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ITR 1 VS ITR 2: नौकरीपेशा वाले लोग ITR-1 और आईटीआर-2 को लेकर न हों कंफ्यूज, जानें आपके लिए कौन सा फॉर्म भरना है सही?

ITR Filing 2026: इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. नौकरीपेशा वाले करदाताओं के लिए ITR-1 और ITR-2 फॉर्म में से सही फॉर्म चुनना जरूरी. गलत फॉर्म भरने पर रिटर्न खारिज हो सकता है. आयकर विभाग से नोटिस भी आ सकता है. यहां आप जान सकते हैं आपके लिए कौन सा आईटीआर फॉर्म सही है?

ITR 1 VS ITR 2 ITR 1 VS ITR 2

Income Tax Return Filing 2026: वित्त वर्ष 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. इस बार जॉब करने टैक्सपेयर्स जिनको सैलरी मिलती है उनके लिए आईटीआर का सही फॉर्म चुनना जरूरी हो गया है. नौकरीपेशा वाले लोगों में ITR-1 और ITR-2 फॉर्म के बीच कन्फ्यूज अधिक देखने को मिल रही है.

नौकरीपेशा वाले करदाताओं के लिए ITR-1 और ITR-2 फॉर्म में से सही फॉर्म चुनना जरूरी. गलत फॉर्म भरने पर रिटर्न खारिज हो सकता है. आयकर विभाग से नोटिस भी आ सकता है. यहां आप जान सकते हैं आपके लिए कौन सा आईटीआर फॉर्म सही है? आपको मालूम हो कि नौकरी से वेतन पाने वाले लोग कई बार सिर्फ फॉर्म-16 को देखकर ITR-1 फॉर्म भर देते हैं, जो सही नहीं है.

आखिर क्या होता है आईटीआर फॉर्म
ITR फॉर्म वह जरिया है, जिसके माध्यम से कोई व्यक्ति अपनी सालाना आय, डिडक्शन और उस पर लगने वाले टैक्स की जानकारी भरकर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को देता है. आयकर विभाग कुल 7 प्रकार के आईटीआर फॉर्म (ITR-1, ITR-2, ITR-3, ITR-4, ITR-5, ITR-6, ITR-7) को जारी करता है. किसको कौन सा ITR फॉर्म भरना है, यह उसकी इनकम पर निर्भर करता है.

कौन भर सकता है ITR-1 फॉर्म 
आपको मालूम हो कि ITR-1 को सहज फॉर्म कहा जाता है. यह फॉर्म आम नागरिक और वेतनभोगी के लिए है. वैसे लोग जिनकी सालाना आय सीधी-सादी है, उनके लिए ITR-1 फॉर्म सही है. आईटीआर-1 फॉर्म में सैलरी या पेंशन से होने वाली आय, अधिकतम दो घरों से आय और ब्याज जैसी कमाई शामिल हो सकती है.

इसके साथ ही आईटीआर-1 फॉर्म को भरने वालों की कुल सालाना इनकम 50 लाख रुपए से कम होनी चाहिए. आपको मालूम हो कि इस बार आयकर विभाग ने एक बड़ा बदलाव करते हुए ITR-1 फॉर्म में दो हाउस प्रॉपर्टी तक की इनकम दिखाने की अनुमति दी है. पहले एक मकान से होने वाली आय को हो शामिल किया जाता था. आईटीआर-1 फॉर्म में इस बार छोटे निवेशकों के लिए 1.25 लाख रुपए तक के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन को भी शामिल किया गया है. यदि किसी नौकरी करने वाले टैक्यपेयर की कमाई शेयर मार्केट या म्यूचुअल फंड से भी होती है तो ऐसे में उन्हें आईटीआर-1 फॉर्म की जगह ITR-2 फॉर्म दाखिल करना चाहिए. जिनकी कुल सालाना आय 50 लाख रुपए से कम है वे ITR-1 फॉर्म भर  सकते हैं.

कब जरूरी होता है ITR-2 फॉर्म 
यदि किसी की सालाना आय थोड़ी जटिल है तो ऐसे लोगों को ITR-2 फॉर्म भरना जरूरी होता है. यदि किसी की सालाना इनकम 50 लाख रुपए से अधिक है, दो से अधिक प्रॉपर्टी से आय हो रही है, विदेशी इनकम या एसेट है और शेयर/म्यूचुअल फंड से कैपिटल गेन कर रहे हैं तो ऐसे लोगों को ITR-2 फॉर्म भरना अनिवार्य है. वेतन पाने वाले लोग कई बार फॉर्म 16 देखकर आईटीआर-1 फॉर्म भर देते हैं, जबकि उनके पास शेयर मार्केट या म्यूचुअल फंड से इनकम भी होती है. ऐसे में उन्हें ITR-2 फॉर्म भरना चाहिए. ऐसा नहीं करने पर आपका आईटीआर रिजेक्ट हो सकता है. बाद में आपके पास आयकर विभाग से नोटिस भी आ सकता है.

ITR भरने की डेडलाइन क्या
वेतनभोगी करदाता और वैसे लोग जो आईटीआर-1 या आईटीआर-2 फॉर्म दाखिल  करते हैं, उनके लिए आकलन वर्ष 2026-27 का आईटीआर दाखिल करने की डेडलाइन 31 जुलाई 2026 तक है. यदि इस तारीख के बाद कोई आईटीआर भरता है तो उसे जुर्माना देना होगा. ऐसे में आप अंतिम तिथि का इंतजान न करें और तुरंत आईटीआर दाखिल कर दें.

ITR दाखिल करते समय इन बातों का रखें ध्यान
1. अपनी आय के सभी सोर्स चेक करें. सिर्फ सैलरी ही नहीं बल्कि निवेश, प्रॉपर्टी और विदेशी आय भी इसमें शामिल करें. 
2. आईटीआर फॉर्म भरने से पहले AIS और 26AS का मिलान जरूर करें. इसमें शेयर बाजार के लेन-देन, म्यूचुअल फंड और बैंक ब्याज की पूरी जानकारी दर्ज होती है.
3. अपनी इनकम के अनुसार सही आईटीआर फॉर्म का चुनाव करें. 
4. यदि आपकी इनकम सिंपल है तो आईटीआर-1, लेकिन थोड़ा भी कॉम्प्लेक्स मामला है तो ITR-2 फॉर्म का चुनाव करें. 
5. यह सुनिश्चित करें कि आपका बैंक खाता एक्टिव और वैलिडेटेड हो, जिसमें आप रिफंड चाहते हैं.
6. टैक्स रिजीम (Tax Regime) का सही चयन करें. 
7. वर्तमान में डिफॉल्ट रूप से न्यू टैक्स रिजीम लागू है. यदि आप ओल्ड टैक्स रिजीम चुनना चाहते हैं तो समय रहते फॉर्म भरें.
8. पुरानी टैक्स व्यवस्था में 80C, 80D जैसी कटौतियों के वैध दस्तावेज पास में रखें.
9. आईटीआर दाखिल करने के 30 दिनों के अंदर आधार OTP या नेट बैंकिंग से ई-वेरिफिकेशन (e-Verification) जरूर करें.