Income Tax Notice
Income Tax Notice
ITR Notice Reason and Response: कई बार टैक्सपेयर्स के पास इनकम टैक्स रिटर्न यानी आटीआर (ITR) दाखिल करने के बाद इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से नोटिस आ जाता है. आपको मालूम हो कि आयकर विभाग से यह नोटिस तब भेजा जाता है, जब आपकी आय यानी इनकम, बैंक लेनदेन, निवेश या टैक्स कटौती की जानकारी विभाग के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती. इसके अलावा इनकम टैक्स डिपार्टमेंट नोटिस उन लोगों को भी भेजता है, जो समय पर आईटीआर नहीं भरते या जिनके वित्तीय लेनदेन तय सीमा से अधिक होते हैं.
आयकर विभाग से नोटिस आने पर घबराना नहीं चाहिए बल्कि नोटिस को ध्यान से पढ़ना चाहिए क्योंकि हर नोटिस का मतलब यह नहीं होता कि आपने कोई भारी गलती की है. कई बार नोटिस में सामान्य पूछताछ होती है, जिसमें आयकर विभाग कुछ अतिरिक्त डॉक्यूमेंट्स या स्पष्टीकरण मांगता है. आपको मालूम हो कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की हर नोटिस में जारी करने की तारीख और इसका जवाब दाखिल करने की समय सीमा होती है. इस समय सीमा के अंदर जवाब नहीं देने पर आयकर विभाग आपकी जानकारी के बिना ही रिटर्न प्रॉसेस कर सकता है या जुर्माना भी लगा सकता है.
क्यों आता है इनकम टैक्स नोटिस
आपको मालूम हो कि ITR दाखिल करने और उसे वेरिफाई करने के बाद इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से आगे की प्रोसेसिंग शुरू की जाती है. सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट टैक्सपेयर के भरे रिटर्न को अपने रिकॉर्ड से फॉर्म 16, फॉर्म 26एएस, आईएएस, टीआईएस का इस्तेमाल करते हुए वैलिडिटी करता है. इसमें टैक्स और टैक्सेबल इनकम में अंतर होने पर आपके पास इनकम टैक्स डिपार्टमेंट नोटिस भेज सकता है. कई बार करदाता टैक्स बचाने के लिए कहीं पैसा निवेश तो करते हैं लेकिन आईटीआर भरने के दौरान उसका प्रमाण अपलोड करना भूल जाते हैं. इसके चलते भी नोटिस आ सकता है. आपको मालूम हो कि बैंक खातों में बड़े लेनदेन, शेयर बाजार में भारी निवेश, क्रेडिट कार्ड पर असामान्य खर्च या रियल एस्टेट की खरीद-फरोख्त भी आयकर विभाग के लिए संदेह का कारण बन सकती है. खर्च जब आपकी घोषित इनकम से अधिक दिखाई देता है, तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट यह जांच करना चाहता है कि पैसा कहां से आया.
हर सेक्शन के नोटिस के होते हैं अलग उद्देश
1. धारा 142: यदि किसी टैक्सपेयर्स ने आईटीआर दाखिल नहीं किया है तो आयकर विभाग धारा 142 के तहत नोटिस देकर आईटीआर भरने के लिए कह सकता है.
2. सेक्शन 142(1): आयकर विभाग की ओर से यह नोटिस टैक्सपेयर्स के पास तब आता है जब टैक्स अधिकारी आपकी आईटीआर में दी गई जानकारी से संतुष्ट नहीं होता या उसे ज्यादा विवरण चाहिए होता है.
3. सेक्शन 133(6): करदाता के पास यह नोटिस तब आता है जब टैक्सपेयर की इनकम बैंक स्टेटमेंट, 26AS या AIS में दर्ज आंकड़ों से मेल नहीं खाती. आयकर विभाग इस नोटिस के जरिए स्पष्टीकरण और सत्यापन की मांग करता है.
4. सेक्शन 143(1): इनकम टैक्स रिटर्न फाइल होने के बाद आयकर विभाग उसे इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रोसेस करता है. इसमें आयकर विभाग जांचता है कि किसी टैक्सपेयर ने जितना टैक्स कैलकुलेट किया है, वह उसकी गणना से मेल खाता है या नहीं. करदाता को रिफंड मिलेगा या अतिरिक्त टैक्स देना होगा.
5. सेक्शन 143(2): यह विस्तृत जांच का नोटिस होता है. यदि आपकी आईटीआर आयकर विभाग की प्रारंभिक जांच में संदिग्ध लगती है तो आयकर विभाग का अधिकारी और गहन जांच करने के लिए यह नोटिस भेजता है. इसमें करदाता की इनकम, खर्च, निवेश और सभी टैक्स दावों की विस्तार से जांच की जाती है. यदि किसी करदाता ने गलत जानकारी दी है तो पेनल्टी भी लग सकती है.
6. सेक्शन 148: यह नोटिस उस समय जारी किया जाता है, जब आयकर विभाग को लगता है कि किसी टैक्सपेयर ने अपनी इनकम पूरी तरह से घोषित नहीं की या कुछ जानकारी छिपाई है. इसे रिएसेसमेंट नोटिस कहा जाता है. यह एक गंभीर कैटेगरी का नोटिस होता है. इस नोटिस को भूलकर भी अनदेखा नहीं करना चाहिए.
7. सेक्शन 245: यह नोटिस रिफंड और बकाया टैक्स का समायोजन करने के लिए आयकर विभाग की ओर भेजा जाता है.
8. सेक्शन 156: यह नोटिस आयकर विभाग की ओर से टैक्स, ब्याज या जुर्माना की मांग के लिए भेजा जाता है. यदि असेसमेंट पूरी होने के बाद यदि कोई राशि आपको देनी है तो उसकी वसूली के लिए यह डिमांड नोटिस भेजा जाता है.
9. सेक्शन 139(9): यह नोटिस बताता है कि करदाता की आईटीआर में कोई गंभीर त्रुटि या अधूरी जानकारी है. इसमें करदाता को एक समय सीमा दी जाती है जिसमें त्रुटि ठीक करके संशोधित रिटर्न जमा करना होता है.
आयकर विभाग से नोटिस आने पर क्या करें
1. नोटिस को ध्यान से पढ़ें और जानें कि किस वजह से नोटिस भेजा गया है. इसे किस सेक्शन के तहत जारी किया गया है. आपको क्या जानकारी या दस्तावेज जमा करने हैं.
2. नोटिस की वैधता जांचें क्योंकि कोई फर्जी नोटिस भी भेज सकता है. ऐसे में इनकम टैक्स पोर्टल पर जाकर इसकी ऑथेंटिसिटी चेक करना जरूरी है.
3. नोटिस का कारण जानने के बाद उसका सही जवाब दें. नोटिस में नाम, पता और पैन नंबर सहित शामिल पहचान जानकारी की जांच करें.
4. मूल्यांकन वर्ष और ई-फाइलिंग एकनॉलोजमेंट नंबर वेरिफाई करें.
5. यदि प्रारंभिक आईटीआर दाखिल करते समय कोई गलती हुई है तो आपके पास अपडेटेड रिटर्न दाखिल करने के लिए 15 दिन हैं.
6. यदि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के नोटिस में कोई गलती या अशुद्धि शामिल पाई जाती है तो सुधार रिटर्न जमा करें.
7. नोटिस के कारण और फॉर्म 16/16ए/26 एएस पर आपकी रिपोर्ट की गई आय और नोटिस की आय के बीच गलती को पहचानें.
8. ब्याज और जुर्माने से बचने के लिए धारा 156 के तहत जारी डिमांड नोटिस का 30 दिनों के भीतर जवाब दें.
9. किसी करदाता को लगता है कि आयकर विभाग से जारी नोटिस में दी गई जानकारी सही नहीं है तो वे ऑनलाइन आईटीआर रिवाइज कर सकते हैं या उत्तर दर्ज कर सकते हैं.
10. यदि आपको आयकर विभाग से आए नोटिस को समझने में परेशानी हो रही है तो आप किसी सीए से बात कर सकत हैं. किसी टैक्स एक्सपर्ट से भी सलाह ले सकते हैं.
11. नोटिस का जवाब ऑनलाइन सबमिट करें. जवाब सबमिट करने के बाद acknowledgment ID सुरक्षित रखें. यह भविष्य में उपयोगी होता है.
12. आगे की गतिविधियों पर नजर रखें. बाद में आयकर विभाग क्या कार्रवाई करता है, इसके लिए पोर्टल और ईमेल दोनों चेक करते रहें.