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कैसे केंद्र सरकार की PMFME योजना उत्तर प्रदेश के हर जिले की खास उपज को दे रही नई पहचान? समझिए

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) के तहत, हर जिले के लिए एक खास कृषि उत्पाद चिन्हित करने की कवायद कैसे किसानों और छोटे फूड प्रोसेसिंग कारोबारियों को जोड़ रही है? फरवरी 2024 में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने देशभर के 35 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 713 जिलों के लिए यह सूची जारी की, जिसमें उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिले शामिल हैं.

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MPFME Scheme MPFME Scheme

उत्तर प्रदेश की वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना जहां हस्तशिल्प और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े उत्पादों पर केंद्रित है, वहीं इसी सोच पर आधारित एक अलग योजना खासतौर पर खाद्य उत्पादों और कृषि उपज के लिए काम करती है. यह है केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (PMFME), जिसे 2020 में आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत शुरू किया गया था.

PMFME की ODOP पद्धति क्या है?
PMFME योजना भी "एक जिला, एक उत्पाद" के उसी सिद्धांत पर काम करती है, लेकिन खासतौर पर खाद्य उत्पादों के लिए। हर राज्य अपने जिलों के लिए एक ऐसा खाद्य उत्पाद चुनता है, जो उस इलाके में बड़े पैमाने पर उगाया या बनाया जाता है, चाहे वह कोई फल-सब्जी हो, अनाज हो, या पारंपरिक खाद्य पदार्थ. फरवरी 2024 में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने देशभर के 35 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 713 जिलों के लिए यह सूची जारी की, जिसमें उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिले शामिल हैं.

उत्तर प्रदेश में कौन सा जिला, कौन सी फसल?
मंत्रालय की आधिकारिक सूची के मुताबिक, कुछ अहम उदाहरण इस प्रकार हैं:

  • मेंथा (पुदीना): बाराबंकी, रामपुर, संभल और सुल्तानपुर जिलों के लिए चिन्हित उत्पाद.
  • आंवला: अमेठी, फतेहपुर, प्रतापगढ़ और रायबरेली जिलों के लिए चिन्हित उत्पाद.
  • आम: लखनऊ, मऊ, सीतापुर और उन्नाव जैसे कई जिलों के लिए.
  • काला नमक चावल: गोरखपुर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर और संत कबीर नगर जैसे पूर्वांचल के जिलों के लिए.
  • गुड़ (जैगरी): अयोध्या, बागपत, बिजनौर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, पीलीभीत सहित कई जिलों के लिए.

इससे किसानों और छोटे उद्यमियों को क्या मिलता है?
PMFME योजना के तहत चिन्हित उत्पादों से जुड़े किसानों, फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (FPOs), सहकारी समितियों और सेल्फ हेल्प ग्रुप्स (SHGs) को इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट, ब्रांडिंग-मार्केटिंग सहायता और टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन के लिए क्रेडिट एक्सेस मुहैया कराया जाता है. पूरे देश के लिए यह योजना 2020 से 2025 तक कुल 10,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ लागू की गई थी, जिसका खर्च केंद्र और राज्य सरकारों के बीच साझा होता है.

स्थानीय उपज से राष्ट्रीय ब्रांड तक-
इस पद्धति का मकसद है कि बिखरे हुए छोटे उत्पादकों को एक साझा पहचान के तहत जोड़ा जाए, ताकि कच्चे माल की खरीद, साझा सुविधाओं और मार्केटिंग में बड़े पैमाने का फायदा मिल सके. योजना के तहत NAFED और TRIFED जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर कुछ चुनिंदा उत्पादों के लिए राष्ट्रीय ब्रांड भी विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें सहारनपुर के मल्टीफ्लोरा शहद के लिए "मधुमंत्र" ब्रांड शामिल है.

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