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ODOP योजना ने बदली बाराबंकी के दो भाइयों की जिंदगी, विदेशों तक पहुंचा कारोबार, सालाना एक करोड़ का टर्नओवर

वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट योजना ने बाराबंकी के दो भाइयों की जिंदगी बदल दी. वैसे तो दोनों भाइयों की तीन पीढ़ियां इस काम से जुड़ी रहीं. लेकिन आमदनी काफी सीमित थी. लेकिन ओडीओपी योजना ने कारोबार की तस्वीर बदल दी. अब दोनों भाई अमेरिका और जर्मनी में कारोबार कर रहे हैं. इसके साथ ही अब उनकी नजर जापानी मार्केट पर है.

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एक जिला, एक उत्पाद (ODOP) योजना ने उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के जावेद और जफर अमद के कारोबार को नई दिशा दी है. दोनों भाई सालाना एक करोड़ रुपए का टर्नओवर का कारोबार संभाल रहे हैं. दोनों भाई ओडीओपी योजना की मदद से मिलने वाले फायदे से काफी खुश हैं.

37 साल से बुनकर कार्य से जुड़े हैं दोनों भाई-
जैदपुर गांव के निवासी जावेद और जफर पिछले लगभग 37 सालों से बुनकर कार्य से जुड़े हैं. उनके परिवार में तीन पीढ़ियों से यह काम हो रहा है. हालांकि उनका कहना है कि कड़ी मेहनत के बावजूद उनकी आमदनी सीमित थी और आर्थिक परेशानियां भी थी. 

ODOP से बदली जिंदगी-
दोनों भाइयों ने बताया कि साल 2018 में उन्होंने एक जिला, एक उत्पाद (ODOP) योजना के तहत अपने पारंपरिक काम को एक बड़े कारोबार में बदलने की शुरुआत की थी. शुरुआती दौर में उन्हें लगभग 18 लाख रुपये का लोन मिला था. इस लोन से उन्होंने पावरलूम की 8 मशीनें लगाई और करीब 20 बुनकरों को रोजगार दिया. उन्होंने बताया कि महिलाओं के समहू को भी उन्होंने इस काम से जोड़ा है.

उनके मुताबिक, कारोबार बढ़ाने के लिए वे कानपुर से दिल्ली, मुंबई तक गए. धीरे-धीरे उनके उत्पादों की मांग बढ़ी और अब बड़े बाजार में उनके उत्पाद की पहचान बनी है. उनका कहना है कि आज कारोबार 1 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर तक पहुंच गया है और करीब 60 लोग इससे जुड़े हैं. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय ODOP योजना के साथ अपनी मेहनत को दिया. साथ ही, उन्होंने पीएम मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी आभार जताया है.

अमेरिका, जर्मनी जैसे देशों तक पहुंचा कारोबार-
कारोबार दोनों भाइयों ने बताया कि वे मुख्य रूप से कॉटन से स्टोल, स्कार्फ और गमछा तैयार करते हैं. उनके मुताबिक अब उनके उत्पाद देश के साथ-साथ दुनिया में भी पहुंच रहे हैं. हाल ही में उन्हें टेक्सटाइल विभाग की ओर से प्रगति मैदान में प्रदर्शनी लगाने और अपने उत्पादों को दर्शाने का मौका मिला था. उनका कहना है कि यहां जापान, जर्मनी और अमेरिका जैसे देशों के नागरिकों ने उनके उत्पाद को पसंद किया और उन्हें ऑर्डर दिया. उनका कहना है कि फिलहाल सैंपल तैयार किए जा रहे हैं.

जफर के मुताबिक साल 2021 में उनके स्टोल की सप्लाई अमेरिका की कंपनी वॉलमार्ट को भी की गई थी. उन्हें करीब 20 हजार पीस के ऑर्डर मिले थे, जिसकी कीमत 30 लाख रुपये थी. उन्होंने बताया कि सरकारी योजना से मिले लोन को उन्होंने समय से चुका दिया और अब कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए वे लोन पर निर्भर नहीं हैं. जफर के मुताबिक, अब उन्हें एक्सपोर्ट के ऑर्डर मिल रहे हैं और इसमें भुगतान भी एडवांस में किया जाता है.

जफर के मुताबिक उनके लिए यह गर्व की बात है कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के गले में नजर आने वाला रुमाल भी बाराबंकी बुनकरों द्वारा तैयार किया गया था.

जफर की नजर जापानी मार्केट पर-
जावेद और जफर ने बताया कि उनकी नजर अब जापानी बाजार पर है. उन्होंने बताया कि 21 अगस्त को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में जापानी प्रतिनिधिमंडल ने उनके उत्पाद देखे थे और उनके स्टोल उन्हें काफी पसंद आए थे. जफर के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल के तहत अब उन्हें जापान जाने का मौका मिलने वाला है. वहां वे जापान के कारोबार और उत्पादन से जुड़े सिस्टम को समझेंगे और अपने उत्पादों के लिए नए बाजार की संभावनाओं की भी तलाश करेंगे.

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