ITR Filing 2026
ITR Filing 2026
Income Tax Return Filing 2026: वित्त वर्ष 2025-26 (Financial Year 2025-26) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) यानी आईटीआर (ITR) भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. इस बार इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग की तारीखें पहले से अलग रखी गई हैं. इस बार आईटीआर दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है. यह तारीख उन व्यक्तिगत करदाताओं के है जो आईटीआर-1 फॉर्म और आईटीआर-2 फॉर्म भरते हैं. आईटीआर-4 फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 है.
यदि आप जॉब करते हैं और आपकी कंपनी से फॉर्म 16 मिल गया है तो तुरंत इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल न करें. आप सबसे पहले फॉर्म 16 मिलने के बाद पर्सनल डिटेल, पैन, टीडीएस, टैक्स रिजीम, वेतन विवरण, कटौतियों और Form 26AS व AIS से मिलान जरूर करें. यदि फॉर्म 16 में दी गई जानकारी में कोई भी गड़बड़ी है तो आईटीआर दाखिल करने के बाद भी आपका रिफंड अटक सकता है. आपके पास आयकर विभाग से नोटिस आ सकता है. आईटीआर भरने से पहले फॉर्म 16 में किन-किन चीजों को चेक करना चाहिए, इसको जानने से पहले आइए जानते हैं आखिर फॉर्म 16 क्या होता है?
क्या होता है फॉर्म 16
फॉर्म 16 एक टीडीएस सर्टिफिकेट होता है, जिसे कोई कंपनी या एम्प्लॉयर अपने कर्मचारी को देता है. फॉर्म 16 में कर्मचारी को एक साल में कितनी सैलरी मिली, कितना टीडीएस कटा, कौन सी छूट और कटौतियां दी गईं, सरकार के पास कितना टैक्स जमा कराया गया, ऐसी तमाम जानकारियां होती हैं. फॉर्म 16 इनकम टैक्स एक्ट की धारा 203 के तहत दिया जाता है. यदि आपकी सैलरी से टैक्स कटता है तो कंपनी को फॉर्म 16 देना जरूरी होता है. यदि आपकी कंपनी फॉर्म 16 नहीं देती है तो पेनाल्टी का प्रावधान है.
सेक्शन 272 के तहत 100 रुपए रोज पेनाल्टी का नियम है. असेसिंग ऑफिर को इम्प्लॉयर की शिकायत कर सकते है. आपको मालूम हो कि फॉर्म 16 अक्सर 15 जून तक मिल जाता है. टीडीएस रिटर्न फाइल करने की तारीख को बढ़ाया गया है. इस बार फॉर्म 16 नौकरी करने वालों को 10 जुलाई 2026 तक भी मिलेगा. आपको मालूम हो कि यदि आपकी सैलरी से टैक्स कटता है तो एम्प्लॉयर को आपको फॉर्म 16 देना होता है. यदि आपकी सैलरी टैक्सेबल लिमिट से कम है और टैक्स नहीं कटा तो फॉर्म 16 देना जरूरी नहीं होता. यदि किसी ने एक वित्त वर्ष के दौरान एक बार या इससे ज्यादा बार नौकरी बदली है तो जिन-जिन कंपनियों में कर्मचारी ने काम किया है वे सभी फॉर्म 16 देंगी. चाहे कर्मचारी ने कुछ दिन काम किया हो या कुछ महीने.
फॉर्म 16 के होते हैं दो हिस्से
आपको मालूम हो कि फॉर्म 16 के दो हिस्से पार्ट ए और पार्ट बी होते हैं. फॉर्म 16 के पहले हिस्से यानी पार्ट ए में कंपनी और कर्मचारी की डिटेल, जैसे PAN/TAN जानकारी, पता, एसेसमेंट ईयर, नौकरी की अवधि और सरकार को जमा किए गए टीडीएस का ब्योरा होता है. फॉर्म 16 के पार्ट बी में फाइनेंशियल ईयर के दौरान कर्मचारी को कितनी सैलरी दी गई, कर्मचारियों को मिले भत्ते को शामिल किया जाता है. इसके अलावा सेक्शन 80C और 80D के तहत मिली छूट, टैक्सेबल इनकम और कर्मचारी का कितना टैक्स बना ये सब डिटेल दी जाती है.
फॉर्म 16 मिलने के बाद सबसे पहले क्या चेक करें
1. कंपनी से फॉर्म 16 मिलने के बाद नौकरी करने वाले को सबसे पहले फॉर्म 16 पर अपना नाम, पैन नंबर, कंपनी का नाम, TAN नंबर, वित्त वर्ष और आकलन वर्ष की जानकारी जांचनी चाहिए. यदि इनमें गलती है तो आपको आईटीआर भरते समय परेशानी हो सकती है.
2. फॉर्म 16 मिलने के बाद सैलरी और टीडीएस का मिलान करना चाहिए. आपको यह इसमें यह देखना है कि आपकी मासिक सैलरी स्लिप और बैंक खाते में प्राप्त वेतन में कोई अंतर तो नहीं है. कई बार वेतन संरचना, भत्तों या अन्य भुगतान से संबंधित गलतियां रह जाती हैं. वेतन और टीडीएस के आंकड़ों में अंतर होने पर आईटीआर दाखिल करने में समस्या आ सकती है. आपको मालूम हो कि कंपनी हर महीने टीडीएस काटती है लेकिन फॉर्म 16 में यह तिमाही आधार पर दिखाई देता है. फॉर्म 16 मिलने के बाद ये भी चेक कर लें कि आपने टीडीएस के लिए जिस टैक्स रिजीम को चुना है, उसी के हिसाब से फॉर्म-16 में टैक्स की गणना की गई है या नहीं.
3. फॉर्म 26AS को भी ध्यान से चेक करना चाहिए. इसमें आपकी अलग-अलग इनकम पर काटे गए टैक्स और आपके पैन के साथ उसके जमा होने की जानकारी होती है. इसमें सैलरी इनकम पर टैक्स, इंटरेस्ट इनकम पर टैक्स, म्यूचुअल फंड या कंपनियों की तरफ से मिले डिविडेंड पर टैक्स शामिल होता है.
4. फॉर्म 16 मिलने के बाद कटौतियों और छूट की जांच करें. आपको मालूम हो कि फॉर्म 16 में धारा 80सी, 80डी, एचआरए, एलटीए और अन्य टैक्स छूट की डिटेल दर्ज रहती है. करदाताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्होंने जो निवेश और खर्च घोषित किए थे, वे सही तरीके से दर्ज हुए हैं या नहीं. यदि कोई कटौती छूट गई है तो उसे इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय अलग से क्लेम किया जा सकता है, बस उसके समर्थन में दस्तावेज उपलब्ध होना चाहिए.
5. यदि आपने किसी बैंक या अन्य वित्तीय संस्थान से कोई लोन लिया है तो ये देखना चाहिए कि फॉर्म 16 में इसको शामिल किया गया है या नहीं. होम लोन के ब्याज या सेविंग्स बैंक अकाउंट के ब्याज जैसी इनकम की जानकारी को शामिल किया गया है या नहीं. यदि फॉर्म 16 में शामिल नहीं किया गया है तो कंपनी से उसे ठीक कराएं.