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US-ईरान तनाव से शेयर बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स 808 अंक टूटा, निफ्टी भी 24 हजार के नीचे, कच्चा तेल $96 पार

बाजार में बिकवाली का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सेंसेक्स के 30 में से 28 शेयर गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए. Eternal, Infosys, HCL Technologies और UltraTech Cement समेत कई बड़े शेयर दबाव में रहे.

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US-Iran Tensions Trigger Market Rout US-Iran Tensions Trigger Market Rout

शेयर बाजार में बुधवार की शुरुआत निवेशकों के लिए भारी गिरावट के साथ हुई. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर दुनियाभर के बाजारों पर दिखा. भारतीय बाजार भी इससे अछूता नहीं रहा. कारोबार शुरू होते ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेज गिरावट देखने को मिली.

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 808 अंक यानी 1.05% तक टूटकर 76,135 के स्तर पर आ गया. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 24 हजार के नीचे फिसल गया और 23,786 के निचले स्तर तक पहुंच गया. बाद में निफ्टी करीब 219 अंक की गिरावट के साथ 23,827 के आसपास कारोबार करता दिखा.

निफ्टी में भी 50 में से 46 शेयर लाल निशान में रहे
बाजार में बिकवाली का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सेंसेक्स के 30 में से 28 शेयर गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए. Eternal, Infosys, HCL Technologies और UltraTech Cement समेत कई बड़े शेयर दबाव में रहे. निफ्टी में भी 50 में से 46 शेयर लाल निशान में रहे. Shriram Finance में सबसे ज्यादा करीब 2.62% की गिरावट देखने को मिली.

ट्रंप के बयान से बढ़ी टेंशन
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका का होर्मुज स्ट्रेट पर लगभग पूरा कंट्रोल है. उन्होंने ईरान की अर्थव्यवस्था के पूरी तरह टूटने की बात भी कही. ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि वह ईरान को बातचीत की मेज पर लाने के लिए दबाव बनाने के मूड में नहीं हैं. उनके इन बयानों के बाद निवेशकों की चिंता और बढ़ गई.

कच्चा तेल 96 डॉलर के पार पहुंचा
अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा. ब्रेंट क्रूड लगातार तीसरे दिन चढ़ा और करीब 5% उछलकर 96 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. WTI क्रूड भी 92 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया. महंगे कच्चे तेल से भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों की चिंता बढ़ती है. हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल भारत का चालू खाता घाटा कम है और विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत है, इसलिए तेल की बढ़ी कीमत का असर संभाला जा सकता है.

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी निवेशकों के लिए खतरा
बाजार की चिंता सिर्फ युद्ध और महंगे तेल तक सीमित नहीं है. अमेरिका की 10 साल की बॉन्ड यील्ड 4.80% तक पहुंच गई है. इससे महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ी है. अगर अमेरिकी 10 साल की बॉन्ड यील्ड 5% तक पहुंचती है तो दुनियाभर के शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट आ सकती है. जापान और ब्रिटेन में भी बॉन्ड यील्ड कई साल के ऊंचे स्तर के करीब पहुंच गई है.

एशियाई बाजारों में भी हाहाकार
US-Iran तनाव और महंगे तेल का असर एशियाई बाजारों पर भी साफ दिखा. दक्षिण कोरिया का KOSPI करीब 3.84% टूट गया. जापान का Nikkei 225 करीब 2.81% गिरा, जबकि Hong Kong का Hang Seng 1.25% और चीन का Shanghai Composite 0.82% नीचे रहा.