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सहारनपुर में लाल सिंदूर की खेती से बदलेगी किसानों की तकदीर… एक बार पेड़ लगाओ, पीढ़ियों तक कमाई पाओ

सहारनपुर का मौसम सिंदूर की खेती के लिए काफी अनुकूल है. इस खेती में रासायनिक खाद, कीटनाशक और ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं पड़ती. पेड़ों को केवल सामान्य सिंचाई की आवश्यकता होती है और किसान उसी खेत में दूसरी फसलें भी उगा सकता है.

Sindoor Farming Sindoor Farming

सहारनपुर से खेती-किसानी में एक नई मिसाल सामने आ रही है. यहां किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ ऐसी खेती की ओर बढ़ रहे हैं, जो कम लागत में लंबे समय तक बड़ा मुनाफा दे सके. बेहट विधानसभा क्षेत्र के गांव खुशहालीपुर निवासी किसान सुधीर कुमार सैनी ने सिंदूर की प्राकृतिक खेती शुरू कर जिले में नई पहचान बनाई है. करीब चार साल पहले ट्रायल के तौर पर लगाए गए कुछ पौधे अब सैकड़ों पेड़ों में बदल चुके हैं. खास बात यह है कि एक बार लगाए गए सिंदूर के पेड़ 10 से 20 साल तक लगातार उत्पादन दे सकते हैं, जिससे किसानों को हर साल अच्छी आमदनी होने की उम्मीद है.

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बेहद किफायती है सिंदूर की खेती
सुधीर कुमार का कहना है कि सहारनपुर का मौसम सिंदूर की खेती के लिए काफी अनुकूल है. इस खेती में रासायनिक खाद, कीटनाशक और ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं पड़ती. पेड़ों को केवल सामान्य सिंचाई की आवश्यकता होती है और किसान उसी खेत में दूसरी फसलें भी उगा सकता है. उनके अनुसार प्राकृतिक सिंदूर की बाजार में भारी मांग है, क्योंकि वर्तमान में ज्यादातर सिंदूर सिंथेटिक तरीके से तैयार किया जाता है, जिसमें मरकरी और अन्य रसायनों का इस्तेमाल होता है. इससे त्वचा संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं. वहीं प्राकृतिक सिंदूर औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है और धार्मिक उपयोग के साथ महिलाओं के श्रृंगार में भी सुरक्षित माना जाता है.

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खेत में लगे हैं 100 से अधिक सिंदूर के पेड़ हैं 
किसान सुधीर कुमार ने बताया कि अभी उनके खेत में 100 से अधिक सिंदूर के पेड़ हैं और आने वाले वर्षों में हर पेड़ से 2 से 3 किलो तक सिंदूर मिलने की उम्मीद है. बाजार में प्राकृतिक सिंदूर की कीमत 3000 से 5000 रुपये प्रति किलो तक मिल सकती है. ऐसे में एक किसान बिना ज्यादा लागत लगाए लाखों रुपये की कमाई कर सकता है. उन्होंने बताया कि पेड़ पर लगने वाले फल के बीज को सुखाकर और पीसकर प्राकृतिक सिंदूर तैयार किया जाता है. अब वह छोटे-छोटे पैक बनाकर बाजार में उतारने की तैयारी कर रहे हैं ताकि पूजा-पाठ और घरेलू उपयोग के लिए लोगों तक शुद्ध सिंदूर पहुंच सके. उनकी इस पहल को देखकर आसपास के किसान भी प्रेरित हो रहे हैं और सिंदूर की खेती के बारे में जानकारी लेने गांव पहुंच रहे हैं.

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सिंदूर की फसल किसानों की आय दोगुनी करने में मददगार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पिछले वर्षों में प्राकृतिक और पारंपरिक खेती को बढ़ावा देने की अपील करते हुए औषधीय और वैल्यू बेस्ड फसलों की खेती पर जोर दिया था. ऑपरेशन सिंदूर और 'वोकल फॉर लोकल' अभियान के बाद देशभर में प्राकृतिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ी है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सिंदूर जैसी वैल्यू एडेड फसलें किसानों की आय दोगुनी करने में मददगार साबित हो सकती हैं. कम लागत, लंबी अवधि तक उत्पादन और बाजार में अच्छी कीमत मिलने के कारण आने वाले समय में पश्चिमी यूपी के किसान भी इस खेती की ओर तेजी से बढ़ सकते हैं.
 

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