
Bhadohi Carpet Industry
Bhadohi Carpet Industry
उत्तर प्रदेश के भदोही की पहचान दुनिया भर में अपनी बेमिसाल कालीनों के लिए है और अब सरकारी योजनाओं का सहारा इस पारंपरिक उद्योग को नई रफ्तार दे रहा है. एक जिला, एक उत्पाद (ODOP) योजना के तहत पूंजी, बाजार और हुनर इन तीनों मोर्चों पर मिल रहे सहयोग से कालीन कारोबार को नई मजबूती मिल रही है.
1351 करोड़ का सब्सिडी वाला लोन-
सरकार के मुताबिक मार्जिन मनी योजना के तहत 347 लाभार्थियों को 131 करोड़ रुपये से अधिक का सब्सिडी युक्त ऋण दिया गया. जिसमें 12 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी दी गई. 546 उद्यमियों को देश-विदेश के फेयर में उत्पाद प्रदर्शित करने के लिए 6.85 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है. वहीं, 2,350 लोगों को प्रशिक्षण और टूलकिट देकर कालीन उद्योग के लिए कुशल कारीगरों की नई पौध तैयार की जा रही है.
88 से अधिक देशों में कालीन निर्यात-
भदोही की हस्तनिर्मित कालीन का पूरे विश्व में अपना एक अलग दबदबा है. यहां से अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जापान और मध्य-पूर्व सहित 88 से अधिक देशों में कालीन निर्यात किया जाता है. पूरे भारत से लगभग 13 हजार करोड़ की कालीन विदेशों में निर्यात होता है. इसमें अकेले 60 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी अकेले भदोही कालीन परिक्षेत्र का है.
ODOP योजना से मिल रही मदद-
भदोही के इस पारम्परिक उद्योग में नई जान फूंकने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने एक जिला एक उत्पाद में भदोही की कालीन उद्योग को चयनित किया. अब इस उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए 2018 से ही ओडीओपी योजना के तहत इस उद्योग में आने वाले नए उद्यमियों के साथ पहले से काम कर रहे उद्यमियों को सहयोग प्रदान किया जा रहा है. ओडीओपी के तहत कई योजनाएं चल रहीं हैं. जिससे जुड़ कर कालीन उद्यमी अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा रहे हैं तो वहीं इस योजना को सराहना भी कर रहे हैं.

सेंटर संचालकों ने बताया अनुभव-
कालीन बुनाई सेंटर के संचालक अक्षय उपाध्याय ने कहा कि इस योजना से जुड़कर ज्ञानपुर ब्लॉक के रामकापूरा गांव निवासी अक्षय उपाध्याय ने एक कालीन बुनाई सेंटर स्थापित कर कालीन का प्रोडक्शन और लोगों को रोजगार देने का काम कर रहे हैं. अक्षय कुमार उपाध्याय ने बताया कि ODOP योजना ऐसी योजना है, जिसने नीचे तबके के लोगों को भी ऊपर उठाने का काम किया है. मुझे इस योजना के तहत 50 लाख रुपये का लोन मिला है, जिससे मैं प्रतिमाह 2,000 गलीचों का उत्पादन कर रहा हूं और 100 से अधिक लोगों को रोजगार भी मिला है. मुझे इस योजना के तहत धन मिला और मैंने इस काम को आगे बढ़ाया. इससे मुझे भी लाभ हो रहा है और जिन लोगों को रोजगार मिला है, उन्हें भी लाभ हो रहा है.
यह सरकार की बहुत अच्छी योजना- कालीन निर्यातक
कालीन निर्यातक अमित मौर्या ने कहा कि क्रिएटिव रग्स कंपनी के कालीन निर्यातक अमित मौर्य ने बताया कि सरकार की ODOP योजना के तहत 2 करोड़ रुपये का ऋण लिया है, जिसकी सब्सिडी भी मुझे मिल चुकी है. यह सरकार की बहुत अच्छी योजना है. सभी एक्सपोर्टरों को इसका लाभ उठाना चाहिए, ताकि हम अच्छे से काम कर सकें और हमें फंड की कमी न हो.
उन्होंने बताया कि उनका पूरे विश्व में कारोबार है और अमेरिका, यूरोप तथा ऑस्ट्रेलिया में ज्यादा निर्यात होता है, हालांकि कस्टमर के स्तर पर उनका काम पूरी दुनिया में है. उन्होंने कहा कि ODOP योजना से उद्यम बढ़ाने में मदद मिली है. जिस काम को हम लोग कर रहे हैं, उसमें फंड की बहुत जरूरत होती है और अगर फंड उपलब्ध है तो इस काम को आसानी से किया जा सकता है.
कालीन निर्यातक एवं कालीन निर्यात संवर्धन परिषद के प्रशासनिक सदस्य इम्तियाज अहमद ने बताया कि यह सरकार की बहुत अच्छी योजना है. इसमें छोटे बुनकर और ठेकेदार ODOP से लोन लेकर अपने कारखाने बना रहे हैं. कारखाने बनाने का फायदा यह है कि 10-20 मजदूरों को रखकर वहां अपना काम कर रहे हैं. इससे लोगों को रोजगार मिल रहा है और हमारा उत्पादन भी बढ़ रहा है। साथ ही, समय से हमारे ऑर्डर भी पूरे हो जा रहे हैं.
उन्होंने बताया कि अगर भदोही जिले की बात करें तो लगभग 200 से 250 कारखाने बनाने वालों ने इस योजना का लाभ लिया है. काफी निर्यातकों ने भी ODOP से लोन लेकर अपना सेटअप शुरू किया और निर्यात का काम किया है. इस योजना में आसानी से लोन हो जाता है और बहुत ज्यादा दिक्कतें नहीं होती हैं. इसलिए इस योजना का लाभ लेने में आसानी है.
कालीन निर्यातक पियूष बरनवाल ने बताया कि ODOP की शुरुआत प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की थी. उत्तर प्रदेश पहला ऐसा प्रदेश है, जिसने वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट के विचार को अपनाया है. अन्य जिलों में भी यह योजना चल रही है. हमारे यहां कालीन उद्योग प्रमुख उत्पाद है.

उन्होंने बताया कि हमारे उद्योग में इस योजना का महत्व इसलिए ज्यादा बढ़ जाता है, क्योंकि यहां प्रोडक्शन साइकिल बहुत लंबा है. दूसरे उद्योगों में जो चीज बनाई जाती है, वह एक सप्ताह या 10 दिन में तैयार हो जाती है और उसका पैसा भी जल्दी वापस आ जाता है. लेकिन हमारे उद्योग में प्रोडक्शन की संरचना ऐसी है कि 21 प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद कालीन तैयार होती है. धागे से शुरू करने से लेकर कालीन बनाने तक काफी समय लगता है और एक-एक कालीन बनाने में चार महीने से लेकर 12 महीने तक लग जाते हैं.
उन्होंने कहा कि सरकार की यह योजना इसलिए मददगार साबित होती है, क्योंकि हमें पूंजी की जरूरत होती है और सरकार आसान शर्तों, आसान प्रक्रिया और सब्सिडी के साथ इसे उपलब्ध कराती है. मैंने भी एक यूनिट के माध्यम से इसका लाभ लिया है. निश्चित रूप से यह योजना उद्योग के लिए और हमारे जिले की अर्थव्यवस्था में अच्छा योगदान करने वाली स्कीम है. पीयूष बरनवाल ने इस योजना के तहत 25 लाख की मार्जिन मनी से अपने उद्यम को आगे बढ़ाया है.
डिप्टी कमिश्नर इंडस्ट्रीज दया शंकर सरोज ने बताया कि माननीय मुख्यमंत्री द्वारा एक जनपद, एक उत्पाद (ODOP) योजना की शुरुआत वर्ष 2018 में की गई थी. इसके तहत तीन-चार तरह की योजनाएं संचालित हैं. पहली योजना टूलकिट एवं प्रशिक्षण योजना है. इसके अंतर्गत किसी भी जनपद के व्यक्ति को प्रशिक्षण दिलाकर निशुल्क टूलकिट प्रदान की जाती है. 10 दिन की ट्रेनिंग के दौरान प्रतिदिन 200 रुपये के हिसाब से कुल 2,000 रुपये का मानदेय भी दिया जाता है.
उन्होंने बताया कि इसके साथ जो उद्यमी अपने उद्योग को आगे बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए वित्त पोषण योजना के तहत बैंक के माध्यम से फाइनेंस कराकर उद्योग स्थापित करने में सहायता की जाती है. इसमें 25 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जाती है.
उन्होंने बताया कि इस ओडीओपी योजना के तहत अब तक टूलकिट एवं प्रशिक्षण योजना में 2,350 लोगों को टूलकिट देकर प्रशिक्षण दिया गया है. वित्त पोषण योजना के तहत 347 लोगों को 1,228 लाख रुपये की सब्सिडी दी जा चुकी है. वहीं, विपणन सहायता योजना के तहत 546 बुनकरों से लेकर निर्यातकों तक को विभिन्न मेलों और प्रदर्शनियों में भाग लेने के लिए सहायता दी गई है. इसमें अब तक 6 करोड़ 50 लाख रुपये का रीइंबर्समेंट दिलाया जा चुका है.
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