Shopping behaviour of Gen Z: AI Image
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भारतीयों के खर्च करने के तरीके में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. अब लोग कपड़े, गैजेट्स और दूसरी भौतिक चीजों पर पैसा खर्च करने के बजाय ट्रैवल, होटल, रेस्टोरेंट और सांस्कृतिक गतिविधियों जैसे अनुभवों पर ज्यादा रकम खर्च कर रहे हैं. यही वजह है कि आने वाले वर्षों में होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर देश के सबसे तेजी से बढ़ने वाले उपभोक्ता बाजारों में शामिल हो सकता है. रियल एस्टेट सर्विसेज और इन्वेस्टमेंट कंपनी CBRE की रिपोर्ट 'Gen Z Checks In: The Rise of the Lifestyle Hotel' के मुताबिक, 2025 से 2030 के बीच भारतीय परिवारों का अनुभव आधारित खर्च 10.3% की सालाना दर (CAGR) से बढ़ने का अनुमान है. इसके मुकाबले भौतिक वस्तुओं पर खर्च बढ़ने की रफ्तार 9.1% रहने की संभावना है. रिपोर्ट के लिए CBRE ने ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के आंकड़ों का विश्लेषण किया है.
होटल सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा!
रिपोर्ट के मुताबिक, अनुभव आधारित खर्च की अलग-अलग कैटेगरी में होटल सेक्टर सबसे तेज बढ़त दर्ज कर सकता है. होटल में ठहरने पर होने वाला खर्च 2025 से 2030 के बीच 10.6% CAGR से बढ़ने का अनुमान है. CBRE का मानना है कि कोविड महामारी के बाद लोगों में घूमने-फिरने और नए अनुभव हासिल करने की बढ़ी इच्छा ने इस ट्रेंड को मजबूती दी है. महामारी के दौरान लंबे समय तक घरों में रहने के बाद लोगों ने यात्रा, मनोरंजन और सामाजिक गतिविधियों पर खर्च बढ़ाया है, जिसका असर अब भी दिखाई दे रहा है.
Gen Z बदल रही बाजार की दिशा
रिपोर्ट के अनुसार इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी ताकत Gen Z है. 1997 से 2012 के बीच जन्मी ये पीढ़ी एशिया-पैसिफिक क्षेत्र का सबसे बड़ा जनसांख्यिकीय समूह बन चुकी है और तेजी से आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो रही है. जैसे-जैसे इनकी आय बढ़ रही है, वैसे-वैसे इनके खर्च करने का तरीका भी बाजार की दिशा तय कर रहा है. Gen Z के यात्रियों की प्राथमिकताएं पारंपरिक ग्राहकों से अलग हैं. वो केवल होटल का कमरा नहीं, बल्कि एक पूरा अनुभव चाहते हैं. ऐसे होटल जो स्थानीय संस्कृति से जुड़े हों, सोशल मीडिया पर साझा किए जा सकें और जिनका डिजाइन अलग पहचान रखता हो, उनकी पहली पसंद बन रहे हैं. इसके अलावा सेल्फ चेक-इन, स्मार्ट रूम, डिजिटल सुविधाएं और वेलनेस सर्विसेज अब इस पीढ़ी की बुनियादी अपेक्षाओं में शामिल हो चुकी हैं.
तेजी से बढ़ रही लाइफस्टाइल होटल्स की मांग
यही वजह है कि होटल इंडस्ट्री में 'लाइफस्टाइल होटल' नाम की नई कैटेगरी तेजी से लोकप्रिय हो रही है. ये होटल पारंपरिक बुटीक होटल और बड़े ग्लोबल ब्रांड्स के बीच का मॉडल माने जाते हैं. इनमें स्थानीय संस्कृति, अनोखा डिजाइन और व्यक्तिगत अनुभव का मिश्रण होता है, जबकि संचालन और मार्केटिंग के लिए बड़े ब्रांड्स का सपोर्ट मिलता है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2015 से 2025 के बीच एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में कुल होटल सप्लाई 5% CAGR से बढ़ी, जबकि लाइफस्टाइल होटल्स की सप्लाई 19% CAGR की दर से बढ़ी. अनुमान है कि 2030 तक भी इस सेगमेंट की ग्रोथ 10% CAGR के आसपास बनी रहेगी, जो व्यापक होटल बाजार की अनुमानित 2% ग्रोथ से करीब पांच गुना ज्यादा है.
निवेशकों के लिए बड़ा मौका
CBRE का कहना है कि भारत में लाइफस्टाइल होटल्स की मौजूदगी अभी सिंगापुर और हांगकांग जैसे बाजारों के मुकाबले काफी कम है. यही वजह है कि डेवलपर्स और निवेशक इसे बड़े अवसर के तौर पर देख रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, ये होटल पारंपरिक होटलों की तुलना में ज्यादा प्रति कमरा राजस्व (RevPAR) हासिल कर रहे हैं, जिससे निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ रही है. बढ़ती जमीन की कीमतों और निर्माण लागत के बीच डेवलपर्स नए होटल बनाने की जगह पुराने और बिना ब्रांड वाले होटलों को खरीदकर उन्हें लाइफस्टाइल प्रॉपर्टी में बदलने पर जोर दे रहे हैं. रिपोर्ट बताती है कि एशिया-पैसिफिक में 100 मिलियन डॉलर से कम कीमत वाले होटल एसेट्स का निवेश में हिस्सा 2020 के 31% से बढ़कर 2025 में 42% हो गया है. इनमें बड़ी संख्या ऐसे स्वतंत्र होटल्स की है जिन्हें नए स्वरूप में विकसित किया जा सकता है. CBRE का मानना है कि बढ़ती आय, Gen Z की बदलती पसंद और अनुभव आधारित खर्च की ओर बढ़ता झुकाव आने वाले वर्षों में भारतीय हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की तस्वीर बदल सकता है.
-आदित्य राणा की रिपोर्ट
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