Old VS New Tax Regime
Old VS New Tax Regime
टैक्सपेयर्स (Taxpayers) को बजट 2026 (Budget 2026) से काफी उम्मीदें थीं लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इनकम टैक्स स्लैब (Income Tax Slab) में कोई बदलाव नहीं किया है. इस बार भी इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) यानी आईटीआर (ITR) दाखिल करने के लिए करदाताओं दो विकल्प पहला ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) और दूसरा न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) ही मिलेंगे.
इन दोनों कर व्यवस्थाओं के अपने ही फायदे और नुकसान हैं. आइए जानते हैं टैक्सपेयर्स के लिए ओल्ड या न्यू टैक्स रिजीम में से कौन सी कर व्यवस्था बेहतर है? आपको मालूम हो कि न्यू टैक्स रिजीम में जिन लोगों की सालाना इनकम 12 लाख रुपए से कम है, उन्हें कोई टैक्स नहीं देना होता है. ओल्ड टैक्स रिजीम में 2.5 लाख रुपए तक की सालाना आय पर टैक्स नहीं लगता है. इसके साथ ही ओल्ड टैक्स रिजीम में कई तरह की कटौतियां और छूट मिलती हैं.
ओल्ड टैक्स रिजीम में क्या-क्या मिलते हैं फायदे
ओल्ड टैक्स रिजीम यानी पुरानी टैक्स रिजीम में चार टैक्स स्लैब हैं. पहला टैक्स स्लैब 2.5 लाख रुपए का है. इसमें 0 प्रतिशत टैक्स लगता है. 2.5 से 5 लाख रुपए तक की इनकम पर 5 प्रतिशत टैक्स, 5 से 10 लाख रुपए की इनकम पर 20 प्रतिशत टैक्स, और 10 लाख से अधिक की इनकम पर 30 प्रतिशत टैक्स लगता है.
ओल्ड टैक्स रिजीम में 2.5 लाख रुपए तक की इनकम टैक्स फ्री है. हालांकि, इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 87A के तहत आपको 5 लाख तक की इनकम पर जीरो टैक्स देना होगा. इसके अलावा ओल्ड टैक्स रिजीम में आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत टैक्स छूट दी जाती है. इसके तहत कर्मचारी भविष्य निधि में कर्मचारी का योगदान, एक निश्चित सीमा तक यात्रा भत्ता पर छूट, किराए के अपार्टमेंट में रहने पर मकान किराया भत्ता पर छूट मिलता है. धारा 80CCD (2) के तहत राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) में नियोक्ता का योगदान. धारा 80CCD (1b) के तहत NPS निवेश के लिए 50000 रुपए की कटौती. स्वयं, परिवार और माता-पिता के लिए भुगतान किए गए स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम के लिए धारा 80D कटौती. बचत खाते से अर्जित ब्याज पर धारा 80TTA कटौती. दिव्यांग के मामले, छूट प्राप्त संस्थानों को दान आदि पर भी कटौती की अनुमति ओल्ड टैक्स रिजीम दी जा सकती है.
न्यू टैक्स रिजीम के फायदे
न्यू टैक्स रिजीम में 4 लाख रुपए तक की इनकम यानी आय पर कोई टैक्स नहीं देना होता है. इसमें इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 87A के तहत 12 लाख रुपए तक की इनकम पर टैक्स छूट पा सकते हैं. नई टैक्स रिजीम में सैलरिड पर्सन को 75000 रुपए की स्टेंर्डड डिडक्शन भी मिलता है. हालांकि न्यू टैक्स रिजीम में ओल्ड टैक्स रिजीम की तरह कोई और कटौतियों का लाभ नहीं मिलता है.
न्यू टैक्स रिजीम में कितनी इनकम पर कितना लगता है टैक्स
1. 4 लाख रुपए तक की इनकम पर 0 प्रतिशत टैक्स.
2. 4 से 8 लाख रुपए तक की इनकम पर 5 प्रतिशत टैक्स.
3. 8 से 12 लाख रुपए तक की इनकम पर 10 प्रतिशत टैक्स.
4. 12 से 16 लाख रुपए तक की इनकम पर 15 प्रतिशत टैक्स.
5. 16 से 20 लाख रुपए तक की इनकम पर 20 प्रतिशत टैक्स.
6. 20 से 24 लाख रुपए तक की इनकम पर 25 प्रतिशत टैक्स.
7. 24 लाख रुपए से अधिक की इनकम पर 30 प्रतिशत टैक्स.
नोट: न्यू टैक्स रिजीम में 4 से 8 लाख रुपए तक की इनकम पर 5 प्रतिशत टैक्स और 8 से 12 लाख रुपए तक की इनकम पर 10 प्रतिशत टैक्स सरकार सीधे माफ कर देती है.
कितना बनता है टैक्स
12 लाख रुपए की कमाई पर 60 रुपए टैक्स बनता है. न्यू टैक्स रिजीम में सरकार इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 87ए के तहत 60 हजार रुपए माफ कर देती है. सैलरीड पर्सन को 75 हजार रुपए का स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा मिलता है. इस तरह से इनकी 12.75 लाख रुपए तक की आय टैक्स फ्री हो जाती है. यदि आप सैलरीड पर्सन नहीं हैं तो आपकी आय 12 लाख रुपए से 1 रुपए भी ज्यादा होती है तो आपको 87ए का फायदा नहीं मिलेगा. आपको 4 लाख से अधिक की आय पर टैक्स चुकाना होगा.
ओल्ड और न्यू टैक्स रिजीम में से कौन बेहतर
ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत टैक्सपेयर्स को सेक्शन 80सी, लीव ट्रेवल अलाउंस और रेंट अलाउंस का फायदा मिलता है. सेक्शन 80 सी का फायदा आप अलग-अलग टैक्स सेविंग में निवेश कर उठा सकते हैं. सेक्शन 80सी के तहत 1.5 लाख रुपए का टैक्स माफ हो जाता है. यदि आपने ऐसी किसी स्कीम में अप्लाई किया है, जिसमें सेक्शन 80सी लाभ मिले या कोई अलाउंस से आप टैक्स कम कर पा रहे हैं, तो ओल्ड टैक्स रिजीम ही बेहतर विकल्प रहेगा. उधर, नई टैक्स रिजीम में टैक्सपेयर्स को 12 लाख रुपए तक की इनकम टैक्स फ्री है.
यदि आपको सेक्शन 80 सी का फायदा नहीं मिल रहा है या किसी भी टैक्स सेविंग में अप्लाई नहीं किया है, तो नई टैक्स रिजीम आपके लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है. करदाता ओल्ड या न्यू टैक्स रिजीम में से किसे चुनें. यह फैसला उनकी आय, खर्चों और टैक्स बचाने की योजनाओं पर निर्भर करता है. ऐसे मामलों में जहां करदाताओं के पास कटौती या छूट का दावा करने के सीमित साधन हैं, उनके लिए नई कर व्यवस्था वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अधिक कर बचत प्रदान करेगी. वैसे लोग जो टैक्स का भुगतान सरल तरीके से करना चाहते हैं, उन्हें न्यू टैक्स रिजीम ज्यादा फायदेमंद हो सकता है.