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पहले बेचना था मुश्किल, अब बोने से पहले ही हो जाती है बुकिंग... काला नमक चावल उगाने वाले किसानों के लिए वरदान बन गई ODOP योजना

सिद्धार्थनगर के किसान वन डिस्ट्रिक्ट, एक प्रोडक्ट (ODOP) योजना का फायदा उठा रहे हैं. यह योजना उनके लिए वरदान साबित हो रही है. पहले जो किसान अपने प्रोडक्ट काला नमक चावल को बेचने के लिए दर-दर भटक रहे थे, अब उन्हीं किसानों के पास चावल बोने से पहले खरीदारों के फोन आने लगते हैं.

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ODOP Scheme ODOP Scheme

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में ODOP योजना के तहत 2018 में काला नमक चावल को चयनित किया गया हैं. यह योजना अब यहां के किसानों के लिए वरदान साबित हुई हैं. किसान ने बताया कि पहले काला नमक चावल को हम 60, 70 रुपए किलो बेचने के लिए दर-दर भटकते थे. वहीं, अब ODOP योजना में चयनित होने के बाद इसके गुणों को सरकार ने व्यापक प्रचार प्रसार करवाया. जिससे इसकी डिमांड बढ़ गई. 

200 रुपए किलो बिक रहा काला नमक चावल-
आज स्थिति यह हैं कि काला नमक चावल 180 से 200 रुपए किलो बिक रहा हैं. अब तो मिल भी नहीं पा रहा हैं. पहले बेचने के लिए दर दर भटकते थे. तब सरकारी अधिकारी कर्मचारी ही थोड़ा बहुत खरीद लेते थे. लेकिन अब खेत में लगाते ही व्यापारी एडवांस रुपए देकर अनुबंध कर लेते हैं कि हमें ही दीजियेगा. वहीं, इसकी ग्लाइसिमिक इंडेक्स कम होने की वजह से इसे सुगर पेशेंट भी खा सकते हैं.

सब्सिडी वाले अनुदान से प्रोडक्शन को बढ़ावा-
उद्यामिता विभाग भी सब्सिडीयुक्त अनुदान देकर इस चावल से प्रोडक्ट निर्माण को बढ़ावा दे रहा हैं. जिससे जनपद में ही अब काला नमक चावल से बिस्किट व बेकरी के प्रोडक्ट बनाये जा रहे हैं. साथ ही नव उद्यमी इसको किसानों से खरीदकर पैकेजिंग करके बड़े-बड़े शहरों में व ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स पर बिक्री के लिए उपलब्ध करा रहे हैं. 2017 में जहां काला नमक चावल महज 2 हजार हेक्टेयर में बोया जा रहा था. वहीं, डिमांड बढ़ने की वजह से 18 हजार हेक्टेयर में खेती की जा रही हैं. और इससे अधिक क्षेत्र में उत्पादन की आवश्यकता हैं.

आइये आपको बताते हैं कि ODOP में चयनित होने के बाद काला नमक चावल का उत्पादन करने वाले किसान, उद्यमी व अधिकारी ने क्या बता रहे हैं?

लाभार्थी अजय रावत ने बताया कि अजय रावत बुद्धा डिलाइट्स वन जिला वन प्रोडक्ट के अंतर्गत हमने जो महसूस किया जो लाभ हमें मिला, वह गवर्नमेंट का एक अच्छा स्कीम रहा. उसके तहत हम यहां अपने किसानों से जुड़कर लगभग तीसरी पीढ़ी में हम काला नमक लगा रहे हैं और उत्पादन कर रहे हैं. और इसके ओडीओपी 2018 में आने के बाद इसको अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय बाजार में भेजने के अवसर मिल गए. इसके तहत हमने वैल्यू एडिशनल प्रोडक्ट भी लगाया, जो काला नमक का वैल्यू एडिशनल प्रोडक्ट है. उसमें हम कुकीज बनाते हैं. वैल्यू एडिशनल प्रोडक्ट में कुकीज हम ऐसी बनाते हैं, जो औषधीय हो. जिसमें जिंक प्रोटीन व और सारी मात्रा होती है. इसके साथ ही साथ इसमें विटामिन ए की भी प्रचुर मात्रा होती है. 

अजय बताते हैं कि ODOP के तहत मुझे 2 करोड़ 6 लाख रुपए अनुदान जिला उद्योग विभाग सिद्धार्थनगर के द्वारा मिला. इसमें अनेक परियोजनाएं थी, जिसका मुझे लाभ मिला. इसके तहत जहां भी मिला या महोत्सव आदि लगे, वहां हमने अपने प्रोडक्ट के स्टॉल लगाकर पूरे प्रदेश और विदेश में हमने इसकी चर्चा परिचर्चा की. इस प्रोडक्ट को अन्य जगहों पर भी पहुंचा इससे हमें ओडीओपी अच्छा मंच मिला. अच्छा प्लेटफॉर्म मिला. जिससे हम इस सरकार के आभारी हैं.

उन्होंने बताया कि 2018 से पहले न बाजार अच्छा था और न ही हमें इसका गुण पता था. ग्लाइसेमिक इंडेक्स के बारे में नहीं पता था कि इतना अच्छा होता हैं. सारी चीजें हमें गवर्नमेंट के थ्रू पता चलीं. इसका बाजार बढ़ा. जो काला नमक पहले 50-60 रुपए भी नहीं पूछा जाता है, वह आज ₹200 किलो बाजारों में है और उसकी डिमांड भीबहुत बढ़ी है. यह ओडीओपी की ही देन है, उत्तर प्रदेश सरकार की ही देन है.

पहले 5 हजार रुपए क्विंटल, अब 20 हजार रुपए बेचता हूं- पंकज चौबे
किसान पंकज चौबे कहते हैं कि पहले हालत बहुत खराब थे. लेकिन इतनी दिक्कतें थी कि जहां आज 20 हजार रुपए कुंतल बेच रहा हूं, वहीं इसे पहले 5 हजार रुपए और 6 हजार रुपए में भी बेचने के लिए तरसता था. उन्होंने बताया कि साल 2018 में जब से सरकार ने ओडीओपी योजना लागू की, सिद्धार्थनगर के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि है. जैसे अलीदापुर क्षेत्र का काला नमक सबसे अच्छा माना जाता है. अब हमारे जिले की शान काला नमक हो चुका है. पहले हम लोग 6 बीघा, 8 बीघा, 10 बीघा बोते थे. लेकिन इस बार हम लोगों का टारगेट है कि कम से कम 40 से 50 बीघा बोया जाए.

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के लखनऊ, गोरखपुर और तमाम ऐसे जिले हैं, जहां से फोन आते हैं कि भईया हमें भी काला नमक दीजिये. मान के चलिए, जब सीजन आता है तो तीन-चार सौ कुंतल तो मेरे पास से ही लोग लेकर जाते हैं. तो काला नमक की डिमांड ऑटोमैटिक बढ़ गई है. इसमें कोई शक नहीं. इस योजना का इसमें बड़ा योगदान है. सरकार के बहुत बड़ी उपलब्धि है. 

उन्होंने कहा कि जहां पहले 6 हजार में बिकता था, वहीं आज 20 हजार रुपए क्विंटल बिक रहा हैं. यह सरकार की देन है. पहले जहां भटकते थे लोग कि भैया ले लो काला नमक, तो पहले कोई लेता नहीं था और आज गोरखपुर, संतकबीर नगर, खलीलाबाद, मुंबई और दिल्ली जैसी बहुत सी जगह से फोन आते हैं कि हमारे लिए व्यवस्था किया जाए और हम लोग व्यवस्था भी करते हैं. तो यह उपलब्धि सरकार की हैं.

किसान मोहित कहते हैं कि देखिए काला नमक तो हम लोग काफी समय से बोते चले आए हैं. हम लोगों के बाबा, दादा बोते थे काला नमक. लेकिन तब काला नमक की इतनी डिमांड नहीं थी. पहले जब बेचने की सोचते थे तो काला नमक बिकता नहीं था. कंडीशन यह थी कि उस समय 40 रुपए, 45 रुपए, 35 रुपए... इस तरह रेट पर बिकता था. अब जब सरकार द्वारा वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट योजना लागू की गई है, तब से हम लोग जब खेत में बोते हैं, इसे तभी से बाहर से लोग आकर बुक कर देते हैं कि काला नमक हमें ही देना. किसी और को नहीं देना. एडवांस पैसा भी दे देते हैं. 

उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था कि हम लोग दुकान दुकान खोजते थे कि कोई काला नमक लेने वाला मिल जाए. लेकिन कोई पूछता नहीं था. और आज हम लोग खेत में जब पौधा बैठाते हैं, तभी से समझ लीजिए कि बिकना शुरू जाता है. वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट सरकार महत्वाकांक्षी योजना थी. इसकी वजह से ही लोग जानने लगे हैं कि अलीदापुर बेल्ट में काला नमक चावल उगाया जाता हैं. पहले लोग जानते नहीं थे. अब डॉक्टर लोग भी इसकी विशेषताएं बताते है. पहले लोग जानते नहीं थे. जब से सरकार ने ओडीओपी के तहत उसको चुना है, तब से कम से कम हम लोग का हौसला बढ़ा है कि काला नमक को आप लोग बाहर भी जान रहे हैं. काला नमक से किसानों का जीवन संवर रहा है. ज़ब यह विदेश में बिक रहा है, विदेश में लोग इसको जान रहे हैं. हम लोग तो उगा ही रहे थे, इसलिए हम लोग तो उसका महत्व जानेंगे ही.

पहले रेट सस्ता था, अब इसका महत्व बढ़ा है- बृजभूषण
किसान बृजभूषण चौधरी ने कहा कि पहले रेट बहुत सस्ता था. 6 हजार सात हजार रूपये कुंतल मिलता था. वह भी बड़ी मुश्किल से. ज़ब कोई सरकारी कर्मचारी या अधिकारी मिलता था तो वह ले लेते थे. लेकिन ज़ब से ओडीओपी का प्रचार हुआ, तब से इसका महत्व बहुत ज्यादा बढ़ गया. मार्केट में अब यह 15 से 20 हजार रुपए क्विंटल मिल रहा हैं. 10 हजार, 12 हजार रुपए क्विंटल धान बिक रहा हैं, बहुत फायदा हुआ हैं.

306 लोगों को दिया गया अनुदान- उपायुक्त उद्योग
सिद्धार्थनगर के जिला उद्योग प्रोत्साहन और उद्यमिता विकास केंद्र के उपायुक्त उद्योग शिवशंकर ने बताया कि यह योजना 2018 मे लागू किया गया हैं. जिसमें 306 लोगों के बीच 917 लाख रुपए का अनुदान दिया गया हैं. 2018 से पहले काला नमक की खेती 2 हजार हेक्टेयर में होता था. वर्तमान समय में 20 हजार हेक्टेयर में इसकी खेती की जा रही है, क्योंकि किसानों को इसका उचित मूल्य मिल रहा है. 

जब चावल के डिमांड बढ़ने लगा, तब इसके लिए विभाग द्वारा व्यापक प्रचार प्रसार किया गया और आगे भी किए जाने की संभावना हैं. इसे फ्लिपकार्ट, अमेजॉन नंबर सीएफसी के माध्यम से भी प्राप्त किया जा सकता है. इसकी पैकिंग प्रोसेसिंग आदि के लिए सीएफसी का निर्माण कराया गया है, जो बांसी तहसील के मधवापुर में स्थित है.

इसका व्यापक प्रचार प्रसार प्रशासन के सहयोग से कराया गया है कई बार गोष्ठी आयोजित की गई है. खासकर काला नमक का क्रेता विक्रेता सम्मेलन भी आयोजित किया गया है. और इसे बढ़ाने के लिए कृषि विभाग से संपर्क करके काफी इसका व्यापक प्रचार प्रसार कराया गया हैं.

2 बार जिले को मिलाअवॉर्ड-
इसी जनपद को प्रधानमंत्री द्वारा 2 बार अवॉर्ड भी मिला, क्योंकि किसानों की आय इससे दिन प्रतिदिन दुगनी होती जा रही है. इसलिए अब अधिकांश किसान काला नमक को पैदा करने में रुचि ले रहे हैं, क्योंकि उनको सरकार की तरफ से विभाग की तरफ से कृषि विभाग की तरफ से हर सुविधा उपलब्ध हो रही है.

कई प्रजातियां भी की गई तैयार-
काला नमक की कई प्रजातियां भी तैयार की गई है, जैसे किरन 101, किरन 102, किरन 103. क्योंकि कुछ किसान कहते थे कि पैदावार कम हो रहा है, इसीलिए नई प्रजातियां तैयार की गई हैं. इसके उत्पादन को बढ़ाने के लिए एक जनपद एक उत्पाद के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाता है. जिसमें 10 दिन का प्रशिक्षण दिया जाता है. इसमें काला नमक की खेती कैसे की जाती है, पैकिंग कैसे की जाती है, कैसे मार्केटिंग होगा, इससे सन्दर्भ में बताया जाता है. 

2018 के बाद से अब तक 1400 किसानों को चावल के संदर्भ में प्रशिक्षण दिया जा चुका है. किसानों से संपर्क करने पर वह बताते हैं कि यह हमारे लिए बहुत उपयोगी चीज हैं. इसमें उन्हें टेंपरेचर मापने के लिए मॉइश्चराइजर मशीन भी दी जाती है. जिससे उन्हें यह पता चल जाए कि धान में नमी बरकरार है कि नहीं है. अगर अधिक है तो उन्हें वेयरहाउस में रखने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई, वहां रख सकते हैं.

काला नमक चावल का प्रोडक्शन बढ़ाने पर जोर- सीडीओ
सिद्धार्थनगर के  CDO बलराम सिंह बताते हैं कि एक जनपद एक उत्पाद के तहत काला नमक राइस आता हैं. इसे बुद्धा राइस भी कहते हैं. इसके उत्पादन को बढ़ाने के लिए सरकार ने विभिन्न योजनाएं चला रखी है. उसके लिए हम लोग सब्सिडी भी दे रहे हैं. और इससे जो बाई प्रोडक्ट बना रहे हैं, जैसे लोगों ने एक कंपनी लगाई हैं. उसमें भी लगभग 2 करोड़ की सब्सिडी उन्हें दी गई हैँ. जिससे कि वह उत्पाद बना रहे हैं. कुछ लोग इसमें पैकेजिंग का भी काम कर रहे हैं. महिला समूहों को भी हम प्रेरित करके इससे जोड़ रहे हैं कि वह भी अपने तरीके से ODOP से प्रोडक्ट बनाएं, जैसे कोई बिस्किट बनाएं या पापड़ बनाए, जो भी चीज उससे बना सकते हैं. इसके लिए भी हम लोग प्रयास कर रहे हैं.

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