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सैलरी वाले लोग इस बात को बखूबी जानते हैं कि उनकी सैलरी का एक हिस्सा पीएफ में जाता है. पीएफ में कर्मचारी और कंपनी दोनों की तरफ से योगदान किया जाता है. लंबे समय तक किए गए इस योगदान से एक प्रकार की सेविंग तैयार होती है, जिसपर समय-समय पर ब्याज़ भी मिलता है. पीएफ एक ऐसी सेविंग है जो अनजाने में होती रहती है, और इसके बोझ का पता भी नहीं चलता.
हालांकि, लोगों में पीएफ रूल को लेकर कुछ गलत धारणा है, जिसके चलते वह कई गलत फैसले ले बैठते हैं. जिनसे उन्हें नुकसान उठाना पड़ जाता है. ऐसे में जरूरी है कि पीएफ से जुड़े नियमों को अच्छी तरह समझा जाए, ताकि इस फंड का अच्छी तरह से इस्तेमाल किया जा सके. इस लोगों के मन में रूल को लेकर गलत धारणा को दूर करने के लिए इस बातों को अच्छे से समझें.
बहुत से लोगों को लगा है कि पीएफ के नियमों के अनुसार रिटायरमेंट की उम्र 60 वर्ष है. जबकि यह गलत है. पीएफ के नियमों के रिटायरमेंट की ऑफिशियल उम्र 58 साल होती है. अगर आप 58 साल के बाद भी काम करते हैं, तो आपके पीएफ अकाउंट में पैसा जमा होना बंद हो जाएगा. 58 वर्ष की उम्र के बाद पीएफ खाते में कोई रकम जमा नहीं होती.
जो लोग सोचते हैं कि उनके रिटायर होने के बाद उनके पीएप अमाउंट पर ब्याज मिलना बंद हो जाएगा, तो वह गलत हैं. रिटायरमेंट के बाद भी पीएफ फंड पर तीन साल तक ब्याज मिलता है. यानि अगर आप 58 साल की उम्र में रिटायरमेंट होते हैं, तो आपको ब्याज़ 61 साल की उम्र तक मिलता रहेगा.
हालांकि कुछ मामलों में जहां लोग जल्दी वॉलंट्री रिटायरमेंट ले लेते हैं. जैसे आप 42 या 45 साल की उम्र में रिटायर हो जाते हैं. तब भी आपको ब्याज 58 साल की उम्र तक मिलता रहेगा.
पीएफ रूल के अनुसार किसी खाते में 36 महीने तक अगर कोई अमाउंट जमा नहीं होता है. तो उसे डिएक्टिवेट कर दिया जाता है. लेकिन अगर जैसे ही नौकरी मिल जाती है आप फंड को ट्रांस्फर कर सकते हैं. इसलिए बेहतर हैं कि जॉब चेंज करते ही अपने पीएफ अमाउंट को नई आईडी में ट्रांस्फर कर लें.