क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि बैंक के ऐप पर कोई पॉप-अप बंद करने की कोशिश की और आप सीधे पर्सनल लोन वाले पेज पर पहुंच गए? या फिर क्रेडिट कार्ड लेना तो दो मिनट में हो गया, लेकिन उसे बंद करने का तरीका ढूंढने में आधा घंटा लग गया? कई बार बैंकिंग ऐप्स और वेबसाइट्स में ऐसे डिजाइन और मैसेज इस्तेमाल किए जाते हैं, जो ग्राहकों को बिना उनकी मर्जी के कोई फैसला लेने के लिए प्रेरित करते हैं.
1 जनवरी 2027 से लागू होंगे नए नियम
अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 15 जून 2026 को नए नियम जारी करते हुए बैंकों और उनके एजेंटों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले 11 तरह के डार्क पैटर्न पर रोक लगा दी है. ये नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे. इससे पहले सभी बैंकों को अपनी वेबसाइट, मोबाइल ऐप और डिजिटल प्लेटफॉर्म की जांच कर इन भ्रामक तरीकों को हटाना होगा.
RBI के मुताबिक, डार्क पैटर्न ऐसे डिजाइन या तरीके होते हैं, जो ग्राहकों को भ्रमित करके या उन पर दबाव बनाकर ऐसा काम करवाते हैं, जो वे सामान्य स्थिति में नहीं करना चाहते.
1. फॉल्स अर्जेंसी: जल्दी फैसला लेने का दबाव
कई बार बैंक मैसेज भेजते हैं कि 'ऑफर आज ही खत्म हो जाएगा' या 'अभी लोन लें, बाद में ब्याज बढ़ सकता है'. ग्राहक को लगता है कि मौका हाथ से निकल जाएगा, इसलिए वह जल्दबाजी में फैसला कर लेता है. RBI ने कहा है कि जल्दबाजी का माहौल बनाना गलत है. अगर ऑफर वास्तविक है तो ठीक, लेकिन सिर्फ ग्राहक को प्रभावित करने के लिए काउंटडाउन या दबाव बनाना अब नहीं चलेगा.
2. बास्केट स्नींकिंग: बिना पूछे सर्विस जोड़ देना
लोन लेते समय कई बार बीमा या फ्रॉड प्रोटेक्शन जैसी सुविधाएं पहले से टिक की हुई मिलती हैं. ग्राहक ध्यान नहीं देता और अतिरिक्त शुल्क उसके बिल में जुड़ जाता है. RBI ने साफ किया है कि किसी भी अतिरिक्त सेवा को ग्राहक की स्पष्ट सहमति के बिना जोड़ना प्रतिबंधित होगा.
3. कन्फर्म शेमिंग: 'ना' कहने पर अपराधबोध कराना
मान लीजिए आप कोई सुरक्षा सेवा नहीं लेना चाहते और स्क्रीन पर लिखा आता है, 'नहीं, मुझे अपने अकाउंट की सुरक्षा की चिंता नहीं है.' ऐसे वाक्य ग्राहक को अपराधबोध महसूस कराने के लिए बनाए जाते हैं. RBI ने कहा है कि ग्राहक को शर्मिंदा, डरा या दोषी महसूस कराकर फैसला लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता.
4. फोर्स्ड एक्शन: जो काम करना है, उससे पहले दूसरा काम करवाना
कई बैंक ऐप्स में लॉग-इन करते ही विज्ञापन वाला पॉप-अप आता है. उसे बंद करने की कोशिश करने पर ग्राहक लोन या किसी अन्य प्रोडक्ट वाले पेज पर पहुंच जाता है. इसी तरह कुछ ऐप्स बिना जरूरत के कॉन्टैक्ट लिस्ट, कैमरा या लोकेशन की अनुमति मांगते हैं. RBI ने कहा है कि जरूरी कारण के बिना ऐसी अनुमति लेना या ग्राहक को किसी अन्य सेवा की ओर धकेलना गलत है.
5. सब्सक्रिप्शन ट्रैप: लेना आसान, बंद करना मुश्किल
कई वित्तीय उत्पादों में साइन-अप करना बेहद आसान होता है, लेकिन उन्हें बंद करने का विकल्प छिपा दिया जाता है. ग्राहक को कई पेज, कॉल या ईमेल के चक्कर लगाने पड़ते हैं. RBI ने कहा है कि जिस तरह किसी सेवा को शुरू करना आसान है, उसी तरह उसे बंद करना भी आसान होना चाहिए.
6. इंटरफेस इंटरफेरेंस: डिजाइन के जरिए मनचाहा फैसला करवाना
कई बार Accept का बटन बड़ा और चमकीला होता है, जबकि Decline छोटा और हल्के रंग में दिखाया जाता है. इससे ग्राहक अनजाने में बैंक के पक्ष वाला विकल्प चुन लेता है. RBI ने ऐसे डिजाइन को भी डार्क पैटर्न माना है. ग्राहक के सामने सभी विकल्प समान रूप से दिखने चाहिए.
7. बेट एंड स्विच: दिखाया कुछ, दिया कुछ और
यह सबसे आम शिकायतों में से एक है. विज्ञापन में कम ब्याज दर दिखाई जाती है, लेकिन आवेदन के समय अलग शर्तें सामने आ जाती हैं. कई बार प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्क पहले नहीं बताए जाते. इसी तरह लाइफटाइम फ्री क्रेडिट कार्ड का प्रचार किया जाता है, लेकिन बाद में पता चलता है कि कुछ शर्तें पूरी करने पर ही फीस माफ होगी. अब ऐसी अधूरी या भ्रामक जानकारी देना नियमों के खिलाफ होगा.
8. ड्रिप प्राइसिंग: धीरे-धीरे असली कीमत बताना
ग्राहक को शुरुआत में सिर्फ आकर्षक कीमत दिखाई जाती है. बाद में प्रोसेसिंग फीस, सर्विस चार्ज और अन्य शुल्क जोड़कर कुल लागत बढ़ा दी जाती है. RBI का कहना है कि ग्राहक को शुरुआत से ही सभी शुल्कों की पूरी जानकारी मिलनी चाहिए.
9. डिसगाइज्ड एडवर्टाइजमेंट: विज्ञापन को जरूरी सूचना जैसा दिखाना
कई बार बैंक की नोटिफिकेशन देखकर लगता है कि अकाउंट से जुड़ा कोई जरूरी अपडेट है. लेकिन उसे खोलने पर पता चलता है कि वह लोन, बीमा या किसी अन्य प्रोडक्ट का प्रचार है. ऐसे भ्रामक विज्ञापन अब स्वीकार नहीं किए जाएंगे.
10. नैगिंग: बार-बार परेशान करना
अगर ग्राहक किसी विकल्प को पहले ही मना कर चुका है, तो उसी बात के लिए बार-बार पॉप-अप या नोटिफिकेशन भेजना भी डार्क पैटर्न माना जाएगा. RBI का कहना है कि ग्राहक की पसंद का सम्मान होना चाहिए.
11. ट्रिक वर्डिंग: उलझाऊ भाषा का इस्तेमाल
कुछ वेबसाइट्स पर लिखा होता है, 'ऑफर नहीं चाहिए तो इस बॉक्स को अनचेक करें.' ऐसे वाक्य ग्राहक को भ्रमित कर सकते हैं. अब बैंकों को साफ, सरल और सीधे शब्दों में ग्राहक की सहमति लेनी होगी.
शिकायत कहां करें?
अगर 1 जनवरी 2027 के बाद भी किसी बैंक या उसके एजेंट द्वारा ऐसे तरीके अपनाए जाते हैं, तो ग्राहक पहले बैंक के शिकायत निवारण अधिकारी से संपर्क कर सकता है. समस्या का समाधान न होने पर मामला RBI ओम्बड्समैन तक ले जाया जा सकता है.
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