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क्या है मार्जिन मनी स्कीम? जिससे यूपी में नया कारोबार शुरू करने और बिजनेस को बढ़ाने में मिल रही मदद

वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) कार्यक्रम के तहत मार्जिन मनी स्कीम, उत्तर प्रदेश के कारीगरों और उद्यमियों को कर्ज का बोझ कम करने में कैसे मदद कर रही है? चलिए इसे समझते हैं.

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UP CM Yogi Adityanath (Photo/PTI) UP CM Yogi Adityanath (Photo/PTI)

उत्तर प्रदेश सरकार के वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) कार्यक्रम के तहत चलने वाली एक अहम वित्तीय सहायता योजना ODOP मार्जिन मनी स्कीम है. यह स्कीम 24 सितंबर 2018 को मंजूर की गई थी. इसका मकसद कारीगरों और उद्यमियों को अपना कारोबार शुरू करने, उसे अपग्रेड करने या बढ़ाने के लिए सब्सिडी के रूप में आर्थिक मदद देना है, ताकि उन्हें बैंक से लोन लेना आसान हो और वे खुद का रोजगार शुरू कर सकें.

मार्जिन मनी का मतलब क्या है?
आसान भाषा में समझें तो जब कोई व्यक्ति अपना कारोबार शुरू करने के लिए बैंक से लोन लेता है, तो बैंक पूरी लागत नहीं देता - उसका एक हिस्सा व्यक्ति को खुद लगाना होता है, जिसे "मार्जिन मनी" कहा जाता है. इस स्कीम के तहत सरकार यह मार्जिन मनी सब्सिडी के रूप में देती है, यानी यह लोन नहीं है, बल्कि सीधी आर्थिक मदद है. बाकी बची हुई रकम के लिए उद्यमी को खुद अपने पास से पैसा लगाना होता है या बैंक से लोन लेना होता है.

कौन उठा सकता है इसका लाभ?

  • आवेदक की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए.
  • किसी शैक्षणिक योग्यता की जरूरत नहीं है.
  • आवेदक किसी भी बैंक या वित्तीय संस्थान का डिफॉल्टर (कर्ज न चुकाने वाला) नहीं होना चाहिए.

कितनी सब्सिडी मिलती है?
स्कीम के तहत प्रोजेक्ट की लागत के हिसाब से अलग-अलग स्तर पर सब्सिडी दी जाती है:

  • 25 लाख रुपये तक की परियोजना लागत पर: प्रोजेक्ट लागत का 25% (अधिकतम 6.25 लाख रुपये).
  • 25 लाख से 50 लाख रुपये तक: प्रोजेक्ट लागत का 20% या 6.25 लाख रुपये, जो भी ज्यादा हो.
  • 50 लाख से 150 लाख रुपये तक: प्रोजेक्ट लागत का 10% या 10 लाख रुपये, जो भी ज्यादा हो.
  • 150 लाख रुपये से ज्यादा की लागत पर: प्रोजेक्ट लागत का 10% (अधिकतम 20 लाख रुपये).

नया या पुराना, हर कारोबार के लिए है ये स्कीम-
यह स्कीम नई और पुरानी, दोनों तरह की इकाइयों के लिए है यानी जो व्यक्ति नया कारोबार शुरू करना चाहते हैं और जो अपना मौजूदा कारोबार बढ़ाना चाहते हैं, दोनों इसका लाभ ले सकते हैं. आवेदन की प्रक्रिया में बैंकों की भी भूमिका होती है, क्योंकि प्रोजेक्ट लागत का बाकी हिस्सा बैंक फाइनेंसिंग से ही पूरा होता है.

असल जिंदगी में इसका असर-
ODOP पोर्टल पर दर्ज कई सक्सेस स्टोरी बताती हैं कि यह स्कीम कोविड-19 महामारी के दौरान खासतौर पर मददगार साबित हुई, जब कई छोटे कारोबारियों को अपना काम फिर से खड़ा करने के लिए पूंजी की जरूरत थी. जैसे बरेली की जरी-जरदोजी कारीगर दलजीत कौर और वाराणसी के जरी साड़ी कारोबारी राकेश कांत राय ने इसी स्कीम की मदद से अपने कारोबार को दोबारा पटरी पर लाया.
आवेदन msme.up.gov.in पोर्टल के जरिए किया जा सकता है.

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