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UPI चार्ज की चर्चा से दुकानदार परेशान, बोले- ग्राहक से एक्स्ट्रा लेना पड़ेगा, नहीं तो जेब से भरेंगे

नोएडा में बातचीत के दौरान कुछ व्यापारियों ने बताया कि उन्होंने अपनी दुकानों पर UPI भुगतान से जुड़े नोटिस भी लगाने शुरू कर दिए हैं. हार्डवेयर और बिल्डिंग मटेरियल का कारोबार करने वाले व्यापारी विकास जैन ने कहा कि कारोबार पहले से ही प्रभावित है और ऑनलाइन खरीदारी के कारण बाजार में ग्राहकों की आवाजाही कम हुई है.

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UPI पेमेंट को लेकर नए फ्रेमवर्क के बाद मर्चेंट पेमेंट पर संभावित चार्ज को लेकर व्यापारियों के बीच चिंता बढ़ गई है. खासकर 2,000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि अगर कोई शुल्क लागू होता है तो उसका भुगतान व्यापारी करेगा या ग्राहक से अतिरिक्त रकम ली जाएगी. इसी मुद्दे को लेकर आजतक ने नोएडा के कई कारोबारियों से बातचीत की. व्यापारियों का कहना है कि कम मार्जिन वाले कारोबार में अगर अतिरिक्त शुल्क उनकी जिम्मेदारी बनता है तो इसका सीधा असर कमाई पर पड़ेगा.

हालांकि, सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P (Person to Person) UPI ट्रांजैक्शन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा. यानी एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को UPI के जरिए पैसे भेजता है तो यह भुगतान मुफ्त रहेगा. चिंता मुख्य रूप से मर्चेंट को किए जाने वाले भुगतान को लेकर है.

दुकानों पर UPI भुगतान से जुड़े नोटिस लगाने शुरू
नोएडा में बातचीत के दौरान कुछ व्यापारियों ने बताया कि उन्होंने अपनी दुकानों पर UPI भुगतान से जुड़े नोटिस भी लगाने शुरू कर दिए हैं. हार्डवेयर और बिल्डिंग मटेरियल का कारोबार करने वाले व्यापारी विकास जैन ने कहा कि कारोबार पहले से ही प्रभावित है और ऑनलाइन खरीदारी के कारण बाजार में ग्राहकों की आवाजाही कम हुई है.

विकास जैन के मुताबिक, अब ग्राहक मोबाइल से सामान ऑर्डर कर घर पर मंगाना पसंद करता है. ऐसे में अगर UPI पर अतिरिक्त लागत आती है तो छोटे व्यापारियों की परेशानी और बढ़ सकती है. उन्होंने बताया कि उनकी दुकान पर UPI से भुगतान करने वाले ग्राहकों को अतिरिक्त रकम देने की बात कही जा रही है. उनका कहना है कि जब व्यापार में पहले ही मार्जिन कम है तो दुकानदार अपनी जेब से अतिरिक्त चार्ज क्यों भरे.

व्यापारी करण ग्रोवर ने बताया कि उनके कारोबार में करीब 50 से 70 प्रतिशत तक भुगतान UPI के जरिए होता है. उनके मुताबिक अगर अतिरिक्त चार्ज व्यापारी या ग्राहक, किसी पर भी पड़ता है तो इसका असर दोनों पर होगा.

व्यापारियों का मार्जिन करीब 5 प्रतिशत तक
करण ग्रोवर ने कहा कि व्यापारियों का मार्जिन करीब 5 प्रतिशत तक रह जाता है. ऐसे में अगर इसी कम मार्जिन में से टैक्स और अन्य खर्चों के साथ UPI का अतिरिक्त शुल्क भी देना पड़ा तो कारोबार चलाना मुश्किल होगा. उन्होंने कहा कि ग्राहक पर अतिरिक्त बोझ पड़ने से वह बाजार से खरीदारी करने के बजाय ऑनलाइन खरीदारी को प्राथमिकता दे सकता है.

उन्होंने कहा कि व्यापारी अब कोशिश करेंगे कि जहां संभव हो, ग्राहक कैश में भुगतान करे. हालांकि, अगर ग्राहक अतिरिक्त रकम देने के लिए तैयार नहीं होता है तो ऐसी स्थिति में शुल्क का बोझ दुकानदार को ही उठाना पड़ सकता है. करण के मुताबिक कारोबार बंद नहीं किया जा सकता, इसलिए किसी न किसी तरह इस लागत को एडजस्ट करना पड़ेगा.

इंटीरियर कारोबार से जुड़े व्यापारी आरिफ ने भी संभावित UPI चार्ज को लेकर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में कारोबार का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन भुगतान के जरिए होता है और कैश लेनदेन काफी कम हो गया है. ऐसे में डिजिटल पेमेंट पर अतिरिक्त लागत व्यापारियों के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है.

कारोबार की लागत और बढ़ जाएगी
आरिफ के मुताबिक 2,000 रुपये से अधिक के सामान पर व्यापारी पहले ही टैक्स और अन्य खर्च वहन करता है. ऐसे में अगर डिजिटल पेमेंट पर अलग से चार्ज आता है तो कारोबार की लागत और बढ़ जाएगी. उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश होगी कि यह अतिरिक्त रकम ग्राहक से ली जाए, लेकिन ग्राहक तैयार नहीं हुआ तो व्यापारी को अपनी जेब से भुगतान करना पड़ सकता है.

आरिफ ने बताया कि उनके कारोबार में कैश से भुगतान करने वाले ग्राहक बहुत कम हैं, जबकि करीब 90 से 95 प्रतिशत भुगतान ऑनलाइन माध्यम से आता है. ऐसे में UPI से जुड़े किसी भी अतिरिक्त शुल्क का सीधा असर कारोबार पर पड़ने की आशंका है. उन्होंने कहा कि त्योहारों का सीजन भी आने वाला है और कारोबार पहले से ही धीमा है, इसलिए अतिरिक्त लागत व्यापारियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है.

नोएडा के कारोबारियों की बातों से साफ है कि मर्चेंट UPI पेमेंट पर संभावित शुल्क को लेकर व्यापारियों के बीच असमंजस बना हुआ है. कुछ दुकानदार ग्राहकों से अतिरिक्त रकम लेने की बात कर रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि ग्राहक तैयार नहीं हुआ तो उन्हें यह खर्च खुद उठाना पड़ेगा. व्यापारियों का कहना है कि आगे स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि शुल्क की व्यवस्था किस तरह लागू होती है और उसका वास्तविक बोझ किस पर पड़ता है.

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