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ITR Filing 2026: जॉब करते हैं... बिजनेस करते हैं... जा रहे हैं इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने... तो जानें आपकी कमाई पर कितना बनेगा टैक्स?

Income Tax Return Filing 2026: वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. आप जॉब करते हैं या बिजनेस करते हैं, यदि जा रहे हैं इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने तो उससे पहले यहां जान लें कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपकी कुल इनकम निकालकर टैक्स देनदारी का हिसाब कैसे लगाता है?

ITR Filing 2026 ITR Filing 2026

वित्त वर्ष 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) यानी आईटीआर (ITR) दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. ITR दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई 2026 है. यह तारीख उन व्यक्तिगत करदाताओं के लिए है, जो आईटीआर-1 फॉर्म और आईटीआर-2 फॉर्म भरते हैं. आईटीआर-4 फॉर्म भरने की अंतिम तारीख 31 अगस्त 2026 है. आप जॉब करते हैं या बिजनेस करते हैं, यदि जा रहे हैं इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने तो उससे पहले यहां जान लें कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (Income Tax Department) आपकी कुल इनकम निकालकर टैक्स देनदारी (Tax Liability) का हिसाब कैसे लगाता है?

सबसे पहले क्या देखता है आयकर विभाग
आयकर विभाग यानी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट सबसे पहले यह तय करता है कि करदाता यानी टैक्सपेयर्स (Taxpayer) भारत का निवासी (Resident) है या अनिवासी (Non-Resident). भारत में रहने वाले व्यक्ति की वैश्विक आय पर टैक्स लागू हो सकता है. उधर, अनिवासी व्यक्ति पर सिर्फ भारत में प्राप्त या अर्जित इनकम पर टैक्स लगता है. आपको मालूम हो कि यही आधार आगे की पूरी टैक्स गणना को प्रभावित करता है.

कैसे निकाली जाती है कुल आय 
आयकर विभाग आपकी आय को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर गणना करता है. इसमें मुख्य रूप से पांच इनकम के स्रोत शामिल होते हैं.
1. वेतन: जॉब से मिलने वाली आय. 
2. हाउस प्रॉपर्टी: किराए की इनकम. 
3. बिजनेस या प्रोफेशन: व्यापार या पेशे से कमाई.
4. कैपिटल गेन: शेयर, प्रॉपर्टी आदि बेचने से लाभ.
5. अन्य स्रोत: एफडी, ब्याज, डिविडेंड. 

फिर आयकर विभाग उठाता है यह कदम 
आयकर विभाग आपकी आय को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर गणना करने के बाद कुछ अन्य जरूरी कदम उठाता है. जैसे जरूरत होने पर क्लबिंग ऑफ इनकम लागू की जाती है. पुराने नुकसान का सेट-ऑफ और कैरी फॉरवर्ड किया जाता है. धारा 80C, 80D जैसी योग्य कटौतियां घटाई जाती हैं. इसके बाद कुल कर योग्य आय यानी टोटल इनकम तय होती है.

कैसे तय होती है टैक्स देनदारी 
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट कुल इनकम तय होने के बाद उसे दो हिस्सों सामान्य आय (Normal Income) और विशेष दर वाली आय (Special Income) में बांट देता है. सामान्य आय पर चुने गए टैक्स रिजीम और स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है. उधर, कुछ विशेष इनकम पर अलग दरें लागू हो सकती हैं. आपको मालूम हो कि कृषि आय टैक्स मुक्त रहती है. हालांकि कुछ मामलों में टैक्स दर तय करने के लिए इसे गणना में शामिल किया जाता है.

कितना देना होगा अंतिम टैक्स 
आयकर विभाग अंतिम टैक्स देनदारी निकालते समय पहले कुल टैक्स की गणना करता है और फिर पहले से जमा टैक्स को घटाता है. इसमें एडवांस टैक्स में TDS (Tax Deducted at Source) और  TCS (Tax Collected at Source) शामिल हैं. सेल्फ असेसमेंट टैक्स को भी शामिल किया जाता है. यदि रिटर्न लेट से दाखिल किया गया है या टैक्स समय पर जमा नहीं किया गया है तो ब्याज और लेट फीस भी जोड़ी जा सकती है. अंत में सरचार्ज और हेल्थ-एंड-एजुकेशन सेस जोड़कर अंतिम देनदारी तय की जाती है.

आपके लिए क्या है जरूरी
इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने से पहले अपनी आय, कटौतियों और पहले से कटे हुए TDS का मिलान जरूर कर लें. ऐसा करने से आईटीआर भरते समय किसी तरह की गलती या अतिरिक्त टैक्स भुगतान से बचा जा सकता है. आपको मालूम हो कि सही जानकारी के साथ आईटीआर भरना न सिर्फ आसान होता है, बल्कि भविष्य में नोटिस जैसी परेशानियों की संभावना भी कम हो जाती है.