण, ऑटो पार्ट्स, इंजीनियरिंग उत्पाद, जैविक रसायन आदि शामिल हैं. इस समझौते से भारत की जिन कंपनियों को सबसे अधिक फायदा मिलेगा, उनमें टाटा मोटर्स, महिंद्रा इलेक्ट्रिक भारत फोर्ज, रेमंड, रिलैक्सो, वर्धमान, अरविंद लिमिटेड, वेलस्पन इंडिया और बाटा शामिल हैं. इस समझौते से ब्रिटेन की जिन कंपनियों को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा, उनमें डियाजियो, एस्टन मार्टिन, जैगुआर-लैंड रोवर, रोल्स रॉयस, द बॉडी शॉप, स्टैंडर्ड चार्टर्ड, यूपीएस आदि शामिल हैं.
क्या होगा आम लोगों को फायदा
भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते से ब्रिटेन से आने वाले कई सामान पहले के मुकाबले सस्ते होने लगेंगे. इनमें स्कॉच व्हिस्की, चॉकलेट, बिस्कुट, कॉस्मेटिक्स, जिन औरब्रिटिश कारें शामिल हैं. आपको मालूम हो कि सभी प्रोडक्ट्स की कीमत एक साथ नहीं घटेगी. कई चीजों पर टैक्स धीरे-धीरे कम होगा. अभी स्कॉच व्हिस्की पर 150 फीसदी तक टैक्स लगता है. समझौते के बाद इसे पहले 75 फीसदी किया जाएगा और अगले 10 साल में यह 40 फीसदी तक आ जाएगा. ब्रिटिश कारों पर अभी 110 फीसदी तक टैक्स लगता है. यह टैक्स अगले 10 साल में घटकर 10 फीसदी तक पहुंच जाएगा. ब्रिटेन से आने वाले मेडिकल उपकरण, कॉस्मेटिक्स, फार्मा उत्पादन, एयरक्राफ्ट के पार्ट्स और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को टैरिफ में छूट मिलेगी. एफटीए के जरिए भारत के सेवा क्षेत्र को भी काफी फायदा मिलने की संभावना है. वस्तुओं और सेवा क्षेत्र के साथ-साथ भारत के श्रम आधारित सेक्टर को भी ब्रिटेन में फायदा मिलेगा. इस समझौते के तहत इंग्लैंड में काम कर रहे भारतीय कर्मियों को सामाजिक सेवा के लिए किए जाने वाले भुगतान से 3 साल की छूट मुहैया कराई जाएगी. इस समझौते से रोजगार के नए अवसर मिलेंगे. इस समझौते में ब्रिटेन में कार्यरक भारतीयों को नेशनल इंश्योरेंस में छूट प्रस्तावित है.
भारत ने इन सेक्टर्स को एफटीए से रखा बाहर
भारत ने एफटीए में अपने कृषि क्षेत्र को ब्रिटेन की पहुंच से दूर रखा है. इसका मतलब है कि ब्रिटेन की कंपनियां फिलहाल भारत के बाजार में अपने कृषि उत्पाद नहीं उतार पाएंगी. मोदी सरकार ने इस समझौते में डेयरी उत्पाद, सेब, चीज, चीनी, ओट्स, खाद्य तेल,चावल, पोर्क, चिकन और अंडे जैसे कई एग्री प्रोडक्ट्स को शामिल नहीं किया है. ऐसा इसलिए किया गया है ताकि देश के किसानों और डेयरी सेक्टर पर सस्ते विदेशी सामान का असर न पड़े. इसके अलावा भारत ने अपने प्लास्टिक, हीरे, चांदी, स्मार्टफोन, टेलीविजन कैमरा ट्यूब्स, ऑप्टिकल फाइबर और केबल्स के क्षेत्र को समझौते में शामिल नहीं किया है.
दोनों देशों को एफटीए से कितना हो सकता है फायदा
आपको मालूम हो कि भारत और ब्रिटेन के बीच साल 2024 तक द्विपक्षीय व्यापार करीब 42.6 अरब पाउंड (करीब 5 लाख करोड़ रुपए) का रहा. एफटीए के लागू होने के बाद दोनों देश अब व्यापार को 2040 तक हर साल 25.5 अरब पाउंड बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं. साल 2030 तक दोनों के बीच का व्यापार करीब 120 अरब पाउंड तक पहुंचने की उम्मीद जताई गई है.