
Saharanpur Special training
Saharanpur Special training
उत्तर प्रदेश में सहारनपुर के बलियाखेड़ी ब्लॉक के गांव शेखपुरा कदीम में दिव्यांग महिलाओं और पुरुषों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है. पंजाब नेशनल बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI) के जरिए ENABLE INDIA के सहयोग से यह प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है. इसमें दिव्यांगजनों के साथ स्वयं सहायता समूह की महिलाएं भी हिस्सा ले रही हैं. प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों को हुनरमंद बनाकर स्वरोजगार से जोड़ना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है. करीब 12 दिन के इस प्रशिक्षण में सातवें दिन तक प्रतिभागी मोमबत्ती बनाने के कई तरीके सीख चुके हैं. खास बात यह है कि यहां साधारण मोमबत्तियों के बजाय 100 से 120 तक अलग-अलग डिजाइन की आकर्षक मोमबत्तियां तैयार करना सिखाया जा रहा है.
डिजाइनर कैंडल बनाना सिखाया जा रहा-
प्रशिक्षण में दिव्यांग महिलाओं और पुरुषों को कपल्स, फूलों, बॉल्स और अन्य आकर्षक डिजाइनों वाली मोमबत्तियां बनाना सिखाया जा रहा है. इसके अलावा दीपावली पर इस्तेमाल होने वाले सजावटी दीपकों को रंगने और आकर्षक बनाने की जानकारी भी दी जा रही है. इन उत्पादों का इस्तेमाल जन्मदिन की पार्टियों, शादियों, होटलों और रेस्टोरेंट में भी किया जा सकता है.

7 दिन में बहुत कुछ सीखा- रहमानी
प्रशिक्षण ले रही रहमानी ने बताया कि पहले उन्हें लगता था कि मोमबत्ती केवल एक या दो तरह की ही होती है, लेकिन यहां आने के बाद उन्हें इसके कई डिजाइन बनाने का हुनर सीखने को मिला है. उन्होंने कहा कि 7 दिनों में उन्होंने बहुत कुछ सीखा है और अब उन्हें घर बैठे अपना काम शुरू करने की उम्मीद जगी है. उनके मुताबिक, मेहनत और काम के स्तर के अनुसार वे अपनी आमदनी बढ़ाने की कोशिश कर सकती हैं.

दिव्यांगजनों को आर्थिक मजबूती देना मकसद- कोऑर्डिनेटर
RSETI के कोऑर्डिनेटर अमित कुमार चौबे ने बताया कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य दिव्यांगजनों को बेसहारा महसूस करने के बजाय अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर देना है. उन्होंने कहा कि समाज में आर्थिक रूप से मजबूत व्यक्ति की पहचान भी मजबूत होती है, इसलिए दिव्यांगजनों को रोजगार से जोड़ना जरूरी है.

ट्रेनिंग पूरी तरह से फ्री- अमित कुमार
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण पूरी तरह निशुल्क है. इसमें भोजन, ड्रेस, स्टेशनरी और मोमबत्ती बनाने के लिए जरूरी प्रशिक्षण सामग्री भी संस्थान की ओर से उपलब्ध कराई जा रही है. प्रतिभागियों को केवल मोमबत्तियां बनाना ही नहीं, बल्कि उनकी मार्केटिंग, ग्राहकों से बातचीत और उत्पादों की बिक्री के तरीके भी सिखाए जा रहे हैं. संस्थान का प्रयास है कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रतिभागी अपने घर से ही छोटा व्यवसाय शुरू कर सकें और धीरे-धीरे उसे बड़े स्तर तक ले जा सकें.

2 साल तक टीम संपर्क में रहेगी-
इस प्रशिक्षण की खास बात यह भी है कि 12 दिन का कोर्स पूरा होने के बाद संस्थान की टीम लगभग दो साल तक प्रतिभागियों के संपर्क में रहेगी. इस दौरान उन्हें स्वरोजगार, ऋण सुविधाओं, सरकारी योजनाओं और बाजार से जुड़ने में मदद देने की योजना है. प्रतिभागियों को मेलों और बाजारों में अपने उत्पाद बेचने के साथ-साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिक्री के लिए पंजीकरण कराने की जानकारी भी दी जाएगी. दीपावली का त्योहार नजदीक होने के कारण सजावटी मोमबत्तियों और दीपकों की मांग को देखते हुए यह प्रशिक्षण दिव्यांगजनों के लिए रोजगार का नया अवसर बन सकता है. इस पहल से उम्मीद है कि दिव्यांग महिलाएं और पुरुष अपने हुनर के दम पर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेंगे और समाज में सम्मान के साथ अपनी पहचान स्थापित कर सकेंगे.
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