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Repo Rate Hike: आरबीआई ने 25 BPS बढ़ाया रेपो रेट, होम-कार लोन की EMI बढ़ सकती है, FD पर अच्छा ब्याज मिल सकता है

रेपो रेट बढ़ने का दूसरा पहलू बचत करने वालों के लिए है. अगर बैंक अपनी डिपॉजिट दरें बढ़ाते हैं तो FD और कुछ दूसरी फिक्स्ड इनकम वाली योजनाओं पर ज्यादा ब्याज मिल सकता है. यानी एक तरफ कर्ज लेने वालों के लिए ब्याज का बोझ बढ़ सकता है.

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RBI hikes repo rate by 25 bps RBI hikes repo rate by 25 bps
हाइलाइट्स
  • होम लोन की EMI बढ़ने की आशंका

  • 43 महीने बाद बढ़ा 0.25 फीसदी रेपो रेट

RBI ने रेपो रेट में 0.25% यानी 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% कर दिया है. इसका सीधा असर आने वाले समय में आम लोगों के लोन और EMI पर पड़ सकता है. खासकर होम लोन, कार लोन और दूसरे फ्लोटिंग रेट वाले लोन की ब्याज दरें बढ़ सकती हैं. वहीं, जिन लोगों ने FD या दूसरी फिक्स्ड इनकम स्कीम में पैसा लगाया है, उन्हें आगे अच्छा ब्याज मिलने की उम्मीद है. RBI ने यह फैसला बढ़ती महंगाई के बीच लिया है. यह फरवरी 2023 के बाद रेपो रेट में पहली बढ़ोतरी है. इससे पहले 2025 में RBI ने कुल 1.25% की कटौती की थी और रेपो रेट 5.25% पर आ गया था.

EMI पर क्या असर पड़ेगा?
रेपो रेट बढ़ने का मतलब बैंकों के लिए RBI से पैसा लेना महंगा होना है. इसका असर बैंक अपनी लोन ब्याज दरों में बढ़ोतरी के जरिए ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं. हालांकि, EMI उसी दिन और हर ग्राहक की तुरंत नहीं बढ़ेगी. बैंक अपनी पॉलिसी और लोन के प्रकार के हिसाब से ब्याज दर में बदलाव करेंगे. फ्लोटिंग रेट वाले होम और दूसरे लोन लेने वालों पर इसका असर ज्यादा पड़ सकता है. ब्याज दर बढ़ने पर या तो EMI बढ़ सकती है या लोन चुकाने की अवधि बढ़ सकती है. फिक्स्ड रेट वाले लोन पर आमतौर पर तुरंत असर नहीं पड़ता.

घर या कार खरीदने वालों की जेब पर पड़ेगा असर
अगर कोई व्यक्ति नया होम लोन या कार लोन लेने की तैयारी कर रहा है, तो उसे बैंक की नई ब्याज दर जरूर देखनी चाहिए. छोटी-सी ब्याज दर बढ़ोतरी भी लंबे समय के लोन में कुल ब्याज भुगतान को बढ़ा सकती है. पहले से लोन चल रहा है तो बैंक से यह पता करना जरूरी है कि आपका लोन फ्लोटिंग है या फिक्स्ड और RBI की बढ़ोतरी का असर आपकी ब्याज दर पर कब से पड़ेगा.

FD और सेविंग करने वालों के लिए राहत की उम्मीद
रेपो रेट बढ़ने का दूसरा पहलू बचत करने वालों के लिए है. अगर बैंक अपनी डिपॉजिट दरें बढ़ाते हैं तो FD और कुछ दूसरी फिक्स्ड इनकम वाली योजनाओं पर ज्यादा ब्याज मिल सकता है. यानी एक तरफ कर्ज लेने वालों के लिए ब्याज का बोझ बढ़ सकता है, वहीं बचत करने वालों को बेहतर रिटर्न का फायदा मिल सकता है.

RBI ने महंगाई रोकने के लिए बढ़ाया रेट
RBI का मुख्य उद्देश्य महंगाई को नियंत्रण में रखना है. अगस्त में भारत की खुदरा महंगाई 4.82% रही, जो RBI के 4% के मध्यम अवधि के लक्ष्य से लगातार तीसरे महीने ऊपर थी. ईंधन और खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी का असर भी अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है. इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, रुपए पर दबाव और वैश्विक स्तर पर बॉन्ड यील्ड बढ़ने जैसी चुनौतियां भी हैं. दूसरी ओर भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ मजबूत बनी हुई है. अप्रैल-जून तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8% रही, जो RBI के 7% के अनुमान से ज्यादा है. 

रेपो रेट होता क्या है?
रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर RBI दूसरे बैंकों को कम अवधि के लिए पैसा देता है. जब RBI इसे बढ़ाता है तो बैंकों के लिए पैसा महंगा हो जाता है और इसका असर लोन की ब्याज दरों पर पड़ सकता है. वहीं रेपो रेट घटने पर बैंकों के लिए पैसा सस्ता होता है और इसका फायदा कई बार ग्राहकों को कम ब्याज दर के रूप में मिल सकता है.