Tax on Provident Fund
Tax on Provident Fund
भविष्य निधि यानी पीएफ को पैसे सहेजने का सबसे सस्ता और सुरक्षित तरीका माना जाता है. लेकिन अब इसमें कुछ नए बदलाव आने वाले हैं. 1 अप्रैल से मौजूदा भविष्य निधि (पीएफ) खातों को दो भागों में बांटने की संभावना है. पिछले साल सितंबर में सरकार नए आयकर नियम लेकर आई थी, जिसके तहत पीएफ खातों को दो भागों में बांटा जाएगा. यह कदम केंद्र को सालाना 2.5 लाख रुपये से अधिक के कर्मचारी योगदान होने की स्थिति में, पीएफ आय पर कर लगाने की अनुमति देगा. नए नियमों के साथ, केंद्र का उद्देश्य उच्च आय वाले लोगों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने से रोकना है.
इसके मुख्य पांच बिंदु हैं:
1) सभी मौजूदा पीएफ खातों को कर योग्य और गैर-कर योग्य योगदान खातों में विभाजित किया जाएगा.
2) केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के मुताबिक गैर-कर योग्य खातों में उनका क्लोजिंग अकाउंट भी शामिल होगा क्योंकि इसकी तारीख 31 मार्च, 2021 होती है. CBDT आयकर विभाग के लिए नीति तैयार करता है.
3) आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, नियम अगले वित्तीय वर्ष यानी 1 अप्रैल, 2022 से लागू हो सकते हैं.
4) सालाना ₹ 2.5 लाख से अधिक के कर्मचारियों के योगदान से पीएफ आय पर नया कर लागू करने के लिए, आई-टी नियमों के तहत एक नई धारा 9डी शामिल की गई है.
5) कर योग्य ब्याज गणना के लिए, हाल ही में समाप्त वित्तीय वर्ष के साथ-साथ सभी पूर्ववर्ती वर्षों के दौरान किसी व्यक्ति द्वारा किए गए कर योग्य के साथ-साथ गैर-कर योग्य योगदान का आकलन करने के लिए, मौजूदा पीएफ खाते के भीतर दो अलग-अलग खाते बनाए जाएंगे.
कौन से खातों पर पड़ेगा असर
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) और सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) द्वारा प्रबंधित ईपीएफ खाते, जहां सरकारी कर्मचारी सेवानिवृत्ति के लिए बचत करते हैं, इस नए नियम से प्रभावित होंगे. कई बड़ी कंपनियां भी हैं जो अपने कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति बचत को 'छूट' ईपीएफ ट्रस्टों के माध्यम से खुद ही मैनेज करती हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनके कर्मचारियों को रिटायरमेंट के वक्त या जरूरत पड़ने पर इन बचत तक पहुंचने के लिए असुविधा न हो. सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) खाते नए कर से प्रभावित नहीं होंगे और न ही राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत जमा की गई रिटायरमेंट रकम पर इसका असर पड़ेगा.