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Income Tax Return Filing Deadline: टैक्सपेयर्स ध्यान दें! 31 अगस्त तक नहीं भरा ITR... तो देना पड़ेगा 5000 रुपए जुर्माना... जानें घर बैठे कैसे दाखिल करें रिटर्न

31 August ITR Filing Deadline: वैसे टैक्सपेयर्स जिनकी इनकम सिर्फ नौकरी से नहीं बल्कि बिजनेस, फ्रीलांसिंग, प्रोफेशनल सर्विस या ट्रेडिंग से होती है, उनके लिए 31 अगस्त की तारीख बेहद अहम है. जी हां, इस तारीख तक इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR दाखिल करना है. यदि यह डेडलाइन पार हो गई तो 1000 से लेकर 5000 रुपए तक जुर्माना देना पड़ेगा. ऐसे में देरी मत कीजिए हम बता रहे हैं घर बैठे चंद मिनटों में आप आईटीआर कैसे दाखिल कर सकते हैं?

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ITR Filing Deadline 31 August 2026 ITR Filing Deadline 31 August 2026

ITR Filing Deadline 31 August 2026: वेतनभोगी, पेंशनभोगी और निवेशक जो ITR-1/ITR-2 फॉर्म भरते हैं, उनके लिए असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) यानी ITR दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 बित चुकी है लेकिन वैसे टैक्सपेयर्स जिनकी इनकम सिर्फ नौकरी से नहीं बल्कि बिजनेस, फ्रीलांसिंग, प्रोफेशनल सर्विस या ट्रेडिंग से होती है, उनके लिए 31 अगस्त की तारीख बेहद अहम है. ऐसे लोगों के लिए ITR-3/ITR-4 फार्म जमा करने की डेडलाइन 31 अगस्त 2026 है.

आईटीआर रिटर्न फाइल करने की इस तारीख को मिस करने पर जुर्माना भरना पड़ सकता है. यदि कोई 31 अगस्त तक आईटीआर दाखिल नहीं कर पाया तो वह बाद में 31 दिसंबर 2026 तक Belated Return दाखिल कर सकता है. हालांकि इसके लिए लेट फीस देनी पड़ेगी. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के अनुसार सालाना कुल आय 5 लाख रुपए से अधिक होने पर देरी से आईटीआर दाखिल करने पर 5000 रुपए तक जुर्माना देना पड़ेगा. यदि कुल सालाना इनकम 5 लाख रुपए तक या उससे कम है तो 1000 रुपए लेट फीस देनी होगी. आईटीआर दाखिल करने से पहले Form 26AS, AIS, TDS और बैंक से जुड़ी जानकारी को जरूर मिला लें.

ITR-3 या ITR-4, आखिर कैसे करें सही फॉर्म का चुनाव
बिजनेस या प्रोफेशन से कमाई होने पर ITR-3 या ITR-4 में से किसी एक फॉर्म को भरना होता है. सही फॉर्म का चुनाव टैक्सपेयर्स की इनकम, कारोबार की प्रकृति और कर व्यवस्था पर निर्भर करता है. ITR-3 फॉर्म उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) के लिए होता है, जिनकी इनकम बिजनेस या प्रोफेशन से होती है और जो प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन यानी अनुमानित कर व्यवस्था का विकल्प नहीं चुनते हैं. यदि करदाता नियमित रूप से अकाउंट बुक्स मेंटेन करता है, उसकी कुल सालाना इनकम 50 लाख रुपए से अधिक है या वह फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस यानी एफएंडओ ट्रेडिंग करता है तो ऐसे मामलों में ITR-3 फॉर्म दाखिल करना होगा. 

ITR-3 के जरिए करदाता वेतन या पेंशन, हाउस प्रॉपर्टी, बिजनेस या प्रोफेशन, कैपिटल गेन्स और अन्य स्रोतों से होने वाली इनकम की जानकारी दे सकते हैं. आपको मालूम हो कि आईटीआर 3 फॉर्म आम तौर पर उन करदाताओं या एचयूएफ के लिए होता है, जो ITR-1, ITR-2 या ITR-4 के तहत रिटर्न दाखिल करने के योग्य नहीं हैं. उधर, ITR-4 यानी सुगम उन व्यक्तियों, एचयूएफ और फर्म के लिए है, जो प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम के तहत बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम घोषित करते हैं और जिनकी कुल इनकम निर्धारित सीमा के भीतर है. अमूमन इसमें 50 लाख रुपए तक की कुल सालाना इनमक वाले टैक्सपेयर्स शामिल हो सकते हैं.आपको मालूम हो कि हर करदाता  ITR-4 का इस्तेमाल नहीं कर सकता. यदि सेक्शन 112ए के तहत शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स या निर्धारित सीमा से अधिक लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स है, अनलिस्टेड इक्विटी शेयर हैं, विदेशी संपत्ति या विदेश से आय है, घाटे को आगे कैरी फॉरवर्ड करना है, या ऐसी आय है जिस पर विशेष दर से टैक्स लगता है तो आईटीआर-4 का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. किसी कंपनी के डायरेक्टर भी इस फॉर्म के जरिए रिटर्न दाखिल नहीं कर सकते.

आईटीआर भरने के लिए 24x7 मिलेगी मदद
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने आखिरी दिनों में करदाताओं की सुविधा के लिए e-Filing और Centralized Processing Center यानी CPC की सपोर्ट लाइन को 24 घंटे उपलब्ध कराया है. यह खास सुविधा 24 अगस्त को सुबह 8 बजे शुरू हुई थी और 31 अगस्त 2026 की रात 11:59 बजे तक जारी रहेगी. टैक्सपेयर्स इसके जरिए आईटीआर फाइलिंग, रिफंड, इंटीमेशन, रेक्टिफिकेशन और दूसरी प्रोसेसिंग से जुड़ी समस्याओं में मदद ले सकते हैं. 

घर बैठे कैसे पाइल करें ITR 

  • सबसे पहले आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल (https://eportal.incometax.gov.in/) पर जाएं.
  • फिर ऑफिशियल वेबसाइट पर पैन और यूजर आईडी डालकर अपना पासवर्ड बनाएं और लॉग इन करें.
  • इसके बाद डैशबोर्ड पर, ई-फाईल आयकर रिटर्न > 'आयकर रिटर्न दाखिल करें' पर क्लिक करें.
  • फिर असेसमेंट ईयर का चुनाव करें. जैसे 2026-27 और फिर 'कंटीन्यू' पर क्लिक करें.
  • इसके बाद आईटीआर फाइल करने के लिए ऑनलाइन ऑप्शन को चुनें.
  • फिर अपनी टैक्स आय और टीडीएस कैलकुलेशन के हिसाब से अपना आईटीआर फॉर्म चुनें.
  • अपने लिए लागू ITR चुनने के बाद सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स को पास रखकर स्टार्ट ऑप्शन पर क्लिक करें.
  • इसके बाद कंप्यूटर या लैपटॉप के स्क्रीन पर कुछ सवाल आएंगे, जो भी आप पर लागू हैं, उसके चेक बॉक्स को मार्क करके कंटीन्यू क्लिक कर दें.
  • डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक अपनी आय और कटौती का ब्योरा अलग-अलग सेक्शन में दर्ज करें.
  • यदि टैक्स लायबिलिटी का मामला है तो आपके दिए गए ब्योरे के आधार पर टैक्स-कैलकुलेशन का संक्षिप्त विवरण दिखेगा.
  • कैलकुलेशन के हिसाब से टैक्स लायबिलिटी बनती है तो अभी भुगतान करें और बाद में भुगतान करें का विकल्प चुन सकते हैं.
  • यदि कोई टैक्स लायबिलिटी नहीं बनती, तो फिर टैक्स चुकाने के बाद, 'प्रिव्यू रिटर्न' पर क्लिक करना होगा.
  • इसके बाद 'प्रिव्यू और रिटर्न जमा करें' डिक्लेरेशन चेकबॉक्स पर क्लिक करके 'वैलिडेशन के लिए आगे बढ़े' ऑप्शन चुनें.
  • प्रिव्यू देखें और 'रिटर्न जमा करें' पेज पर, वेरिफाई के लिए आगे बढ़ें. रिटर्न को वेरिफाई और ई-सत्यापि करना अनिवार्य है.
  • ई-वेरिफाई पेज पर जिस विकल्प का इस्तेमाल कर आप ई-सत्यापन करना चाहते हैं, उसे चुनें और 'कंटीन्यू' पर क्लिक करें.
  • एक बार जब आप रिटर्न को ई-वेरिफाई करा लेते हैं तो फार्म के सफलतापूर्व भरे जाने की सूचना स्क्रीन पर दिखती है.
  • ट्रांजैक्शन आईडी और एकनॉलेजमेंट नंबर स्क्रीन पर मिलता है, जिससे आप भविष्य में अपने आईटीआर फॉर्म का स्टेटस चेक कर सकते हैं.
  • ई-फाइलिंग पोर्टल पर आपका जो मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी रजिस्टर्ड है, फॉर्म सफलता पूर्वक भरने जाने का मैसेज मिल जाएगा.
  • रिटर्न दाखिल करने के बाद 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफाई जरूर कर लें. तभी रिफंड का पैसा मिलेगा.

ऑफलाइन भी दाखिल कर सकते हैं आईटीआर 
वैसे लोग जो ऑनलाइन आईटीआर नहीं दाखिल करना चाहते हैं, वे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट से ऑफलाइन यूटिलिटी डाउनलोड कर सकते हैं. इसमें सभी जानकारियां भरने के बाद फाइल अपलोड करनी होती है और फिर वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी करनी होती है.